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नेक-नीयती के रास्ते पर चलने की दी सीख
ब्यूरो/ अमर उजाला कौशाम्बी
Updated Sat, 28 Mar 2015 01:02 AM IST
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करारी (ब्यूरो)। कस्बे के नयागंज मोहल्ले में बृहस्पतिवार रात रजा-ए-मुस्तफा कांफ्रेंस का आयोजन किया गया। इस दौरान जहां मौलानाओं ने तकरीर में नेक-नीयती के रास्ते पर चलने का मशविरा दिया। वहीं शायरों ने भी कलाम से महफिल को रातभर झूमने के लिए मजबूर कर दिया।
नया मोहल्ले में रात अंजुमन-ए-इस्माहुल मोमेनीन के तत्वावधान में आयोजित कांफ्रेंस की कारी जाकिर ने कुरआन पाक से की। इस मौके पर मौजूद शायर सरफराज हुसैन बिहारी ने सुनाया कि ऐ सबा सबब क्या है कुछ बता मदीने का, जो गया मदीने में हो गया मदीने का...इसी तरह से झारखंड से आए शायर मुबारक अली ने सुनाया कि माना कि बहुत गुनहगार हैं आंखे, फिर भी दरें नबी की तलबगार हैं आखें...इनका यह कलाम सुनकर मौजूद लोग वाह-वाह करने लगे। वहीं शाहिद जौनपुरी समेत अन्य शायरों के भी कलाम ने आयोजन को यादगार बना दिया।
इससे पूर्व तकरीर करते हुए मौलाना मसऊद अहमद मुबारकपुरी ने लोगों से नेक-नीयती के रास्ते पर चलने का मशविरा दिया। कहा कि यही वह राह है, जिस पर चलने वाला बंदा हर एक को अजीज होता है। इस मौके पर सरफराज हुसैन बिहारी, मोहम्मद अहमद, शाहिद हसन, मोहम्मद वसीम, मोहम्मद इस्लाम उद्दीन, मोहम्मद अवैस अंसारी, मोरर्सर अली आदि मौजूद रहे।
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कस्बे के असकरी हाल में मजालिसे फातमियां की आखरी मजलिस बृहस्पतिवार की रात हुई। इसकी शुरूआत नसीम करारवी व मजहर रहीमपुरी ने सोज पढ़कर की। वहीं मजलिस में खिताब करते हुए मौलाना कमाल अब्बास ने फातमा जहरा के आखिरी दिनों की दास्तां लोगों के सामने रखी। मसायब सुनकर अकीदतमंदों की आंखों से आंसू बह निकले। इस मौके पर रौशन करारवी, मौलाना शाहिद रजा, सरफराज हुसैन, अकील अब्बास, महमूद अब्बास आदि मौजूद रहे।
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नया मोहल्ले में रात अंजुमन-ए-इस्माहुल मोमेनीन के तत्वावधान में आयोजित कांफ्रेंस की कारी जाकिर ने कुरआन पाक से की। इस मौके पर मौजूद शायर सरफराज हुसैन बिहारी ने सुनाया कि ऐ सबा सबब क्या है कुछ बता मदीने का, जो गया मदीने में हो गया मदीने का...इसी तरह से झारखंड से आए शायर मुबारक अली ने सुनाया कि माना कि बहुत गुनहगार हैं आंखे, फिर भी दरें नबी की तलबगार हैं आखें...इनका यह कलाम सुनकर मौजूद लोग वाह-वाह करने लगे। वहीं शाहिद जौनपुरी समेत अन्य शायरों के भी कलाम ने आयोजन को यादगार बना दिया।
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इससे पूर्व तकरीर करते हुए मौलाना मसऊद अहमद मुबारकपुरी ने लोगों से नेक-नीयती के रास्ते पर चलने का मशविरा दिया। कहा कि यही वह राह है, जिस पर चलने वाला बंदा हर एक को अजीज होता है। इस मौके पर सरफराज हुसैन बिहारी, मोहम्मद अहमद, शाहिद हसन, मोहम्मद वसीम, मोहम्मद इस्लाम उद्दीन, मोहम्मद अवैस अंसारी, मोरर्सर अली आदि मौजूद रहे।
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कस्बे के असकरी हाल में मजालिसे फातमियां की आखरी मजलिस बृहस्पतिवार की रात हुई। इसकी शुरूआत नसीम करारवी व मजहर रहीमपुरी ने सोज पढ़कर की। वहीं मजलिस में खिताब करते हुए मौलाना कमाल अब्बास ने फातमा जहरा के आखिरी दिनों की दास्तां लोगों के सामने रखी। मसायब सुनकर अकीदतमंदों की आंखों से आंसू बह निकले। इस मौके पर रौशन करारवी, मौलाना शाहिद रजा, सरफराज हुसैन, अकील अब्बास, महमूद अब्बास आदि मौजूद रहे।