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किशुनपुर पंप कैनाल से छोड़ा गया पानी
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
Updated Mon, 22 May 2017 01:24 AM IST
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कौशाम्बी
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सरसवां ब्लाक क्षेत्र के लोगों के लिए राहत भरी खबर है। किशुनपुर पंप कैनाल से पानी छोड़ दिया गया है। जल्द ही सभी माइनरों में पानी पहुंच जाएगा। सरसवां ब्लाक क्षेत्र में बंदरों की मौत व अलवारा झील सूखने की खबर को अमर उजाला ने प्रकाशित किया तो प्रशासनिक अधिकारी हरकत में आए और नहर चालू कराई गई। अलवारा झील को भरने की तैयारी नहर विभाग के अधिकारियों ने शुरू कर दी है। पानी छोड़े जाने से वन्य जीवों को राहत मिली है।
किशुनपुर पंप कैनाल नहर लगभग डेढ़ महीने से बंद चल रही थी। इस नहर में पानी न आने से सरसवां ब्लाक क्षेत्र के लगभग 50 से अधिक गांव प्रभावित हो गए थे। इस क्षेत्र में नहर के पानी से ही लोग खेती किसानी करते हैं। इसके अलावा यहां के वन्य जीवों के लिए पीने का पानी का एक मात्र साधन नहर थी। भीषण गर्मी में इस नहर से धूल उड़ने लगी थी। नतीजतन अंधावा गांव के आसपास प्यास से बेकल करीब एक दर्जन बंदरों की मौत हो चुकी थी। राष्ट्रीय पक्षी मोर भी दम तोड़ने लगे थे। जनपद में अब तक 25 से ज्यादा मोरों की मौत हो चुकी थी। इसके अलावा दशकों बाद अलवारा झील भी सूख चुकी थी।
यह झील यमुना नदी से लिंक थी। इसमें किशुनपुर नहर का भी पानी आता था। जब लबालब नहर चलती थी तो ओवरफ्लो से बचने के लिए पानी अलवारा झील की ओर मोड़ दिया जाता था। अलवारा झील सूखने की वजह से वन्य जीवों की मौत होने लगी थी। अलवारा झील में दर्जनों वन्य जीवों के शव पड़े थे। झील का पानी तलहटी में पहुंचा तो यहां के लोग चिंतित हो उठे थे। इस खबर को अमर उजाला ने शनिवार के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया तो नहर विभाग हरकत में आया। विभाग ने किशुनपुर पंप कैनाल के सातों पंपों को चालू कर दिया है। एक्सईएन राजीव कुमार निरंजन ने बताया कि किशुनपुर पंप नहर के सातों पंप चालू करा दिए गए हैं। एक पंप से 60 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। जल्द ही सभी माइनरों में पानी पहुंच जाएगा।
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नहर में पानी आने से किसानों ने ली राहत की सांस
किशुनपुर पंप कैनाल से नहर में पानी छोड़े जाने से नहरी क्षेत्र के किसानों ने राहत की सांस ली है। अंधावा के राजेंद्र प्रसाद त्रिपाठी ने बताया कि नहर में पानी आने से किसानों के साथ ही वन्य जीवों को भी राहत मिली है। किसान गेहूं की कटाई व मड़ाई करने के बाद दोबारा खेतों को दुरुस्त करने में लग गया है। पौरकाशीरामपुर, भवनसुरी, पश्चिमशरीरा, पूरबशरीरा आदि क्षेत्र के किसान भी खेतों में डट चुके हैं।
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किशुनपुर पंप कैनाल नहर लगभग डेढ़ महीने से बंद चल रही थी। इस नहर में पानी न आने से सरसवां ब्लाक क्षेत्र के लगभग 50 से अधिक गांव प्रभावित हो गए थे। इस क्षेत्र में नहर के पानी से ही लोग खेती किसानी करते हैं। इसके अलावा यहां के वन्य जीवों के लिए पीने का पानी का एक मात्र साधन नहर थी। भीषण गर्मी में इस नहर से धूल उड़ने लगी थी। नतीजतन अंधावा गांव के आसपास प्यास से बेकल करीब एक दर्जन बंदरों की मौत हो चुकी थी। राष्ट्रीय पक्षी मोर भी दम तोड़ने लगे थे। जनपद में अब तक 25 से ज्यादा मोरों की मौत हो चुकी थी। इसके अलावा दशकों बाद अलवारा झील भी सूख चुकी थी।
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यह झील यमुना नदी से लिंक थी। इसमें किशुनपुर नहर का भी पानी आता था। जब लबालब नहर चलती थी तो ओवरफ्लो से बचने के लिए पानी अलवारा झील की ओर मोड़ दिया जाता था। अलवारा झील सूखने की वजह से वन्य जीवों की मौत होने लगी थी। अलवारा झील में दर्जनों वन्य जीवों के शव पड़े थे। झील का पानी तलहटी में पहुंचा तो यहां के लोग चिंतित हो उठे थे। इस खबर को अमर उजाला ने शनिवार के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया तो नहर विभाग हरकत में आया। विभाग ने किशुनपुर पंप कैनाल के सातों पंपों को चालू कर दिया है। एक्सईएन राजीव कुमार निरंजन ने बताया कि किशुनपुर पंप नहर के सातों पंप चालू करा दिए गए हैं। एक पंप से 60 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। जल्द ही सभी माइनरों में पानी पहुंच जाएगा।
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नहर में पानी आने से किसानों ने ली राहत की सांस
किशुनपुर पंप कैनाल से नहर में पानी छोड़े जाने से नहरी क्षेत्र के किसानों ने राहत की सांस ली है। अंधावा के राजेंद्र प्रसाद त्रिपाठी ने बताया कि नहर में पानी आने से किसानों के साथ ही वन्य जीवों को भी राहत मिली है। किसान गेहूं की कटाई व मड़ाई करने के बाद दोबारा खेतों को दुरुस्त करने में लग गया है। पौरकाशीरामपुर, भवनसुरी, पश्चिमशरीरा, पूरबशरीरा आदि क्षेत्र के किसान भी खेतों में डट चुके हैं।