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Kaushambi News: महेवा... जहां तुलसी के कान में पड़े रत्नावली के तीव्र स्वर तो हुई श्रीरामचरित मानस की रचना

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 23 May 2025 01:14 AM IST
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Maheva... where Tulsi heard the shrill voice of Ratnavali and composed Shri Ramcharit Mana
( यमुना तट पर बसे सरसवां ब्लॉक के महेवा (महेवाघाट) गांव में महाकवि गोस्वामी तुलसीदास की ससुराल है। इनकी पत्नी रत्नावली की जन्मस्थली होने के कारण ही महेवाघाट को पहचान मिली है।
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प्रभु श्रीराम की ख्याति देश-विदेश तक पहुंचाने वाले तुलसीदास जी का जन्म पड़ोसी जनपद चित्रकूट के राजापुर गांव में हुआ था। जबकि, उनकी पत्नी रत्नावली कौशाम्बी जिले के महेवा की रहने वाली थीं।
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एक रात यमुना में उतराते शव को पकड़कर तुलसीदास पत्नी से मिलने महेवा पहुंचे, रत्नावली ने उनको कटुवचन ‘अस्थि चर्म मय देह यह, ता सों ऐसी प्रीति-नेकू होती राम से, तो काहे भव-भीत’ कहे। जिसको सुनकर तुलसी श्रीराम की भक्ति में डूब गए।
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बाद में उन्होंने श्रीरामचरित मानस की रचना की। आज महेवा में रत्नावली जन्म कुटीर मंदिर है। पुजारी प्रह्लाद पाठक, त्रिवेणी प्रसाद श्रीवास्तव, रामआसरे निषाद व लवलेश दुबे बताते हैं कि मंदिर जिस भूमि पर है, वही रत्नावली का घर था।
हालांकि, गांव में रत्नावली के मंदिर के अलावा आज ज्यादा कुछ नहीं है। फिर भी लोगों के मन-मस्तिष्क में उनके प्रति श्रद्धा कभी कम नहीं हुई।
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वृंदावन के महंत रामदास ने यहां पांच दशक पहले बनवाया था मंदिर
-- खोदाई के दौरान महेवा से गणेश जी को गोद में लिए हुए देवी पार्वती के साथ चार अन्य देवियों की खंडित प्रतिमाएं मिली थीं। करीब पांच दशक पहले वृंदावन के महंत रामदास ने यहां मंदिर बनवाया। इस मंदिर में श्रीराम दरबार, भगवान शंकर, गणेशजी, गांव की कुल देवी के साथ रत्नावली, उनके पिता दीनबंधु पाठक और मां पार्वती देवी की प्रतिमा भी स्थापित है।

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गांव की कुल आबादी- 5810
पुरुष- 3132
महिला- 2678
स्नातक- 178
मजरे- घोघ का पूरा और अहिरन का पूरा
अधिसंख्य का पेशा- मछली पकड़ना और मजदूरी
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गांव की समस्याएं--
रत्नावली धाम-
धाम के विकास के अलावा स्नान के लिए पक्के घाटों की भी सुविधा नहीं है।
आवागमन-
तमाम जनपदों से आने-जाने वाले यात्रियों के लिए प्रतीक्षालय और पानी की सुविधा नहीं है।
लाइटें-
हाई-मास्ट लाइटें नहीं लगी हैं।
पेयजल-
जलजीवन मिशन से बनाई गई पानी टंकी से अब तक पेयजल की सप्लाई नहीं की जा सकी है।
वर्जन
पड़ोसी जनपदों से रोज यात्रियों का आवागमन होता है। यात्रियों के बैठने के लिए यात्री शेड, आरओ वॉटर, हाई-मास्ट लाइटों की दरकार है। अल्प बजट के कारण काम कराना संभव नहीं होता। इसके लिए कई बार क्षेत्रीय विधायक और सांसद को अवगत कराया गया है।--कौशल्या देवी, ग्राम प्रधान- महेवा
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