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मां के कालरात्रि स्वरूप के दर्शन को उमड़े भक्त
kaushambi
Updated Wed, 17 Oct 2018 01:24 AM IST
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नव दुऱ्र्गा
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरा
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मंझनपुर। शारदीय नवरात्र के सातवें दिन भक्तों ने मां के कालरात्रि स्वरूप का दर्शन-पूजन किया। शीतलाधाम कड़ा में मां के इस स्वरूप की अराधना को भारी भीड़ उमड़ी। गांवों में काली मां के स्थान पर पूजन-अर्चन करने वालों का तांता लगा रहा। इसी तरह पूजा पंडालों में भी मां के कालरात्रि स्वरूप का विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया गया।
नवरात्र पर्व का सातवां दिन मां कालरात्रि का है। मान्यता ाता है कि रक्तबीज नाम के राक्षस का उत्पात मिटाने के लिए मां दुर्गा ने युद्ध किया। कई बार उसका सिर काटकर धड़ से अलग किया। पर, जितनी बूंद उसके रक्त की धरती पर गिरती उतने राक्षस तैयार हो जाते। इससे निपटने के लिए मां को कालरात्रि स्वरूप धारण करना पड़ा। एक हाथ में खड्ग तो दूसरे हाथ में खप्पर लेकर मां ने रक्तबीज से युद्ध किया और एक बूंद भी खून जमीं पर नहीं गिरने दिया। यहां तक कि क्रोध से तमतमा रही मां काली को मनाने के लिए भगवान शिव को उनके रास्ते में लेटकर उन्हें शांत करना पड़ा।
मां के इसी स्वरूप का भक्तों ने विधिविधान से मंदिरों, पूजा पंडालों व गांवों में बने मां काली के स्थान पर पूजन-अर्चन किया। शीतलाधाम कड़ा में सप्तमी के दिन हजारों की संख्या में पहुंचे भक्तों ने माथा टेकते हुए मां से मन्नते मांगी। उधर गांवों व कस्बों में सजाए गए 810 पूजा पंडालों सुबह से लेकर दोपहर तक भक्तों ने हवन-पूजन किया तो शाम से देर रात तक भक्तिगीतों की बयार चली।
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जागरण कार्यक्रम में कलाकारों ने बांधी समा
म्योहर। स्थानीय गांव इन दिनों मां दुर्गा की भक्ती में डूबा हुआ है। गांव स्थित बाजार मोहल्ले में सजे पूजा पंडाल में सोमवार की रात जागरण कार्यक्रम कमेटी द्वारा कराया गया। रात्रि नौ बजे शुरू हुए भक्ति कार्यक्रम में इलाहाबाद से आए गायकों ने देवी गीतों से समां बांध दी। मोहनी सूरत पे तेरे, दिल दीवाना हो गया गीत पर मां के भक्त झूमने को विवश हो गए। कार्यक्रम में महेंद्र तिवारी, गुड्डू, संतोष कुमार उर्फ गंगा मास्टर, विनोद मिश्र, पवन दुबे, श्रवण कुमार, संतोष कुमार गर्ग समेत तमाम श्रोता मौजूद रहे। इसी तरह ब्राम्हण मोहल्ले में पूजा पंडाल पर हो रहे रामलीला मंचन में सीताहरण, सीता की खोज लीला का मंचन किया गया। इसे देखने के लिए मंचन स्थल दर्शकों से खचाखच भरा रहा।
पूजा पंडाल में देवीगीत पर बच्चों ने प्रस्तुत किया नृत्य
फोटो.....
मंझनपुर कस्बे के नेहरू नगर मोहल्ले में बनाए गए पूजा पंडाल में नन्हें-मुन्ने बच्चों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यहां पर देवी गीतों पर कस्बे की वैष्णवी सिंह, साहिल सिंह, पियूष केसरवानी, श्री केसरवानी, रिया, गुनगुन का नृत्य देख दर्शक मंत्रमुग्ध रहे। बच्चों के इस कार्यक्रम को देखने के लिए पूजा पंडाल में दर्शकों की खासी भीड़ लगी रही।
झारखंडी देवी मंदिर में कराया गया कन्या भोज
पश्चिम शरीरा। शारदीय नवरात्र पर्व के सातवें दिन पश्चिम शरीरा स्थित झारखंडी देवी मंदिर में कन्या भोज का आयोजन किया गया। इस मौके पर पूरब शरीरा, पश्चिम शरीरा, पुनवार से हजारों की संख्या में आई कन्याओं को प्रसाद खिलाया गया। इसके बाद समिति के लोगों ने कन्याओं को तिलक लगाकर पुण्यार्जन किया। मंदिर परिसर में कन्याओं के आने का सिलसिला दोपहर से लेकर देर शाम तक जारी रहा। भोजन में मां झारखंडी विकास समिति के हीरेंद्र सिंह, कक्कू पांडेय, राजू पांडेय, हर्षित सिंह, अवनीश द्विवेदी आदि का सहयोग सराहनीय रहा। इसी तरह पश्चिम शरीरा के बस स्टाप पर बनाए गए पूजा पंडाल में समिति के सदस्यों ने कन्या भोज का आयोजन किया। यहां पर कन्याओं को खीर, पूड़ी, हलुआ का प्रसाद खिलाकर भक्तों ने पुर्ण्याजन किया। कन्याओं को भोजन कराने में नव युवक दुर्गा पूजा संघ के अवधेश सिंह गौर, योगेश केसरवानी, गुड्डू मोदनवाल, गोपेंद्र सिंह, दीपेंद्र सिंह, आशीष, सुरेश चंद्र, राम जी मिश्र आदि लोगों का विशेष योगदान रहा।
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नवरात्र पर्व का सातवां दिन मां कालरात्रि का है। मान्यता ाता है कि रक्तबीज नाम के राक्षस का उत्पात मिटाने के लिए मां दुर्गा ने युद्ध किया। कई बार उसका सिर काटकर धड़ से अलग किया। पर, जितनी बूंद उसके रक्त की धरती पर गिरती उतने राक्षस तैयार हो जाते। इससे निपटने के लिए मां को कालरात्रि स्वरूप धारण करना पड़ा। एक हाथ में खड्ग तो दूसरे हाथ में खप्पर लेकर मां ने रक्तबीज से युद्ध किया और एक बूंद भी खून जमीं पर नहीं गिरने दिया। यहां तक कि क्रोध से तमतमा रही मां काली को मनाने के लिए भगवान शिव को उनके रास्ते में लेटकर उन्हें शांत करना पड़ा।
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मां के इसी स्वरूप का भक्तों ने विधिविधान से मंदिरों, पूजा पंडालों व गांवों में बने मां काली के स्थान पर पूजन-अर्चन किया। शीतलाधाम कड़ा में सप्तमी के दिन हजारों की संख्या में पहुंचे भक्तों ने माथा टेकते हुए मां से मन्नते मांगी। उधर गांवों व कस्बों में सजाए गए 810 पूजा पंडालों सुबह से लेकर दोपहर तक भक्तों ने हवन-पूजन किया तो शाम से देर रात तक भक्तिगीतों की बयार चली।
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जागरण कार्यक्रम में कलाकारों ने बांधी समा
म्योहर। स्थानीय गांव इन दिनों मां दुर्गा की भक्ती में डूबा हुआ है। गांव स्थित बाजार मोहल्ले में सजे पूजा पंडाल में सोमवार की रात जागरण कार्यक्रम कमेटी द्वारा कराया गया। रात्रि नौ बजे शुरू हुए भक्ति कार्यक्रम में इलाहाबाद से आए गायकों ने देवी गीतों से समां बांध दी। मोहनी सूरत पे तेरे, दिल दीवाना हो गया गीत पर मां के भक्त झूमने को विवश हो गए। कार्यक्रम में महेंद्र तिवारी, गुड्डू, संतोष कुमार उर्फ गंगा मास्टर, विनोद मिश्र, पवन दुबे, श्रवण कुमार, संतोष कुमार गर्ग समेत तमाम श्रोता मौजूद रहे। इसी तरह ब्राम्हण मोहल्ले में पूजा पंडाल पर हो रहे रामलीला मंचन में सीताहरण, सीता की खोज लीला का मंचन किया गया। इसे देखने के लिए मंचन स्थल दर्शकों से खचाखच भरा रहा।
पूजा पंडाल में देवीगीत पर बच्चों ने प्रस्तुत किया नृत्य
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मंझनपुर कस्बे के नेहरू नगर मोहल्ले में बनाए गए पूजा पंडाल में नन्हें-मुन्ने बच्चों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यहां पर देवी गीतों पर कस्बे की वैष्णवी सिंह, साहिल सिंह, पियूष केसरवानी, श्री केसरवानी, रिया, गुनगुन का नृत्य देख दर्शक मंत्रमुग्ध रहे। बच्चों के इस कार्यक्रम को देखने के लिए पूजा पंडाल में दर्शकों की खासी भीड़ लगी रही।
झारखंडी देवी मंदिर में कराया गया कन्या भोज
पश्चिम शरीरा। शारदीय नवरात्र पर्व के सातवें दिन पश्चिम शरीरा स्थित झारखंडी देवी मंदिर में कन्या भोज का आयोजन किया गया। इस मौके पर पूरब शरीरा, पश्चिम शरीरा, पुनवार से हजारों की संख्या में आई कन्याओं को प्रसाद खिलाया गया। इसके बाद समिति के लोगों ने कन्याओं को तिलक लगाकर पुण्यार्जन किया। मंदिर परिसर में कन्याओं के आने का सिलसिला दोपहर से लेकर देर शाम तक जारी रहा। भोजन में मां झारखंडी विकास समिति के हीरेंद्र सिंह, कक्कू पांडेय, राजू पांडेय, हर्षित सिंह, अवनीश द्विवेदी आदि का सहयोग सराहनीय रहा। इसी तरह पश्चिम शरीरा के बस स्टाप पर बनाए गए पूजा पंडाल में समिति के सदस्यों ने कन्या भोज का आयोजन किया। यहां पर कन्याओं को खीर, पूड़ी, हलुआ का प्रसाद खिलाकर भक्तों ने पुर्ण्याजन किया। कन्याओं को भोजन कराने में नव युवक दुर्गा पूजा संघ के अवधेश सिंह गौर, योगेश केसरवानी, गुड्डू मोदनवाल, गोपेंद्र सिंह, दीपेंद्र सिंह, आशीष, सुरेश चंद्र, राम जी मिश्र आदि लोगों का विशेष योगदान रहा।
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