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नहीं रुके ओवरलोड वाहनों के चक्के
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
Updated Mon, 23 May 2016 12:28 AM IST
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ट्रकों की इंट्री और ओवरलोड परिवहन का मामला दिनों दिन उलझता जा रहा है। प्रमुख सचिव का पत्र मिलने के बाद डीएम ने दी गई इंट्री की सूची एआरटीओ से तलब की थी। लेकिन आज तक न तो डीएम को इंट्री के वाहनों की सूची भेजी गई और न ही फर्राटा भर रहे ओवर लोड वाहनों को पकड़ने की कोशिश हुई। इससे साफ है कि इंट्री और ओवर लोड वाहनों के बीच परिवहन विभाग में कहीं न कहीं गड़बड़ जरूर है।
कौशाम्बी से गुजरने वाले ओवर लोड वाहनों की इंट्री का मामला शासन स्तर तक छाया है। मोटर एसोसिएशन अध्यक्ष बीएन गुप्ता की शिकायत के बाद प्रमुख सचिव परिवहन ने डीएम से वाहनों को दी जाने वाली इंट्री की रिपोर्ट तलब की है। उनका पत्र मिलने के बाद डीएम अखंड प्रताप सिंह ने चार दिन पहले एआरटीओ पीके सिंह से किन-किन वाहनों को इंट्री दी गई इसकी सूची तलब की लेकिन चार दिन बीत जाने के बाद भी परिवहन विभाग के जिम्मेदार डीएम को रिपोर्ट नहीं भेज सके। खास बात तो यह है कि प्रमुख सचिव मामले को लेकर संजीदा हैं, इसके बाद भी जिले में ओवर लोड वाहनों ने फर्राटा भरना बंद नहीं किया। हद तो तब हो गई जब सामने से गुजर रहे ओवरलोड वाहनों पर नजर पड़ते ही जिम्मेदारों ने मुंह मोड़ लिया। इससे साफ है कि इंट्री और ओवरलोड वाहनों के संचालन के बीच कुछ न कुछ गड़बड़ी जरूर है। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि मामले में परिवहन विभाग की भूमिका साफ सुथरी नहीं है।
जिले में चल रहे ओवरलोड वाहनों के स्वामियों ने महीने भर की इंट्री ले रखी है। हालांकि महीना खत्म होने में कुछ दिन ही शेष रह गए हैं। ऐसे में ओवर लोड वाहनों को बीच में कैसे छेड़ा जाए, इसे लेकर मंथन शुरू है। सूत्रों की माने तो इंट्री ले चुके वाहनों को यदि बीच में छेड़ा गया तो वह अपने-अपने वाहन सड़कों पर खड़ा कर बखेड़ा कर सकते हैं। इससे बैक डोर से चल रहे इंट्री के कारोबार की पुष्टि भी हो जाएगी। इससे बचने के लिए परिवहन विभाग के जिम्मेदारों को महीना पूरा होने का इंतजार है।
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जिले में ओवर लोड वाहनों का धड़ल्ले से संचालन होने के कारण सड़कों की सेहत लगातार बिगड़ती जा रही है। जो सड़के बालू घाट से संपर्क रखती हैं उनके बनने के बाद गड्ढे में तब्दील होने में देर नहीं लगती। ओवरलोड के कारण यह सड़कें पहले दरकती हैं और बाद में गिट्टियां उखड़कर गायब हो जाती है। बानगी के तौर पर डेढ़ावल, पभोषा, महिला, ब्यूर, कटैया, तिल्हापुर को जाने वाले सड़कों को लिया जा सकता है। ओवरलोड वाहनों के चलते इन सड़कों की गिट्टियां गायब होती जा रही हैं लेकिन अफसरों को इसकी तनिक भी परवाह नहीं है।
डीएम ने रिपोट मांगी है। सोमवार तक रिपोर्ट भेज दी जाएगी। जो वाहन ओवर लोड चल रहे हैं वह कैसे चल रहे हैं इसकी जानकारी सबको है। मैं तो क्या कोई भी इन्हें रोकने की हिम्मत नहीं कर सकता।
पीके सिंह, एआरटीओ प्रवर्तन
अवैध बालू खनन मामले में मातहत एसपी को गुमराह कर रहे हैं। शनिवार दोपहर को आदेश के बाद मातहतों ने दिन में होने वाले खनन को रुकवा दिया लेकिन शाम होते ही इस कारोबार में तेजी आ गई। इसका प्रमाण जिला पंचायत के बैरियर से कटने वाली पर्चियां और सड़कों पर फर्राटा भरते बालू लदे वाहन देने को पर्याप्त हैं।
पुलिस अधीक्षक वीके मिश्र यमुना घाटों पर कराए जा रहे अवैध बालू खनन को लेकर संजीदा हो गए हैं। उन्होंने शनिवार की दोपहर संबंधित पांच थानेदारों को घंटे भर के भीतर बालू खनन रुकवाने का फरमान जारी किया। आका का फरमान मिला तो मातहत खनन करने वालों को सूचित कर यमुना घाटों के लिए निकल पड़े।
जब तक थानाध्यक्ष की टीम यमुना बालू घाटों पर पहुंची तब तक अवैध खनन में लगी जेसीबी, पोकलैंड और परिवहन के लिए खड़ी ट्रकें गायब हो गईं। यदि दो घाट पर जेसीबी, पोकलैंड मिली भी तो संबंधित थानेदार ने कारोबारी पर रहम खाया और दिन में घाट पर मशीन चलाने से साफ मना कर दिया। शाम तक मातहतों ने एसपी को रिपोर्ट भेज दिया कि उनके सर्किल में कहीं भी अवैध खनन नहीं हो रहा है लेकिन जैसे ही शाम हुई घाटों पर मशीनें कूद पड़ीं। रात भर कराए गए अवैध खनन का बालू लादकर ट्रकें रविवार की सुबह से शाम तक सड़कों पर फर्राटा भरती नजर आईं। ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि जब एसपी ने खनन बंद करा दिया तो ट्रकों को बालू कहां से मिल रही है। क्या ट्रक चालक घाटों से स्वयं बालू लादकर ला रहे हैं।
जिले में बालू का अवैध खनन पूरी तरह से ठप करा दिया गया है। ऐसी रिपोर्ट संबंधित थानेदारों ने पुलिस अधीक्षक वीरेंद्र कुमार मिश्र को शनिवार की शाम भेजी है। एसपी ने मातहतों की बात पर मान लिया कि उनकी टीम ने आदेश का पालन कराया लेकिन रविवार की सुबह से सड़कों पर बालू का परिवहन कर रही ट्रकें सवाल खड़ा करने लगी कि इन्हें बालू कहां से मिल रहा है। इतना ही नहीं जिले भर में बने जिला पंचायत के नौ बैरियरों पर किस चीज के परिवहन की पर्चियां काटी जा रही है। इसे सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि बालू खनन बंद है या फिर बेखौफ होकर कराया जा रहा है।
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कौशाम्बी से गुजरने वाले ओवर लोड वाहनों की इंट्री का मामला शासन स्तर तक छाया है। मोटर एसोसिएशन अध्यक्ष बीएन गुप्ता की शिकायत के बाद प्रमुख सचिव परिवहन ने डीएम से वाहनों को दी जाने वाली इंट्री की रिपोर्ट तलब की है। उनका पत्र मिलने के बाद डीएम अखंड प्रताप सिंह ने चार दिन पहले एआरटीओ पीके सिंह से किन-किन वाहनों को इंट्री दी गई इसकी सूची तलब की लेकिन चार दिन बीत जाने के बाद भी परिवहन विभाग के जिम्मेदार डीएम को रिपोर्ट नहीं भेज सके। खास बात तो यह है कि प्रमुख सचिव मामले को लेकर संजीदा हैं, इसके बाद भी जिले में ओवर लोड वाहनों ने फर्राटा भरना बंद नहीं किया। हद तो तब हो गई जब सामने से गुजर रहे ओवरलोड वाहनों पर नजर पड़ते ही जिम्मेदारों ने मुंह मोड़ लिया। इससे साफ है कि इंट्री और ओवरलोड वाहनों के संचालन के बीच कुछ न कुछ गड़बड़ी जरूर है। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि मामले में परिवहन विभाग की भूमिका साफ सुथरी नहीं है।
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जिले में चल रहे ओवरलोड वाहनों के स्वामियों ने महीने भर की इंट्री ले रखी है। हालांकि महीना खत्म होने में कुछ दिन ही शेष रह गए हैं। ऐसे में ओवर लोड वाहनों को बीच में कैसे छेड़ा जाए, इसे लेकर मंथन शुरू है। सूत्रों की माने तो इंट्री ले चुके वाहनों को यदि बीच में छेड़ा गया तो वह अपने-अपने वाहन सड़कों पर खड़ा कर बखेड़ा कर सकते हैं। इससे बैक डोर से चल रहे इंट्री के कारोबार की पुष्टि भी हो जाएगी। इससे बचने के लिए परिवहन विभाग के जिम्मेदारों को महीना पूरा होने का इंतजार है।
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जिले में ओवर लोड वाहनों का धड़ल्ले से संचालन होने के कारण सड़कों की सेहत लगातार बिगड़ती जा रही है। जो सड़के बालू घाट से संपर्क रखती हैं उनके बनने के बाद गड्ढे में तब्दील होने में देर नहीं लगती। ओवरलोड के कारण यह सड़कें पहले दरकती हैं और बाद में गिट्टियां उखड़कर गायब हो जाती है। बानगी के तौर पर डेढ़ावल, पभोषा, महिला, ब्यूर, कटैया, तिल्हापुर को जाने वाले सड़कों को लिया जा सकता है। ओवरलोड वाहनों के चलते इन सड़कों की गिट्टियां गायब होती जा रही हैं लेकिन अफसरों को इसकी तनिक भी परवाह नहीं है।
डीएम ने रिपोट मांगी है। सोमवार तक रिपोर्ट भेज दी जाएगी। जो वाहन ओवर लोड चल रहे हैं वह कैसे चल रहे हैं इसकी जानकारी सबको है। मैं तो क्या कोई भी इन्हें रोकने की हिम्मत नहीं कर सकता।
पीके सिंह, एआरटीओ प्रवर्तन
अवैध बालू खनन मामले में मातहत एसपी को गुमराह कर रहे हैं। शनिवार दोपहर को आदेश के बाद मातहतों ने दिन में होने वाले खनन को रुकवा दिया लेकिन शाम होते ही इस कारोबार में तेजी आ गई। इसका प्रमाण जिला पंचायत के बैरियर से कटने वाली पर्चियां और सड़कों पर फर्राटा भरते बालू लदे वाहन देने को पर्याप्त हैं।
पुलिस अधीक्षक वीके मिश्र यमुना घाटों पर कराए जा रहे अवैध बालू खनन को लेकर संजीदा हो गए हैं। उन्होंने शनिवार की दोपहर संबंधित पांच थानेदारों को घंटे भर के भीतर बालू खनन रुकवाने का फरमान जारी किया। आका का फरमान मिला तो मातहत खनन करने वालों को सूचित कर यमुना घाटों के लिए निकल पड़े।
जब तक थानाध्यक्ष की टीम यमुना बालू घाटों पर पहुंची तब तक अवैध खनन में लगी जेसीबी, पोकलैंड और परिवहन के लिए खड़ी ट्रकें गायब हो गईं। यदि दो घाट पर जेसीबी, पोकलैंड मिली भी तो संबंधित थानेदार ने कारोबारी पर रहम खाया और दिन में घाट पर मशीन चलाने से साफ मना कर दिया। शाम तक मातहतों ने एसपी को रिपोर्ट भेज दिया कि उनके सर्किल में कहीं भी अवैध खनन नहीं हो रहा है लेकिन जैसे ही शाम हुई घाटों पर मशीनें कूद पड़ीं। रात भर कराए गए अवैध खनन का बालू लादकर ट्रकें रविवार की सुबह से शाम तक सड़कों पर फर्राटा भरती नजर आईं। ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि जब एसपी ने खनन बंद करा दिया तो ट्रकों को बालू कहां से मिल रही है। क्या ट्रक चालक घाटों से स्वयं बालू लादकर ला रहे हैं।
जिले में बालू का अवैध खनन पूरी तरह से ठप करा दिया गया है। ऐसी रिपोर्ट संबंधित थानेदारों ने पुलिस अधीक्षक वीरेंद्र कुमार मिश्र को शनिवार की शाम भेजी है। एसपी ने मातहतों की बात पर मान लिया कि उनकी टीम ने आदेश का पालन कराया लेकिन रविवार की सुबह से सड़कों पर बालू का परिवहन कर रही ट्रकें सवाल खड़ा करने लगी कि इन्हें बालू कहां से मिल रहा है। इतना ही नहीं जिले भर में बने जिला पंचायत के नौ बैरियरों पर किस चीज के परिवहन की पर्चियां काटी जा रही है। इसे सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि बालू खनन बंद है या फिर बेखौफ होकर कराया जा रहा है।