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निजीकरण के खिलाफ बहुजन मुक्ति ने भरी हुंकार
ब्यूरो/अमर उजाला कौशाम्बी
Updated Mon, 23 Mar 2015 12:24 AM IST
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मंझनपुर। निजीकरण को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ रविवार को बहुजन मुक्ति पार्टी के कार्यकर्ताओं ने जिला मुख्यालय में प्रदर्शन किया। धरनास्थल पर आयोजित सभा में वक्ताओं ने सरकार पर गरीब, जरूरतमंदों की अनदेखी का आरोप लगाया। ऐलान किया कि यदि सरकार जरूरतमंदों की अनदेखी करती रहेगी, जो पार्टी कार्यकर्ता पूरे देश में जनांदोलन को मजबूर होंगे। जेलभरो आंदोलन भी किया जाएगा।
बहुजन मुक्ति पार्टी ने केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ रविवार को मंझनपुर के डायट मैदान में धरना-प्रदर्शन किया। इस दौरान वक्ताओं ने केंद्र सरकार पर गरीबों के बजाय पूंजीपतियों की मदद का आरोप लगाया। जिलाध्यक्ष रामनरेश मौर्य ने कहा कि गरीबी उन्मूलन के लिए केंद्र सरकार कोई प्रयास नहीं कर रही है। सिर्फ पूंजीपतियों की ओर सरकार ध्यान दे रही है। बजट में इसकी बानगी दिख चुकी है। कहा कि पिछड़ी जाति और गरीबों की इस तरह से की जा रही अनदेखी को पार्टी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगी।
अन्य वक्ताओं ने भी सरकार की खिंचाई की। बेमौसम हुई बारिश से बर्बाद किसानों को जल्द उचित मुआवजा दिए जाने की मांग भी दोहराई गई। वहीं पार्टी नेताओं ने केंद्र सरकार से ओबीसी की जाति आधारित जनगणना कराने, किसान विरोधी भूमि अधिग्रहण बिल में संशोधन करने, गरीबी उन्मूलन के लिए ठोस प्रयास किए जाने, निजीकरण को बंद करने, भूमिहीन और जमीन और बेघरों को घर मुहैया कराने, रसोइया, आशाओं, आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों, पंचायत मित्रों समेत सभी संविदा कर्मचारियों को नियमित करने की मांग की गई।
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बहुजन मुक्ति पार्टी ने केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ रविवार को मंझनपुर के डायट मैदान में धरना-प्रदर्शन किया। इस दौरान वक्ताओं ने केंद्र सरकार पर गरीबों के बजाय पूंजीपतियों की मदद का आरोप लगाया। जिलाध्यक्ष रामनरेश मौर्य ने कहा कि गरीबी उन्मूलन के लिए केंद्र सरकार कोई प्रयास नहीं कर रही है। सिर्फ पूंजीपतियों की ओर सरकार ध्यान दे रही है। बजट में इसकी बानगी दिख चुकी है। कहा कि पिछड़ी जाति और गरीबों की इस तरह से की जा रही अनदेखी को पार्टी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगी।
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अन्य वक्ताओं ने भी सरकार की खिंचाई की। बेमौसम हुई बारिश से बर्बाद किसानों को जल्द उचित मुआवजा दिए जाने की मांग भी दोहराई गई। वहीं पार्टी नेताओं ने केंद्र सरकार से ओबीसी की जाति आधारित जनगणना कराने, किसान विरोधी भूमि अधिग्रहण बिल में संशोधन करने, गरीबी उन्मूलन के लिए ठोस प्रयास किए जाने, निजीकरण को बंद करने, भूमिहीन और जमीन और बेघरों को घर मुहैया कराने, रसोइया, आशाओं, आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों, पंचायत मित्रों समेत सभी संविदा कर्मचारियों को नियमित करने की मांग की गई।
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