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रामलीला: देवर्षि नारद की तपस्या से हिल उठा इंद्र का सिंहासन
Wed, 14 Oct 2026 12:51 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
Updated Wed, 14 Oct 2026 12:51 AM IST
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गुवारा तैयबपुर की रामलीला में नारद मोह की लीला का मंचन करते कलाकार स्रोत कमेटी
- फोटो : सड़क पर उतर यातायात व्यवस्था संभालती एनसीसी कैडे्टस। स्त्रोत: पुलिस
गुवारा तैयबपुर गांव की 143 साल पुरानी ऐतिहासिक रामलीला में सोमवार की रात नारद मोह की लीला का भावपूर्ण मंचन किया गया। कलाकारों ने अपने अभिनय से दिखाया कि किस तरह तपस्या के अभिमान में डूबे देवर्षि नारद भगवान विष्णु की माया में उलझ गए। लीला देखने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण और श्रद्धालु मौजूद रहे।
मंचन के अनुसार, देवर्षि नारद की कठोर तपस्या से देवराज इंद्र का सिंहासन डोलने लगा। इंद्र ने उनकी तपस्या भंग करने के लिए कामदेव को भेजा लेकिन वह अपने प्रयास में सफल नहीं हो सका। इससे नारद को अपनी तपस्या पर अभिमान हो गया। वह अपनी उपलब्धि का बखान करने पहले ब्रह्मा और फिर भगवान शिव के पास पहुंचे। दोनों ने उन्हें अहंकार से दूर रहने की सलाह दी लेकिन नारद नहीं माने।
इसके बाद देवर्षि भगवान विष्णु के पास पहुंचे और कामदेव के असफल होने की बात बताई। नारद का अभिमान दूर करने के लिए भगवान विष्णु ने अपनी माया से एक सुंदर नगरी की रचना की। वहां पहुंचकर नारद स्त्री के मोह में पड़ गए। माया के प्रभाव से भगवान विष्णु ने उनका मुख वानर जैसा कर दिया। यह देखकर नारद क्रोधित हो गए और भगवान विष्णु को श्राप दे दिया। इस दाैरान कमेटी के अध्यक्ष आकाश यादव, डॉ. सुभाष विश्वकर्मा, ज्ञान मौर्य, ज्ञानेंद्र यादव आदि मौजूद रहे।
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मंचन के अनुसार, देवर्षि नारद की कठोर तपस्या से देवराज इंद्र का सिंहासन डोलने लगा। इंद्र ने उनकी तपस्या भंग करने के लिए कामदेव को भेजा लेकिन वह अपने प्रयास में सफल नहीं हो सका। इससे नारद को अपनी तपस्या पर अभिमान हो गया। वह अपनी उपलब्धि का बखान करने पहले ब्रह्मा और फिर भगवान शिव के पास पहुंचे। दोनों ने उन्हें अहंकार से दूर रहने की सलाह दी लेकिन नारद नहीं माने।
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इसके बाद देवर्षि भगवान विष्णु के पास पहुंचे और कामदेव के असफल होने की बात बताई। नारद का अभिमान दूर करने के लिए भगवान विष्णु ने अपनी माया से एक सुंदर नगरी की रचना की। वहां पहुंचकर नारद स्त्री के मोह में पड़ गए। माया के प्रभाव से भगवान विष्णु ने उनका मुख वानर जैसा कर दिया। यह देखकर नारद क्रोधित हो गए और भगवान विष्णु को श्राप दे दिया। इस दाैरान कमेटी के अध्यक्ष आकाश यादव, डॉ. सुभाष विश्वकर्मा, ज्ञान मौर्य, ज्ञानेंद्र यादव आदि मौजूद रहे।
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