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क्रय केंद्रों पर ताला, लुट रहे अन्नदाता
अमर उजाला ब्यूरो, कौशाम्बी
Updated Fri, 04 Dec 2015 11:07 PM IST
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धान की सरकारी खरीद के लिए खोले गए केंद्रों में ताला लटकने से किसान अपनी उपज बेचने को भटक रहे हैं। क्रयकेंद्र प्रभारियों की इस मनमानी से किसानों को अपनी उपज व्यापारियों को औने-पौने दाम में बेचनी पड़ रही है। शिकायत के बाद भी सरकारी खरीद नहीं किए जाने से अन्नदाताओं में गुस्सा भी है। वहीं अफसर चुनाव का बहाना बनाकर खामोश बने हैं।
बता दें कि जिले में धान की सरकारी खरीद के लिए दो दर्जन क्रयकेंद्र खोले जाने का फरमान है। पीसीएफ, विपणन आदि विभागों के खुलने वाले केंद्र अभी तक कौशाम्बी में खरीद नहीं शुरू किए हैं। इससे किसानों को दिक्कतें झेलनी पड़ रही है। गेंहू आदि फसलों की बुआई के लिए खाद, बीज के इंतजाम को वे अपनी धान की उपज बेचने के लिए भटक रहे हैं। सरकारी खरीद नहीं होने से किसानों को अपना धान व्यापारियों के हाथ कम कीमत में बेचने की मजबूरी झेलनी पड़ रही है। कौशाम्बी ब्लाक के गौरेए गांव के किसान अजय कुमार, अनिल कुमार, भीमसेन त्रिपाठी, कंधईलाल, भानु प्रताप त्रिपाठी, रामसूरज द्विवेदी, कृष्ण कुमार, रामयश द्विवेदी, महेंद्र कुमार, रामसूरत आदि ने बताया कि 15 दिनों से वे धान बेचने के लिए क्रयकेंद्र खुलने का इंतजार कर रहे थे।
बताया कि उनके यहां नरेंद्र बारा गांव स्थित पीसीएफ गोदाम और बिजिया बाजार में विपणन विभाग का क्रयकेंद्र हर साल खोला जाता है। इस साल इन दोनों स्थानों पर अभी धान की खरीद शुरू नहीं की जा सकी है। इसके कारण उन्हें अपना धान 1100 रुपये प्रति क्विंटल की कीमत में व्यापारियों को बेचना पड़ा है। जबकि सरकारी रेट 1400 रुपये प्रति क्विंटल का घोषित किया गया है। गांव के भीमसेन ने बताया कि उन्होंने दो दिन पहले 200 क्विंटल, भानु प्रताप ने 350 क्विंटल, कृष्ण कुमार ने 175 क्विंटल, रामसूूरज द्विवेदी ने 400 क्विंटल धान व्यापारी को 1100 रुपये की रेट से बेचा है। क्योंकि उन्हें गेंहू के बुआई के लिए खाद आदि का इंतजाम करना है। मामले में जिला विपणन अधिकारी से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने काल ही रिसीव नहीं की।
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बता दें कि जिले में धान की सरकारी खरीद के लिए दो दर्जन क्रयकेंद्र खोले जाने का फरमान है। पीसीएफ, विपणन आदि विभागों के खुलने वाले केंद्र अभी तक कौशाम्बी में खरीद नहीं शुरू किए हैं। इससे किसानों को दिक्कतें झेलनी पड़ रही है। गेंहू आदि फसलों की बुआई के लिए खाद, बीज के इंतजाम को वे अपनी धान की उपज बेचने के लिए भटक रहे हैं। सरकारी खरीद नहीं होने से किसानों को अपना धान व्यापारियों के हाथ कम कीमत में बेचने की मजबूरी झेलनी पड़ रही है। कौशाम्बी ब्लाक के गौरेए गांव के किसान अजय कुमार, अनिल कुमार, भीमसेन त्रिपाठी, कंधईलाल, भानु प्रताप त्रिपाठी, रामसूरज द्विवेदी, कृष्ण कुमार, रामयश द्विवेदी, महेंद्र कुमार, रामसूरत आदि ने बताया कि 15 दिनों से वे धान बेचने के लिए क्रयकेंद्र खुलने का इंतजार कर रहे थे।
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बताया कि उनके यहां नरेंद्र बारा गांव स्थित पीसीएफ गोदाम और बिजिया बाजार में विपणन विभाग का क्रयकेंद्र हर साल खोला जाता है। इस साल इन दोनों स्थानों पर अभी धान की खरीद शुरू नहीं की जा सकी है। इसके कारण उन्हें अपना धान 1100 रुपये प्रति क्विंटल की कीमत में व्यापारियों को बेचना पड़ा है। जबकि सरकारी रेट 1400 रुपये प्रति क्विंटल का घोषित किया गया है। गांव के भीमसेन ने बताया कि उन्होंने दो दिन पहले 200 क्विंटल, भानु प्रताप ने 350 क्विंटल, कृष्ण कुमार ने 175 क्विंटल, रामसूूरज द्विवेदी ने 400 क्विंटल धान व्यापारी को 1100 रुपये की रेट से बेचा है। क्योंकि उन्हें गेंहू के बुआई के लिए खाद आदि का इंतजाम करना है। मामले में जिला विपणन अधिकारी से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने काल ही रिसीव नहीं की।
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