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भोजन नहीं बना तो कहां डंप है गेहूं और चावल
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
Updated Mon, 20 Jun 2016 12:28 AM IST
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बीआरसी कौशाम्बी के प्राथमिक और जूनियर विद्यालयों में मध्याह्न भोजन का गेहूं-चावल गोदाम से उठ चुका है। उधर स्कूलों में एक दिन भी भोजन नहीं बनवाया गया। ऐसे में सवाल उठने लगा है कि मध्याह्न भोजन का गेहूं-चावल आखिर कहां डंप है। कहीं अध्यापक और कोटेदारों ने इसका गोलमाल तो नहीं कर दिया।
बीआरसी कौशाम्बी के स्कूलों में गर्मी की छुट्टी होने के बाद एक दिन भी मध्याह्न भोजन नहीं बनवाया गया। यह आंकड़े स्कूलों के प्रधानाध्यापकों द्वारा बीआरसी को भेजी गई रिपोर्ट में दर्ज हैं। उधर गोदाम से कोटेदारों ने मध्याह्न भोजन का गेहूं और चावल का उठान मई माह में कर लिया है।
गोदाम के आंकड़ों पर जाएं तो कोटेदारों ने 177 क्विंटल 16 किलो गेहूं और 276 क्विंटल 41 किलो चावल का उठान किया है। गोदाम से उठाया गया गेहूं और चावल कोटेदार के घर पहुंचा होगा यह तो तय है पर यहां से स्कूलों में पहुंचाया गया या फिर प्रधानाध्यापकों और कोटेदार के बीच में गोलमाल हो गया। यह जांच के बाद स्पष्ट हो सकेगा।
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बीआरसी कौशाम्बी के स्कूलों में गर्मी की छुट्टी होने के बाद एक दिन भी मध्याह्न भोजन नहीं बनवाया गया। यह आंकड़े स्कूलों के प्रधानाध्यापकों द्वारा बीआरसी को भेजी गई रिपोर्ट में दर्ज हैं। उधर गोदाम से कोटेदारों ने मध्याह्न भोजन का गेहूं और चावल का उठान मई माह में कर लिया है।
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गोदाम के आंकड़ों पर जाएं तो कोटेदारों ने 177 क्विंटल 16 किलो गेहूं और 276 क्विंटल 41 किलो चावल का उठान किया है। गोदाम से उठाया गया गेहूं और चावल कोटेदार के घर पहुंचा होगा यह तो तय है पर यहां से स्कूलों में पहुंचाया गया या फिर प्रधानाध्यापकों और कोटेदार के बीच में गोलमाल हो गया। यह जांच के बाद स्पष्ट हो सकेगा।
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