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किशुनपुर पंप कैनाल का होगा कायाकल्प
Sun, 10 Mar 2019 12:49 AM IST
shailendra Kumar
अमर उजाला ब्यूरो, कौशाम्बी
अमर उजाला ब्यूरो, कौशाम्बी
Published by: shailendra Kumar
Updated Sun, 10 Mar 2019 12:49 AM IST
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कौशाम्बी
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, कौशाम्बी
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मंझनपुर। पांच दशक पुराने किशुनपुर कैनाल के अधिकतर पंप जर्जर हो गए हैं। इससे पूरी क्षमता से पानी नहीं मिल रहा है। नहर में टेल तक पानी नहीं पहुंचने से हजारों हेक्टेयर भूमि असिंचित रह जाती है। समस्या को देखते हुए पंपों की मरम्मत के लिए सिंचाई विभाग ने करीब 21.4 करोड़ रुपये का बजट शासन को भेजा है। माना जा रहा है कि लोकसभा चुनाव बाद बजट स्वीकृत होेने पर किशुनपुर पंप कैनाल का कायाकल्प हो सकता है।
किसानों की समस्या को देखते हुए तत्कालीन सरकार ने 70 के दशक में यमुना नदी पर किशुनपुर गांव में पंप कैनाल बनवाया था। इस कैनाल से 28 माइनर के जरिए जिले भर में करीब 268 किलोमीटर नहरों का जाल बिछाया गया है। कैनाल में 60 क्यूसेक के आठ पंप लगाए गए हैं। इससे सरसवां, कौशाम्बी और नेवादा विकासखंड क्षेत्र की तकरीबन 11 हजार हेक्टेयर भूमि सिंचित करने की व्यवस्था है, लेकिन मरम्मत के अभाव में पांच दशक पुराने कैनाल के अधिकतर पंप और मशीनें जीर्णशीर्ण हो गई हैं। इसके चलते पंप पूरी क्षमता से पानी नहीं दे रहे हैं। हालत यह है कि सालों से एक साथ आठों पंप नहीं चलाए जा सके। जुगाड़ के जरिए चार से सात के बीच ही पंप चलाए जाते हैं। इनमें भी महज 60 फीसदी पानी ही ऊपर चढ़ पाता है। नहरों में टेल तक पानी नहीं पहुंचने के कारण बड़ा भूभाग असिंचित रह जाता है। किसानों की समस्या को देखते हुए सिंचाई विभाग ने इसकी मरम्मत के लिए 21.40 करोड़ का बचट तैयार किया है। एक्सईएन आरके निरंजन ने बताया कि बजट शासन को भेज दिया गया है। लोकसभा चुनाव पड़ने की वजह से मामला फंस गया है। उम्मीद है चुनाव बाद बजट की स्वीकृति मिल जाएगी।
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किसानों की समस्या को देखते हुए तत्कालीन सरकार ने 70 के दशक में यमुना नदी पर किशुनपुर गांव में पंप कैनाल बनवाया था। इस कैनाल से 28 माइनर के जरिए जिले भर में करीब 268 किलोमीटर नहरों का जाल बिछाया गया है। कैनाल में 60 क्यूसेक के आठ पंप लगाए गए हैं। इससे सरसवां, कौशाम्बी और नेवादा विकासखंड क्षेत्र की तकरीबन 11 हजार हेक्टेयर भूमि सिंचित करने की व्यवस्था है, लेकिन मरम्मत के अभाव में पांच दशक पुराने कैनाल के अधिकतर पंप और मशीनें जीर्णशीर्ण हो गई हैं। इसके चलते पंप पूरी क्षमता से पानी नहीं दे रहे हैं। हालत यह है कि सालों से एक साथ आठों पंप नहीं चलाए जा सके। जुगाड़ के जरिए चार से सात के बीच ही पंप चलाए जाते हैं। इनमें भी महज 60 फीसदी पानी ही ऊपर चढ़ पाता है। नहरों में टेल तक पानी नहीं पहुंचने के कारण बड़ा भूभाग असिंचित रह जाता है। किसानों की समस्या को देखते हुए सिंचाई विभाग ने इसकी मरम्मत के लिए 21.40 करोड़ का बचट तैयार किया है। एक्सईएन आरके निरंजन ने बताया कि बजट शासन को भेज दिया गया है। लोकसभा चुनाव पड़ने की वजह से मामला फंस गया है। उम्मीद है चुनाव बाद बजट की स्वीकृति मिल जाएगी।
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