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तहसील प्रशासन की शह पर फल-फूल रही थीं रियल स्टेट कंपनियां
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
Updated Mon, 24 Apr 2017 01:43 AM IST
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रियल स्टेट कंपनियां यूं ही नहीं मनमानी कर रही थीं। तहसील प्रशासन का उनको पूरा सहयोग मिला था। शिकायतों के बाद भी तहसील प्रशासन की खामोशी इसकी पुष्टि करती है। दबाव पड़ने पर तहसील के अधिकारी एडीए का मामला बताकर पल्ला झाड़ लेते थे। मगर जब एडीए ने कार्रवाई शुरू की तो मजबूरी में तहसील प्रशासन भी सक्रिय हो गया।
चायल तहसील क्षेत्र में रियल स्टेट कंपनियों का पूरा जाल फैला है। कानपुर-इलाहाबाद हाईवे व इलाहाबाद-सरायअकिल मार्ग पर कई नामी-गिरामी कंपनियों ने अपना दफ्तर खोल रखा है। प्लाटिंग करने के बाद तमाम तरह के प्रलोभन देकर यह कंपनियां प्लाट बेच रही हैं। सैनिक सुरक्षा इनक्लेव व ग्रीन सिटी आवास योजना ने बिना एडीए से नक्शा पास करवाए जमीन की प्लाटिंग कर बेचना शुरू कर दिया। कंपनियाें ने अवैध कब्जा भी कर रखा था। कोइलहा की प्रधान ने इसकी शिकायत भी की थी।
चकरोड की भूमि पर कब्जा हुआ था। ग्रामीणों के दबाव बनाने पर अधिकारियों ने जांच की तो मामला सही पाया था। इसके बाद भी कंपनी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की। किसानों से सस्ती दर पर भूमि खरीदने के बाद उनको कई गुना दामों पर बेचा जा रहा था। कंपनियों ने प्लाटिंग के इस खेल के जरिए करोड़ों रुपये का वारा-न्यारा किया। शिकायतों का दौर चलता रहा। रियल स्टेट कंपनियों की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ा। सीएम योगी ने तेवर बदला तो एडीए सक्रिय हुआ और कार्रवाई कर एक कालेज व दो रियल स्टेट कंपनी के दफ्तरों को ढहा दिया। इसके बाद तहसील प्रशासन भी सक्रिय हुआ।
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चायल तहसील क्षेत्र में रियल स्टेट कंपनियों का पूरा जाल फैला है। कानपुर-इलाहाबाद हाईवे व इलाहाबाद-सरायअकिल मार्ग पर कई नामी-गिरामी कंपनियों ने अपना दफ्तर खोल रखा है। प्लाटिंग करने के बाद तमाम तरह के प्रलोभन देकर यह कंपनियां प्लाट बेच रही हैं। सैनिक सुरक्षा इनक्लेव व ग्रीन सिटी आवास योजना ने बिना एडीए से नक्शा पास करवाए जमीन की प्लाटिंग कर बेचना शुरू कर दिया। कंपनियाें ने अवैध कब्जा भी कर रखा था। कोइलहा की प्रधान ने इसकी शिकायत भी की थी।
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चकरोड की भूमि पर कब्जा हुआ था। ग्रामीणों के दबाव बनाने पर अधिकारियों ने जांच की तो मामला सही पाया था। इसके बाद भी कंपनी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की। किसानों से सस्ती दर पर भूमि खरीदने के बाद उनको कई गुना दामों पर बेचा जा रहा था। कंपनियों ने प्लाटिंग के इस खेल के जरिए करोड़ों रुपये का वारा-न्यारा किया। शिकायतों का दौर चलता रहा। रियल स्टेट कंपनियों की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ा। सीएम योगी ने तेवर बदला तो एडीए सक्रिय हुआ और कार्रवाई कर एक कालेज व दो रियल स्टेट कंपनी के दफ्तरों को ढहा दिया। इसके बाद तहसील प्रशासन भी सक्रिय हुआ।
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