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कलाकारों की अदाकारी देख भावविभोर हुए दर्शक
अमर उजाला ब्यूरो, कौशाम्बी
Updated Sat, 17 Oct 2015 01:09 AM IST
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मंझनपुर (ब्यूरो)। जिला मुख्यालय मंझनपुर में चल रही रामलीला में बृहस्पतिवार की रात धनुष यज्ञ का मंचन किया गया। इस दौरान प्रभु श्रीराम के धनुष तोड़ते ही पूरा पंडाल जयकारों से गूंज उठा। मंचन देखने के लिए रातभर रामलीला प्रांगण में दर्शकों की भारी भीड़ जमा रही।
मंझनपुर कस्बे में दशहरे के मौके पर रामलीला का आयोजन किया गया है। 12 दिनों तक चलने वाली भगवान की इस लीला का बृहस्पतिवार की रात छठवां दिन था। जहां धनुष यज्ञ का मंचन कलाकारों ने किया। मानस में वर्णित प्रसंग के मुताबिक राजा जनक अपनी बेटी सीता के लिए स्वयंवर का आयोजन करते हैं। इसमें शर्त रखी जाती है कि जो भी भगवान शिव का धनुष तोड़ेगा। उसी से सीता का विवाह होगा। स्वयंवर में जुटे विभिन्न देशों के राजा धनुष तोड़ने का प्रयत्न करते हैं। पर, धनुष तोड़ना तो दूर वे उसे हिला तक नहीं पाते।
इससे क्षुब्ध राजा जनक दुखी हो जाते हैं। वे इस धरा को वीर विहीन बताते हुए सभी राजाओं से स्वयंवर छोड़कर चले जाने को कहते हैं। यह बात लक्ष्मण को नागवार गुजरती है। वे क्रोधित हो उठते हैं। तभी मुनि विश्वामित्र प्रभु श्रीराम को धनुष तोड़ने का संकेत करते हैं। मुनि का आशीष लेकर श्रीराम स्वयंवर में पहुंचते हैं। उनके छृूते ही शिव का धनुष टूट जाता है। धनुष यज्ञ का यह मनोहारी मंचन देखने को रातभर दर्शकों की भारी भीड़ जमा रही। इनमें महिलाओं और बच्चों की तादात ज्यादा थी।
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मंझनपुर कस्बे में दशहरे के मौके पर रामलीला का आयोजन किया गया है। 12 दिनों तक चलने वाली भगवान की इस लीला का बृहस्पतिवार की रात छठवां दिन था। जहां धनुष यज्ञ का मंचन कलाकारों ने किया। मानस में वर्णित प्रसंग के मुताबिक राजा जनक अपनी बेटी सीता के लिए स्वयंवर का आयोजन करते हैं। इसमें शर्त रखी जाती है कि जो भी भगवान शिव का धनुष तोड़ेगा। उसी से सीता का विवाह होगा। स्वयंवर में जुटे विभिन्न देशों के राजा धनुष तोड़ने का प्रयत्न करते हैं। पर, धनुष तोड़ना तो दूर वे उसे हिला तक नहीं पाते।
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इससे क्षुब्ध राजा जनक दुखी हो जाते हैं। वे इस धरा को वीर विहीन बताते हुए सभी राजाओं से स्वयंवर छोड़कर चले जाने को कहते हैं। यह बात लक्ष्मण को नागवार गुजरती है। वे क्रोधित हो उठते हैं। तभी मुनि विश्वामित्र प्रभु श्रीराम को धनुष तोड़ने का संकेत करते हैं। मुनि का आशीष लेकर श्रीराम स्वयंवर में पहुंचते हैं। उनके छृूते ही शिव का धनुष टूट जाता है। धनुष यज्ञ का यह मनोहारी मंचन देखने को रातभर दर्शकों की भारी भीड़ जमा रही। इनमें महिलाओं और बच्चों की तादात ज्यादा थी।
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