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...जब परशुराम हो गए आगबबूला
कौशाम्बी ब्यूरो
Updated Sat, 22 Oct 2016 12:52 AM IST
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करारी रामलीला में बृहस्पतिवार रात परशुराम-लक्ष्मण संवाद सुनकर दर्शक रोमांचित हुए। मंचन के दौरान रामलीला मैदान दर्शकों से खचाखच भरा रहा। करारी कस्बे में मंचित हो रही रामलीला में बृहस्पतिवार को पांचवें दिन कलाकारों ने परशुराम-लक्ष्मण संवाद का मंचन किया। शिव धनुष टूटने की जानकारी होने पर परशुराम आग बबूला होकर जनकपुर पहुंचे। क्रोध जाहिर करते हुए उन्होंने कहा कि जिसने भी भगवान शिव के धनुष को तोड़ने की गलती की है वह समाज से बाहर हो जाएं।
ऐसा नहीं किया तो सीता स्वयंवर में आए सभी राजा मारे जाएंगे। परशुराम के क्रोध को देखते हुए लक्ष्मण से रहा नहीं गया। उन्होंने कहा कि बचपन में उन्होंने ऐसे तमाम धनुष तोड़े पर हे मुनिवर आपने ऐसा क्रोध कभी नहीं किया। भगवान परशुराम संवाद करते हुए लक्ष्मण भी आक्रोशित हो उठे। उन्होंने कहा ‘इहां कुम्हड़ बतिया कोउ नाही, देख तर्जनी ते मर जाहीं’ दोनाें के बीच बढ़ रहे संवाद को देखते हुए भगवान श्रीराम को बीच में आना पड़ा। उन्होंने परशुराम जी से कहा कि हे मुनिवर ‘नाथ शंभुधनु भंजनिहारा, होइहैं कोउ एक दास तुम्हारा’। जब परशुराम जी भगवान राम की ओर मुखातिब हुए और उन्हें आभास कि भगवान विष्णु अवतार ले चुके हैं और यह वही हैं तो उनका क्रोध शांत हुआ।
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ऐसा नहीं किया तो सीता स्वयंवर में आए सभी राजा मारे जाएंगे। परशुराम के क्रोध को देखते हुए लक्ष्मण से रहा नहीं गया। उन्होंने कहा कि बचपन में उन्होंने ऐसे तमाम धनुष तोड़े पर हे मुनिवर आपने ऐसा क्रोध कभी नहीं किया। भगवान परशुराम संवाद करते हुए लक्ष्मण भी आक्रोशित हो उठे। उन्होंने कहा ‘इहां कुम्हड़ बतिया कोउ नाही, देख तर्जनी ते मर जाहीं’ दोनाें के बीच बढ़ रहे संवाद को देखते हुए भगवान श्रीराम को बीच में आना पड़ा। उन्होंने परशुराम जी से कहा कि हे मुनिवर ‘नाथ शंभुधनु भंजनिहारा, होइहैं कोउ एक दास तुम्हारा’। जब परशुराम जी भगवान राम की ओर मुखातिब हुए और उन्हें आभास कि भगवान विष्णु अवतार ले चुके हैं और यह वही हैं तो उनका क्रोध शांत हुआ।
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