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Kaushambi News: एक मीटर चौड़ी गली...कैसे हो मरीजों का आना-जाना

Wed, 10 Jul 2024 03:43 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी Updated Wed, 10 Jul 2024 03:43 AM IST
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One meter wide lane...how should patients move in and out?
ब्लॉक क्षेत्र के अमनीलोकीपुर में करीब 25 साल पहले पीएचसी की नींव पड़ी थी। पुराना भवन जर्जर होने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने नए का निर्माण तो करा दिया, लेकिन पीएचसी को आवागमन के लिए रास्ता नहीं दिला सका। पहले जो मुख्य मार्ग था, उसे रेलवे ने बंद कर दिया। अब सिर्फ एक गली बची है, वह भी एक मीटर चौड़ी। अब ऐसे में मरीज कैसे आते-जाते होंगे, इसका अंदाजा स्वयं ही लगाया जा सकता है।
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गांव की मुख्य सड़क से पीएचसी तक पहुंचने के लिए करीब एक मीटर चौड़ी गली है, जिससे चार पहिया वाहन और एंबुलेंस का पीएचसी तक पहुंचना नामुमकिन है। बाइक से आने वाले मरीजों को भी निकलने में काफी परेशानी होती है। गांव की साधन सहकारी समिति के पूर्व अध्यक्ष भानू प्रताप सिंह बताते हैं कि पहले रेलवे लाइन के किनारे से होते हुए पीएचसी तक डामर रोड बनी थी। यह भूमि रेलवे की थी, जिस पर करीब डेढ़ साल पहले रेलवे ने बाउंड्री बनाकर बंद करा दिया। अब सिर्फ गली ही बची है। वह भी कच्ची है। बारिश में बाइक सवारों का चलना भी मुश्किल हो जाता है। पीएचसी के पास ही प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्कूल व बिजली उपकेंद्र भी है। यही समस्या इनके साथ भी है।
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रोज मुश्किलों से जूझते हैं 25 से 30 मरीज
पीएचसी में डॉ. आशीष कुमार, फार्मासिस्ट संजय कुमार, आयुष के फार्मासिस्ट भीम सिंह और एएनएम रागिनी की तैनाती है। इस पीएचसी में रोजाना 25 से 30 मरीज आते हैं। गर्भवती महिलाएं भी प्रसव पूर्व की अपनी जांचें कराने आती हैं। रास्ते के अभाव के चलते इन्हें परेशानी से जूझना पड़ता है।
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गंभीर मरीजों को भी बाइक से ले जाना मजबूरी
अमनीलोकीपुर के विनोद कुमार ने बताया कि जब कोई गंभीर मरीज आता है तो उसे बाइक या साइकिल पर ही बैठाकर ले जाना पड़ता है। भले ही उसकी हालत कितनी भी बिगड़ी हुई हो। अंदर तक चार पहिया वाहन पहुंच ही नहीं पाते। राम सिंह ने बताया कि जिस गली से आते-जाते हैं, वह भी लोगों ने अपनी भूमिधरी जमीन से छोड़ी है। बारिश में यह गली भी कीचड़ से सन जाती है। इसकी वजह से बाइकों से भी पीएचसी तक पहुंचना दूभर हो जाता है।

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पीएचसी अमनीलोकीपुर के लिए रास्ता न होने की जानकारी में नहीं है। इसकी जांच कराई जाएगी। अगर, ऐसा है तो संबंधित विभाग से बात करके समस्या को दूर कराया जाएगा।

डॉ. सुष्पेंद्र कुमार, सीएमओ
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