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मौसम का वार, घर-घर बीमार
kaushambi
Updated Wed, 24 Oct 2018 12:15 AM IST
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मंझनपुर। दिन-रात के तापमान में भारी अंतर के कारण तेजी के साथ मौसम में बदलाव हो रहा है। इसकी चपेट में आने से लोग वायर फीवर के शिकार हो रहे हैं। हालात ये है कि कोई घर नहीं बचा जहां कोई न कोई सदस्य बीमार हो। इसका असर बच्चों और बुजुर्गों पर ज्यादा देखने को मिल रहा है। अस्पताल में भी मरीजों की भीड़ बढ़ी है। कौशाम्बी में पिछले एक हफ्ते से रात में पारा 20 के नीचे चला जा रहा है। जबकि दिन का तापमान चढ़कर 30 से 33 डिग्री के बीच पहुंच जाता है। इसके चलते मौसम में जबर्दस्त बदलाव हो रहा है। रात में लोग मच्छरों से बचने के लिए पंखे का इस्तेमाल करते हैं तो ठंड का एहसास होता है। पंखा नहीं चलाने पर मच्छर डंक मार रहे हैं।
नतीजतन लोग वायरल और मलेरिया बुखार के शिकार हो रहे हैं। हफ्ते भर से आलम ये है कि हर घर में एक-दो सदस्य बीमार चल रहा है। मंगलवार को जिला अस्पताल में ऐसे मरीजों की खासी भीड़ दिखी। अस्पताल में इधर चार दिन से रोजाना ओपीडी में छह सौ से ऊपर मरीज पहुंच रहे हैं। डॉ विवेक केसरवानी ने बताया कि इस वक्त 60 फीसदी मरीज बुखार पीड़ित आ रहे हैं। इनमें बच्चों की संख्या ज्यादा है। पूरबशरीरा से इलाज अपने दो बच्चों का इलाज कराने आए रामरतन पाल ने बताया कि हफ्ते भर पहले छोटे बेटे शिवशंकर को बुखार आया तो स्थानीय प्राइवेट चिकित्सक से इलाज कराया। पर, आराम नहीं मिला। इसके साथ ही दूसरे बेटे रामशंकर को भी सोमवार से बुखार आ गया। इसी तरह से तन्नापर के शुकरूलाल, नारा के ज्ञानचंद्र और बरई बंधवा के शिवराम भी बुखार का इलाज कराने पहुंचे। सरकारी अस्पतालों से ज्यादा प्राइवेट क्लीनिकों पर बुखार पीड़ित पहुंच रहे हैं। डॉक्टर इलाज के साथ ही मौसम को देखते हुए एहतियात बरतने की सलाह दे रहे हैं।
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नतीजतन लोग वायरल और मलेरिया बुखार के शिकार हो रहे हैं। हफ्ते भर से आलम ये है कि हर घर में एक-दो सदस्य बीमार चल रहा है। मंगलवार को जिला अस्पताल में ऐसे मरीजों की खासी भीड़ दिखी। अस्पताल में इधर चार दिन से रोजाना ओपीडी में छह सौ से ऊपर मरीज पहुंच रहे हैं। डॉ विवेक केसरवानी ने बताया कि इस वक्त 60 फीसदी मरीज बुखार पीड़ित आ रहे हैं। इनमें बच्चों की संख्या ज्यादा है। पूरबशरीरा से इलाज अपने दो बच्चों का इलाज कराने आए रामरतन पाल ने बताया कि हफ्ते भर पहले छोटे बेटे शिवशंकर को बुखार आया तो स्थानीय प्राइवेट चिकित्सक से इलाज कराया। पर, आराम नहीं मिला। इसके साथ ही दूसरे बेटे रामशंकर को भी सोमवार से बुखार आ गया। इसी तरह से तन्नापर के शुकरूलाल, नारा के ज्ञानचंद्र और बरई बंधवा के शिवराम भी बुखार का इलाज कराने पहुंचे। सरकारी अस्पतालों से ज्यादा प्राइवेट क्लीनिकों पर बुखार पीड़ित पहुंच रहे हैं। डॉक्टर इलाज के साथ ही मौसम को देखते हुए एहतियात बरतने की सलाह दे रहे हैं।
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