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झूम के बरसे बदरा, गर्मी से राहत
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
Updated Thu, 23 Jun 2016 12:46 AM IST
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आषाढ़ की शुरुआत में बादलों ने ऐसी दरियादिली दिखाई कि तन, मन झूम उठे। दोआबा में बुधवार की भोर से दोपहर 11 बजे तक झमाझम बारिश हुई। झूम कर बरसे बदरा ने दोआबा के बाशिंदों को भीषण गर्मी और उमस से राहत दिला दी। गर्मी से उबल रहे लोगों ने सुबह बारिश में भीगकर बरसात का भरपूर आनंद उठाया। बुधवार की सुबह पहली बरसात होते ही मौसम दिन भर सुहाना रहा। बारिश के साथ दिनभर चली ठंड हवाओं ने गर्मी और उमस से जूझ रहे लोगों को पूरी राहत दिया।
अप्रैल के पहले पखवारे से जून के तीसरे सप्ताह तक पड़ी भीषड़ गर्मी से दोआबा के लोग बेहाल हो उठे। सूखाग्रस्त जिले में भीषण गर्मी के दौरान जनमानस तो बेहाल था ही पशु पक्षी भी व्याकुल नजर आ रहे थे। जून माह की शुरुआत से बूंदाबांदी के बाद शुरू हुई। उमस ने लोगों के दिन का चैन और रात की नींद छीन लिया था। रात भर लोगों को टहलकर बिताना पड़ता था। तीन माह तक पड़ी बेतहाशा गर्मी और सूखे तालाबों के चलते जंगली जीवों को पीने के लिए बूंद भर पानी नसीब नहीं हो रहा था।
ऐसे में प्यास बुझाने के लिए उन्हें गांव घुसने भी गुरेज नहीं रहा। तालाबों में पानी न होने से वह नालियों के गंदे पानी से प्यास बुझा रहे थे। जनमानस, जीव-जंतु, पशु-पक्षी सभी को झमाझम बारिश का बेसब्री से इंतजार था। बुधवार की भोर मौसम में आई तब्दीली से लोगों के इंतजार की घड़ियां खत्म हो गईं। भोर में लगभग चार बजे से दोपहर 11 बजे तक झमाझम हुई बारिश से मौसम जहां दिनभर सुहाना रहा वहीं लोगों ने गर्मी और उसम से राहत महसूस की।
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बुधवार की भोर से दोपहर तक हुई झमाझम बारिश ने लोगों को गर्मी और उमस राहत दिला दी लेकिन कस्बाइयों के लिए बड़ी समस्या खड़ी हो गई। नगर पंचायत सराय अकिल, चायल, भरवारी, सिराथू, अजुहा, मंझनपुर, करारी आदि कस्बों में बरसात होते ही नालियों का कचरा सड़क पर फैल गया। लोगों के घरों के सामने सड़क पर फैली गंदगी ने घर से बाहर निकलना मुश्किल कर दिया है। यूं कहें कि मौसम की पहली बरसात ने नगर पंचायत क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को गर्मी और उमस से भले ही राहत दिला दी पर नालियों की गंदगी डोर-टू-डोर पहुंच गई।
सूखाग्रस्त दोआबा के तालाब, पोखरे अप्रैल माह की शुरुआत में ही पूरी तरह से सूख गए थे। तालाब, पोखरों में पानी न होने की वजह से चिलचिलाती धूप और गर्मी से जंगली जीव प्यास से हांफते नजर आ रहे थे। उन्हें बदन की गर्मी शांत करना तो दूर प्यास बुझाने के लिए भी पानी नसीब नहीं हो रहा था। बुधवार की भोर से दोपहर 11 बजे तक हुई झमाझम बारिश ने जनमानस के साथ-साथ जंगली जीवों की न केवल प्यास बुझाई बल्कि गर्मी से उनके बदन को भी राहत मिली।
मई और जून में पड़ी भीषण गर्मी ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया। ऐसे में दोआबा का किसान धान की नर्सरी डालने से कतरा रहा था। कुछ लोगों ने पिछले दिनों हुई बूंदाबांदी के बाद नर्सरी डाली थी लेकिन गर्मी के चलते नर्सरी के अंकुर ठीक से नहीं निकले। बुधवार को बारिश के साथ मौसम सुहाना हुआ तो किसान धान की नर्सरी करने के लिए खेतों की ओर दौड़ पड़े। बारिश बंद होते ही किसान खेतों में धान की नर्सरी डालने की तैयारी में जुट गए हैं।
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अप्रैल के पहले पखवारे से जून के तीसरे सप्ताह तक पड़ी भीषड़ गर्मी से दोआबा के लोग बेहाल हो उठे। सूखाग्रस्त जिले में भीषण गर्मी के दौरान जनमानस तो बेहाल था ही पशु पक्षी भी व्याकुल नजर आ रहे थे। जून माह की शुरुआत से बूंदाबांदी के बाद शुरू हुई। उमस ने लोगों के दिन का चैन और रात की नींद छीन लिया था। रात भर लोगों को टहलकर बिताना पड़ता था। तीन माह तक पड़ी बेतहाशा गर्मी और सूखे तालाबों के चलते जंगली जीवों को पीने के लिए बूंद भर पानी नसीब नहीं हो रहा था।
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ऐसे में प्यास बुझाने के लिए उन्हें गांव घुसने भी गुरेज नहीं रहा। तालाबों में पानी न होने से वह नालियों के गंदे पानी से प्यास बुझा रहे थे। जनमानस, जीव-जंतु, पशु-पक्षी सभी को झमाझम बारिश का बेसब्री से इंतजार था। बुधवार की भोर मौसम में आई तब्दीली से लोगों के इंतजार की घड़ियां खत्म हो गईं। भोर में लगभग चार बजे से दोपहर 11 बजे तक झमाझम हुई बारिश से मौसम जहां दिनभर सुहाना रहा वहीं लोगों ने गर्मी और उसम से राहत महसूस की।
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बुधवार की भोर से दोपहर तक हुई झमाझम बारिश ने लोगों को गर्मी और उमस राहत दिला दी लेकिन कस्बाइयों के लिए बड़ी समस्या खड़ी हो गई। नगर पंचायत सराय अकिल, चायल, भरवारी, सिराथू, अजुहा, मंझनपुर, करारी आदि कस्बों में बरसात होते ही नालियों का कचरा सड़क पर फैल गया। लोगों के घरों के सामने सड़क पर फैली गंदगी ने घर से बाहर निकलना मुश्किल कर दिया है। यूं कहें कि मौसम की पहली बरसात ने नगर पंचायत क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को गर्मी और उमस से भले ही राहत दिला दी पर नालियों की गंदगी डोर-टू-डोर पहुंच गई।
सूखाग्रस्त दोआबा के तालाब, पोखरे अप्रैल माह की शुरुआत में ही पूरी तरह से सूख गए थे। तालाब, पोखरों में पानी न होने की वजह से चिलचिलाती धूप और गर्मी से जंगली जीव प्यास से हांफते नजर आ रहे थे। उन्हें बदन की गर्मी शांत करना तो दूर प्यास बुझाने के लिए भी पानी नसीब नहीं हो रहा था। बुधवार की भोर से दोपहर 11 बजे तक हुई झमाझम बारिश ने जनमानस के साथ-साथ जंगली जीवों की न केवल प्यास बुझाई बल्कि गर्मी से उनके बदन को भी राहत मिली।
मई और जून में पड़ी भीषण गर्मी ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया। ऐसे में दोआबा का किसान धान की नर्सरी डालने से कतरा रहा था। कुछ लोगों ने पिछले दिनों हुई बूंदाबांदी के बाद नर्सरी डाली थी लेकिन गर्मी के चलते नर्सरी के अंकुर ठीक से नहीं निकले। बुधवार को बारिश के साथ मौसम सुहाना हुआ तो किसान धान की नर्सरी करने के लिए खेतों की ओर दौड़ पड़े। बारिश बंद होते ही किसान खेतों में धान की नर्सरी डालने की तैयारी में जुट गए हैं।