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नगर पालिका का दर्जा मिलने से भरवारी में जश्न
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
Updated Wed, 30 Aug 2017 01:40 AM IST
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कौशाम्बी
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नगर पालिका बनाने की कैबिनेट से मंजूरी मिलने की जानकारी मिलते ही भरवारी के लोग खुशी से झूम उठे। कस्बे के लोगों ने एक दूसरे को बधाई दी। नागरिक इसका पूरा श्रेय चायल विधायक संजय गुप्ता को दे रहे हैं। वह लंबे समय से इसके लिए प्रयासरत थे। नगरपालिका में भरवारी क्षेत्र के 29 गांव और जोड़े जाएंगे। जश्न मनाने का सिलसिला देर रात तक चलता रहा।
जिले में सात नगर पंचायतें ही थीं। अब तक किसी भी नगर पंचायत को नगर पालिका दर्जा नहीं मिला था। सपा सरकार में अक्तूबर माह में भरवारी और मंझनपुर नगर पंचायतों को नगर पालिका बनाने का प्रस्ताव भेजा गया था। मंझनपुर का विस्तार करते हुए 24 गांव जबकि भरवारी नगर पंचायत का सीमा विस्तार करते हुए 27 गांव जोडे़ गए थे। किसी एक नगर पंचायत को पालिका का दर्जा मिलना था। अधिकारियों ने जोडे़ गए गांवों के प्रधानों से आपत्तियां ली थीं।
आपत्तियों का निस्तारण भी हो गया था। प्रधानों के आरोपों को मनगढ़ंत व निराधार बताया गया था। इसके बाद यह कार्रवाई ठंडे बस्ते में चली गई थी। हालांकि भरवारी नगर पंचायत को पालिका बनाने के लिए चायल विधायक संजय गुप्ता पूरी ताकत से जुटे थे। इसका परिणाम रहा कि मंगलवार को कैबिनेट ने भरवारी नगर पंचायत को नगर पालिका बनाने की हरी झंडी दे दी। डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य भी भरवारी को ही पालिका बनाने के पक्ष में थे क्योंकि चायल विधायक के साथ उन्होंने भी इसको नगर पालिका बनवाने का वादा किया था। अपने-अपने वादे पर दोनों नेता खरे उतरे। इस बड़ी उपलब्धि पर भरवारी के लोग जश्न मना रहे हैं। लोगों का कहना है कि पालिका बनने से क्षेत्र का विकास और तेजी से होगा। सुविधाएं भी बढ़ेंगी।
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नगर पालिका क्षेत्र में शामिल गांवों का होगा कायाकल्प
भरवारी नगर पालिका में शामिल होने वाले सभी गांवों का अब कायाकल्प होगा। गिरिसा, बिसारा, दशरथपुर, बालकमऊ, परसरा, असवां, चकचमरूपुर, चमंधा, नौढ़ियां, गौरा आदि गांवों का विकास कार्य एक रणनीति के तहत होगा। इसके लिए शासन से मोटी रकम भी मिलेगी। भरवारी कस्बे के साथ ही सीमा विस्तार में शामिल हुए गांवों के लोग भी गदगद हैं। उनका कहना है कि अब पिछड़ापन दूर होगा। मूलभूत समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ेगा। हर वह सुविधा अब उन्हें आसानी से उपलब्ध होगी, जिसकी अब तक दरकार थी।
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जिले में सात नगर पंचायतें ही थीं। अब तक किसी भी नगर पंचायत को नगर पालिका दर्जा नहीं मिला था। सपा सरकार में अक्तूबर माह में भरवारी और मंझनपुर नगर पंचायतों को नगर पालिका बनाने का प्रस्ताव भेजा गया था। मंझनपुर का विस्तार करते हुए 24 गांव जबकि भरवारी नगर पंचायत का सीमा विस्तार करते हुए 27 गांव जोडे़ गए थे। किसी एक नगर पंचायत को पालिका का दर्जा मिलना था। अधिकारियों ने जोडे़ गए गांवों के प्रधानों से आपत्तियां ली थीं।
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आपत्तियों का निस्तारण भी हो गया था। प्रधानों के आरोपों को मनगढ़ंत व निराधार बताया गया था। इसके बाद यह कार्रवाई ठंडे बस्ते में चली गई थी। हालांकि भरवारी नगर पंचायत को पालिका बनाने के लिए चायल विधायक संजय गुप्ता पूरी ताकत से जुटे थे। इसका परिणाम रहा कि मंगलवार को कैबिनेट ने भरवारी नगर पंचायत को नगर पालिका बनाने की हरी झंडी दे दी। डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य भी भरवारी को ही पालिका बनाने के पक्ष में थे क्योंकि चायल विधायक के साथ उन्होंने भी इसको नगर पालिका बनवाने का वादा किया था। अपने-अपने वादे पर दोनों नेता खरे उतरे। इस बड़ी उपलब्धि पर भरवारी के लोग जश्न मना रहे हैं। लोगों का कहना है कि पालिका बनने से क्षेत्र का विकास और तेजी से होगा। सुविधाएं भी बढ़ेंगी।
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नगर पालिका क्षेत्र में शामिल गांवों का होगा कायाकल्प
भरवारी नगर पालिका में शामिल होने वाले सभी गांवों का अब कायाकल्प होगा। गिरिसा, बिसारा, दशरथपुर, बालकमऊ, परसरा, असवां, चकचमरूपुर, चमंधा, नौढ़ियां, गौरा आदि गांवों का विकास कार्य एक रणनीति के तहत होगा। इसके लिए शासन से मोटी रकम भी मिलेगी। भरवारी कस्बे के साथ ही सीमा विस्तार में शामिल हुए गांवों के लोग भी गदगद हैं। उनका कहना है कि अब पिछड़ापन दूर होगा। मूलभूत समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ेगा। हर वह सुविधा अब उन्हें आसानी से उपलब्ध होगी, जिसकी अब तक दरकार थी।