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किसको कितना अंक मिला, बताने से कतरा रहा प्रशासन
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
Updated Sun, 05 Jun 2016 12:04 AM IST
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दोआबा में लेखपाल के 58 पदों पर साक्षात्कार के बाद आए परिणाम ने मेधावियों को झकझोर दिया है। साक्षात्कार और मेरिट की गड़बड़ी से पर्दा उठाने के लिए दो माह पहले एक अभ्यर्थी ने आरटीआई डाली थी लेकिन उसे मेरिट लिस्ट आज तक उपलब्ध नहीं कराई गई। ऐसे में मेधावियों को आशंका है कि लेखपाल चयन प्रक्रिया में दाल में कुछ काला है। न्यायालय की छुट्टी खत्म होते ही वह चयन प्रक्रिया के खिलाफ जनहित याचिका दायर करेंगे।
दोआबा में लेखपाल के 58 पदों के लिए लिखित परीक्षा का आयोजन कराया गया था। परीक्षा में अव्वल स्थान पाने वाले लगभग 198 अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए 24, 25, 26 और 27 फरवरी को बुलाया गया था। साक्षात्कार के बाद मार्च माह में परिणाम घोषित कर दिया गया। इसी बीच हाई मेरिट के बाद भी चयन न होने पर एक अभ्यर्थी ने जन सूचना अधिकार अधिनियम के तहत 31 मार्च को लिखित और साक्षात्कार के अंकों की सूची मांग लिया। दो माह बीतने के बाद भी आवेदक को लिखित और साक्षात्कार के अंकों से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए जा सके।
उधर परिणाम में गड़बड़ी का मामला न्यायालय पहुंचा तो रोक लगाते हुए चयन प्रक्रिया का सर्कुलर तलब किया गया। सर्कुलर और चयन नियमावली को देखने बाद न्यायालय ने 27 मई को परिणाम पर लगाई गई रोक हटा लिया। न्यायालय की रोक हटने के बाद तीन जून को चयन समिति ने परिणाम घोषित कर दिया। नए चयन में 12 ओबीसी और तीन एससी के मेधावी चयन सूची से बाहर हो गए। ऐसे में मेधावियों के बीच सवाल यह उठने लगा है कि मार्च में घोषित रिजल्ट सही था या फिर तीन जून का। इस संशय की स्थिति में पहले परिणाम में चयन पा चुके मेधावी अब न्यायालय जाने की तैयारी में कर रहे हैं। बहरहाल कुछ भी हो लेखपाल चयन प्रक्रिया में दाल में कुछ काला जरूर है। ऐसा न होता तो आरटीआई का मामला दो माह से लंबित न किया जाता।
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आरटीआई के तहत मांगी गई सूचनाओं के संबंध में जानकारी नहीं है। यदि किसी ने मांगा है तो उसे अब तक मिल जाना चाहिए। वैसे भी परीक्षा और साक्षात्कार के अंकों की सूची नेट पर फीड करा दी गई है।
ओपी आर्य, सीडीओ
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दोआबा में लेखपाल के 58 पदों के लिए लिखित परीक्षा का आयोजन कराया गया था। परीक्षा में अव्वल स्थान पाने वाले लगभग 198 अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए 24, 25, 26 और 27 फरवरी को बुलाया गया था। साक्षात्कार के बाद मार्च माह में परिणाम घोषित कर दिया गया। इसी बीच हाई मेरिट के बाद भी चयन न होने पर एक अभ्यर्थी ने जन सूचना अधिकार अधिनियम के तहत 31 मार्च को लिखित और साक्षात्कार के अंकों की सूची मांग लिया। दो माह बीतने के बाद भी आवेदक को लिखित और साक्षात्कार के अंकों से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए जा सके।
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उधर परिणाम में गड़बड़ी का मामला न्यायालय पहुंचा तो रोक लगाते हुए चयन प्रक्रिया का सर्कुलर तलब किया गया। सर्कुलर और चयन नियमावली को देखने बाद न्यायालय ने 27 मई को परिणाम पर लगाई गई रोक हटा लिया। न्यायालय की रोक हटने के बाद तीन जून को चयन समिति ने परिणाम घोषित कर दिया। नए चयन में 12 ओबीसी और तीन एससी के मेधावी चयन सूची से बाहर हो गए। ऐसे में मेधावियों के बीच सवाल यह उठने लगा है कि मार्च में घोषित रिजल्ट सही था या फिर तीन जून का। इस संशय की स्थिति में पहले परिणाम में चयन पा चुके मेधावी अब न्यायालय जाने की तैयारी में कर रहे हैं। बहरहाल कुछ भी हो लेखपाल चयन प्रक्रिया में दाल में कुछ काला जरूर है। ऐसा न होता तो आरटीआई का मामला दो माह से लंबित न किया जाता।
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आरटीआई के तहत मांगी गई सूचनाओं के संबंध में जानकारी नहीं है। यदि किसी ने मांगा है तो उसे अब तक मिल जाना चाहिए। वैसे भी परीक्षा और साक्षात्कार के अंकों की सूची नेट पर फीड करा दी गई है।
ओपी आर्य, सीडीओ