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जिले के बाद अब मिलेगी शहर की शक्ल
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
Updated Fri, 04 Nov 2016 12:28 AM IST
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जिला बनने के 19 साल बाद अब मुख्यालय व भरवारी नगर पंचायत को शहर की शक्ल देने की कवायद तेज हो गई। यदि प्रस्ताव को हरी झंडी मिली तो मुख्यालय के साथ ही भरवारी नगर पंचायत व उसकी सीमा में आने वाले गांवों की सूरत बदल जाएगी। जिन जरूरतों के लिए लोग परेशान हैं, वह अपने आप ही साकार रूप लेने लगेंगी। बिजली, पानी, पेयजल के साथ ही जल निकासी का रोना ग्रामीणों को नहीं रोना पड़ेगा।
मंझनपुर व भरवारी नगर पंचायत को राज्य सरकार ने नगर पालिका बनाने का प्रस्ताव जिला प्रशासन को भेजकर आपत्ति के साथ ही सुझाव मांगे हैं। प्रस्ताव मिलते ही एडीएम ने मामले में कार्रवाई शुरू कर दी है। मंझनपुर का सीमा विस्तार कर 24 गांव जोड़े गए हैं, जबकि भरवारी का सीमा विस्तार करते हुए 27 गांव जोड़े गए हैं। जोड़े गए गांवों की हालत बद से बदतर है। एकाध गांवों को छोड़ दें तो अभी भी वहां मूलभूत सुविधाएं नहीं है।
पेयजल, सड़क, बिजली की व्यवस्था के लिए इन गांवों से आवाजें उठती ही रहीं हैं। ग्राम पंचायतों को जितना बजट मिलता है, वह विकास के लिए नाकाफी होता है। इनमें तमाम ऐसे मद होते हैं, जिनसे बिजली, पानी व सड़क की व्यवस्था पर रुपया नहीं खर्च किया जा सकता है। अब इस समस्या से लोगाें को निजात मिल सकती है। नगर पालिका परिषद यदि दोनों पंचायतें बनती हैं तो इन गांवों की तेजी से तरक्की होगी।
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मंझनपुर का है पलड़ा भारी
नगर पालिका का दर्जा भरवारी के साथ मंझनपुर को भी मिलेगा अथवा किसी में से एक को। इसको लेकर फिलहाल अभी असमंजस की स्थिति बनी है। जानकारों का कहना है कि यदि किसी एक नगर पंचायत को पालिका बनाने पर सहमति बनती है तो उस स्थिति में मंझनपुर का पलड़ा भारी रहेगा।
इसकी बड़ी वजह यह बताई जा रही है कि मंझनपुर का सीमा विस्तार कर जिन गांवों का जोड़ा गया है, वह सभी रिंग रोड से जुड़े हुए हैं। इसके अलावा नहर होने की वजह से जल निकासी का पर्याप्त प्रबंध हैं, क्योंकि यह नहर ससुरखदेरी से जुड़ी हुई है। वहीं भरवारी को इसलिए नहीं खारिज किया जाएगा कि क्योंकि यहां रेलवे स्टेशन है। इसके अलावा हाईवे से यह जुड़ा हुआ है, साथ ही यहां का कारोबार मंझनपुर की तुलना में तीन से चार गुना ज्यादा है।
आपत्ति के लिए नहीं तय हुई तिथि
नगर पालिका परिषद के गठन की कवायद तो शुरू हो गई है, लेकिन आपत्ति व सुझाव के लिए अफसरों ने तिथि तय नहीं की है। 12 नवंबर तक राज्य सरकार ने आपत्ति मांगी थी, लेकिन एडीएम ने अभी सार्वजनिक तौर पर सीमा विस्तार कर नगर पंचायतों से जोड़े गए गांवों के लोगों से आपत्ति नहीं मांगी है। पटल देख रहे लिपिक चंद्रपाल का कहना है कि जल्द ही आपत्ति मांगने के लिए सूचना प्रकाशित कराई जाएगी।
नगर पालिका के अनिवार्य कार्य
शुद्ध और पौष्टिक पानी की आपूर्ति।
निर्माण और सार्वजनिक सड़कों का रखरखाव।
हर वार्ड में प्रकाश की व्यवस्था।
सार्वजनिक स्थान, सड़क और नाली की नियमित सफाई।
प्राथमिक स्कूलों एवं अस्पतालों की स्थापना एवं रखरखाव।
सार्वजनिक गलियों, पुलों एवं अन्य स्थानों पर आने वाले अवरोधों को दूर करना।
सड़कों का नामकरण एवं मकानों का क्रमांकन।
सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट की व्यवस्था एवं पार्किंग की व्यवस्था।
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मंझनपुर व भरवारी नगर पंचायत को राज्य सरकार ने नगर पालिका बनाने का प्रस्ताव जिला प्रशासन को भेजकर आपत्ति के साथ ही सुझाव मांगे हैं। प्रस्ताव मिलते ही एडीएम ने मामले में कार्रवाई शुरू कर दी है। मंझनपुर का सीमा विस्तार कर 24 गांव जोड़े गए हैं, जबकि भरवारी का सीमा विस्तार करते हुए 27 गांव जोड़े गए हैं। जोड़े गए गांवों की हालत बद से बदतर है। एकाध गांवों को छोड़ दें तो अभी भी वहां मूलभूत सुविधाएं नहीं है।
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पेयजल, सड़क, बिजली की व्यवस्था के लिए इन गांवों से आवाजें उठती ही रहीं हैं। ग्राम पंचायतों को जितना बजट मिलता है, वह विकास के लिए नाकाफी होता है। इनमें तमाम ऐसे मद होते हैं, जिनसे बिजली, पानी व सड़क की व्यवस्था पर रुपया नहीं खर्च किया जा सकता है। अब इस समस्या से लोगाें को निजात मिल सकती है। नगर पालिका परिषद यदि दोनों पंचायतें बनती हैं तो इन गांवों की तेजी से तरक्की होगी।
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मंझनपुर का है पलड़ा भारी
नगर पालिका का दर्जा भरवारी के साथ मंझनपुर को भी मिलेगा अथवा किसी में से एक को। इसको लेकर फिलहाल अभी असमंजस की स्थिति बनी है। जानकारों का कहना है कि यदि किसी एक नगर पंचायत को पालिका बनाने पर सहमति बनती है तो उस स्थिति में मंझनपुर का पलड़ा भारी रहेगा।
इसकी बड़ी वजह यह बताई जा रही है कि मंझनपुर का सीमा विस्तार कर जिन गांवों का जोड़ा गया है, वह सभी रिंग रोड से जुड़े हुए हैं। इसके अलावा नहर होने की वजह से जल निकासी का पर्याप्त प्रबंध हैं, क्योंकि यह नहर ससुरखदेरी से जुड़ी हुई है। वहीं भरवारी को इसलिए नहीं खारिज किया जाएगा कि क्योंकि यहां रेलवे स्टेशन है। इसके अलावा हाईवे से यह जुड़ा हुआ है, साथ ही यहां का कारोबार मंझनपुर की तुलना में तीन से चार गुना ज्यादा है।
आपत्ति के लिए नहीं तय हुई तिथि
नगर पालिका परिषद के गठन की कवायद तो शुरू हो गई है, लेकिन आपत्ति व सुझाव के लिए अफसरों ने तिथि तय नहीं की है। 12 नवंबर तक राज्य सरकार ने आपत्ति मांगी थी, लेकिन एडीएम ने अभी सार्वजनिक तौर पर सीमा विस्तार कर नगर पंचायतों से जोड़े गए गांवों के लोगों से आपत्ति नहीं मांगी है। पटल देख रहे लिपिक चंद्रपाल का कहना है कि जल्द ही आपत्ति मांगने के लिए सूचना प्रकाशित कराई जाएगी।
नगर पालिका के अनिवार्य कार्य
शुद्ध और पौष्टिक पानी की आपूर्ति।
निर्माण और सार्वजनिक सड़कों का रखरखाव।
हर वार्ड में प्रकाश की व्यवस्था।
सार्वजनिक स्थान, सड़क और नाली की नियमित सफाई।
प्राथमिक स्कूलों एवं अस्पतालों की स्थापना एवं रखरखाव।
सार्वजनिक गलियों, पुलों एवं अन्य स्थानों पर आने वाले अवरोधों को दूर करना।
सड़कों का नामकरण एवं मकानों का क्रमांकन।
सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट की व्यवस्था एवं पार्किंग की व्यवस्था।