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शारदीय नवरात्र : इस बार हाथी पर सवार होकर आएंगी मां दुर्गा
Fri, 19 Sep 2025 01:23 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
Updated Fri, 19 Sep 2025 01:23 AM IST
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शारदीय नवरात्र 22 सितंबर से शुरू हो रही है। इस बार मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर आएंगी और पालकी पर सवार होकर जाएंगी। इतना ही नहीं, इस बार चतुर्थी तिथि की बढ़ोत्तरी होने से नवरात्र 10 दिन की होगी।
साल में चार नवरात्र होती है। चैत्र नवरात्र, शारदीय नवरात्र के अलावा दो गुप्त नवरात्र होती है। शारदीय नवरात्र का विशेष महत्व होता है। इस बार नवरात्र की शुरुआत 22 सितंबर से होगी। समापन दो अक्तूबर को होगा। हुबलाल संस्कृत महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य पं. ज्ञानेंद्र शास्त्री ने बताया कि इस बार माता रानी गज यानी हाथी पर सवार होकर आएंगी और पालकी पर सवार होकर जाएंगी। इस बार नवरात्र का योग देश और दुनिया के लिए सुखदायक है। इसके साथ ही शक्ति की आराधना का यह पर्व राष्ट्र के लिए उन्नति सूचक है। देश की संप्रभुता एवं प्रभाव बढ़ेगा।
दरअसल, चतुर्थी तिथि में बढ़ोतरी होने के कारण नौ के बजाय 10 दिन तक शक्ति की आराधना भक्त करेंगे। नवरात्र में तिथि की बढ़ोतरी अच्छी मानी जाती है। देश का व्यापार बढ़ेगा, पड़ोसियों से संबंध सुधरेंगे और यह शुभ फलदायक है। ये संकेत है कि आने वाला समय सुख-समृद्धि से परिपूर्ण होगा।
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प्रतिपदा पर हस्त नक्षत्र में होगी घटस्थापना
शारदीय नवरात्र की शुरुआत प्रतिपदा तिथि पर होगी। इस दिन सुबह से ही हस्त नक्षत्र लग रहा है। इस दौरान कलश स्थापना बहुत शुभकारी मानी जाती है। इस दिन पूरे दिन शुक्ल योग भी मिल रहा है।
घटस्थापना मुहूर्त -
सुबह 05:58 बजे से 07:52 बजे तक
घटस्थापना अभिजीत मुहूर्त -
दोपहर 11:37 बजे से 12:25 बजे तक
शारदीय नवरात्रि तिथि
22 सितंबर : प्रतिपदा तिथि- शैल पुत्री।
23 सितंबर : द्वितीया तिथि- ब्रम्हचारणी।
24 सितंबर : तृतीया तिथि- चंद्रघण्टा।
25 सितंबर : चतुर्थी तिथि-कूष्मांडा।
26 सितंबर : चतुर्थी तिथि-कूष्मांडा।
27 सितंबर : पंचमी तिथि-स्कंद माता।
28 सितंबर : षष्ठी तिथि-कात्यायनी
29 सितंबर : सप्तमी तिथि-काल रात्रि।
30 सितंबर : अष्टमी तिथि-महागौरी।
01 अक्तूबर : नवमी तिथि-सिद्धि दात्री
02 अक्तूबर : दशमी, दशहरा
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साल में चार नवरात्र होती है। चैत्र नवरात्र, शारदीय नवरात्र के अलावा दो गुप्त नवरात्र होती है। शारदीय नवरात्र का विशेष महत्व होता है। इस बार नवरात्र की शुरुआत 22 सितंबर से होगी। समापन दो अक्तूबर को होगा। हुबलाल संस्कृत महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य पं. ज्ञानेंद्र शास्त्री ने बताया कि इस बार माता रानी गज यानी हाथी पर सवार होकर आएंगी और पालकी पर सवार होकर जाएंगी। इस बार नवरात्र का योग देश और दुनिया के लिए सुखदायक है। इसके साथ ही शक्ति की आराधना का यह पर्व राष्ट्र के लिए उन्नति सूचक है। देश की संप्रभुता एवं प्रभाव बढ़ेगा।
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दरअसल, चतुर्थी तिथि में बढ़ोतरी होने के कारण नौ के बजाय 10 दिन तक शक्ति की आराधना भक्त करेंगे। नवरात्र में तिथि की बढ़ोतरी अच्छी मानी जाती है। देश का व्यापार बढ़ेगा, पड़ोसियों से संबंध सुधरेंगे और यह शुभ फलदायक है। ये संकेत है कि आने वाला समय सुख-समृद्धि से परिपूर्ण होगा।
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प्रतिपदा पर हस्त नक्षत्र में होगी घटस्थापना
शारदीय नवरात्र की शुरुआत प्रतिपदा तिथि पर होगी। इस दिन सुबह से ही हस्त नक्षत्र लग रहा है। इस दौरान कलश स्थापना बहुत शुभकारी मानी जाती है। इस दिन पूरे दिन शुक्ल योग भी मिल रहा है।
घटस्थापना मुहूर्त -
सुबह 05:58 बजे से 07:52 बजे तक
घटस्थापना अभिजीत मुहूर्त -
दोपहर 11:37 बजे से 12:25 बजे तक
शारदीय नवरात्रि तिथि
22 सितंबर : प्रतिपदा तिथि- शैल पुत्री।
23 सितंबर : द्वितीया तिथि- ब्रम्हचारणी।
24 सितंबर : तृतीया तिथि- चंद्रघण्टा।
25 सितंबर : चतुर्थी तिथि-कूष्मांडा।
26 सितंबर : चतुर्थी तिथि-कूष्मांडा।
27 सितंबर : पंचमी तिथि-स्कंद माता।
28 सितंबर : षष्ठी तिथि-कात्यायनी
29 सितंबर : सप्तमी तिथि-काल रात्रि।
30 सितंबर : अष्टमी तिथि-महागौरी।
01 अक्तूबर : नवमी तिथि-सिद्धि दात्री
02 अक्तूबर : दशमी, दशहरा