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सड़क दुर्घटनाएं दे गईं जीवनभर का गम

Thu, 27 Dec 2018 12:40 AM IST
shailendra Kumar अमर उजाला ब्यूरो, कौशाम्बी
अमर उजाला ब्यूरो, कौशाम्बी Published by: shailendra Kumar Updated Thu, 27 Dec 2018 12:40 AM IST
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मंझनपुर। दोआबा की सड़कें साल 2018 में खून से सनी रहीं। मार्ग दुर्घटनाओं ने करीब 190 लोगों की जान ले ली। 350 से अधिक घायल भी हुए। जिन्होंने अपनों को खोया है, उन परिवारों में अभी भी मौत का सियापा पसरा हुआ है। हैरानी की बात है कि इन हादसों से लोग सबक लेते नहीं दिख रहे हैं।
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कौशाम्बी जिले में सड़क दुर्घटनाएं आम हो चुकी हैं। प्रयागराज-कानपुर नेशनल हाईवे हो अथवा अन्य व्यस्त सड़कें। लापरवाह तरीके से फर्राटा भरने वालों के लिए सभी मार्गों पर सफर जोखिम भरा साबित हो रहा है। देखा जाता है कि आए दिन दुर्घटनाओं में किसी न किसी परिवार की खुशियां काफूर हो जाती हैं। हादसों का शिकार होने वाले अक्सर महीनों अस्पतालों में जिंदगी-मौत से जूझते हैं। पुलिस विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो जनवरी से लेकर दिसंबर के गुजरे हुए अब तक के दिनों के बीच जनपद में करीब 410 सड़क दुर्घटनाएं हुई हैं। इनमें 190 की मौत और 350 से अधिक काल के गाल में समाने से बचे हैं। जिन परिवारों ने अपनों को खोया है, वहां नया साल आने की तनिक भी खुशी नहीं है।
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 सरायअकिल कोतवाली क्षेत्र के रक्सराई गांव में 24 जून 2018 को साल का सबसे बड़ा हादसा हुआ। रविवार की सुबह थी। हर कोई अपने कामों में व्यस्त था। तभी बाइक  व साइकिल सवारों को कुचलते हुए बारातियों से भरी एक बोलेरो अनियंत्रित होकर पलट गई। हादसे में आठ लोगों की मौत हो गई थी। जबकि पांच घायल हुए थे। जिन परिवारों ने अपनों को खोया है, वह अभी तक सदमे से उबर नहीं पाए हैं।
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नियमानुसार दस करोड़ से ऊपर की सड़क परियोजनाओं में दो फीसदी रकम सड़क सुरक्षा के लिए निर्धारित होती है। इस रकम से सड़कों पर संकेतक, गोल चौराहा, स्पीड ब्रेकर, हाईवे किनारे पेड़ों की छंटाई समेत दूसरे अन्य कार्यों में खर्च करने का प्रावधान है। ताकि, हादसे रोके जा सकें। पर, जिले की कार्यदायी संस्थाएं ऐसा नहीं कर रही हैं। पिछले दिनों सड़क सुरक्षा की बैठक में लापरवाही उजागर होने पर डीएम मनीष कुमार ने कार्यदायी संस्थाओं के जिम्मेदारों को कड़ी फटकार भी लगाई थी।
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