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सब कुछ लुट गया, मदद का भी आसरा नहीं

ब्यूरो/अमर उजाला कौशाम्बी Updated Sat, 11 Apr 2015 12:28 AM IST
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मंझनपुर/चायल (कौशाम्बी)। खून-पसीने से तैयार खेती बेमौसम बारिश से तबाह हो चुकी है। मौसम की मार से गिरी गेहूं की फसलों में दाने ही नहीं हैं। घर में भी अन्न का दाना नहीं है। विधवा भाभी और उनकी दो बेटियों के निवाले का इंतजाम, बड़ी होती भतीजियों की शादी...घर की माली हालत, खेतों में बर्बाद पड़ी फसल। इसी सदमे में चायल तहसील के मखऊपुर के किसान त्रिलोक सिंह की मौत हो गई। कुदरत के इस कहर से विधवा भाभी और उसकी दोनों बेटियां बेसहारा हो गई हैं। इन्हें तो घर के मुखिया की मौत पर इमदाद भी मिलती नहीं दिख रही है। बंटाई का खेत और असली वारिस नहीं होने का पेंच बताकर सरकारी मदद दिलाने से भी अफसर हाथ खींचते दिख रहे हैं।
मौसम की मार से बर्बाद हुई फसल के सदमे में मखऊपुर गांव के त्रिलोक सिंह यादव (60) की बृहस्पतिवार को मौत हो गई। इससे पूरे इलाके में हड़कंप मचा हुआ है। रात में भी एसडीएम, तहसीलदार समेत अन्य राजस्व अफसर और कर्मचारी गांव पहुंच गए थे। शुक्रवार को जिलाधिकारी राजमणि यादव ने भी गांव पहुंचकर हालात को देखा। खेत में जाकर फसलों की बर्बादी का जायजा लिया। पूरा गांव बता रहा है कि त्रिलोक सिंह की जान बर्बाद फसलों के सदमे में हुई है। फौरी तौर पर अफसर भी उसकी मौत को मौसम की पड़ी मार ही मान रहे हैं।

पर, घटना के 24 घंटे बाद भी उसके पीड़ित परिवार को मदद के नाम पर फूटी कौड़ी नहीं दी जा सकी है, जबकि उसके घर की माली हालत ठीक नहीं है। बंटाई पर लिए गए खेतों में तैयार फसल मौसम की मार से मिट्टी में मिल चुकी है। घर में अन्न का दाना नहीं है। खुद त्रिलोक सिंह की भाभी लक्ष्मी देवी ने बताया कि अभी हफ्ते भर पहले गांव के ही काश्तकार से खाने के लिए छह धरा (18 किग्रा) गेहूं उधार लिया था। वह अनाज भी खत्म हो चुका है। खेत से कुछ मिलना नहीं है।

अब वह और उसकी दो बेटियों के लिए रोटी का इंतजाम कहां से होगा। वहीं जांच के बाद त्रिलोक सिंह के पास खुद का खेत नहीं मिलनेे और बीवी-बच्चे नहीं होने से सरकारी मदद मिलने में भी पानी फिरता नजर आ रहा है, जबकि मृतक त्रिलोक सिंह पर ही अपनी विधवा भाभी और उनकी दो बेटियों की परवरिश का जिम्मा था। फिलहाल डीएम ने एसडीएम चायल को पीड़ित परिवार को क्रियाकर्म के लिए फौरी तौर पर 10 हजार रुपये की आर्थिक मदद देने का निर्देश दिया है।

मखऊपुर के त्रिलोक सिंह पर विधवा भाभी और दो भतीजियों की जिम्मेदारी थी। इसके लिए वह काश्तकारों की जमीन बंटाई पर लेकर खेती करते थे। उनकी भाभी लक्ष्मी देवी ने बताया कि इस बार भी गांव के नत्थू यादव से तीन बीघा और अजय सिंह का एक बीघा खेत बंटाई पर लिया था। पूरे चार बीघे में गेहूं की खेती की गई थी। पर, मौसम की मार से पूरी फसल चौपट हो गई। फसल बर्बाद होने के बाद से ही वे परेशान रहने लगे थे। रोज खेत की ओर जाते और घर आकर गुमसुम सा लेटे रहते थे।

बर्बाद हुई फसलों के गम में जान गंवाने वाले त्रिलोक सिंह मूलत: कौशाम्बी के नेवादा ब्लाक के ऐमापुर गांव के थे। गांववाले बताते हैं कि मखऊपुर उनका ननिहाल था। करीब 50 बरस पहले से त्रिलोक सिंह और उनके तीन अन्य भाई समेत पूरा परिवार ननिहाल में आकर बस गया था। ननिहाल से घर बनाने को जमीन मामा की ओर से दान में मिल गई थी। इस जमीन पर चारों भाई तीरथ सिंह, त्रिलोक सिंह, त्रिभुवन सिंह और सुमंत सिंह कच्ची मिट्टी की दीवार खड़ी करके खपरे का छाजन डालकर गुजर बसर करते थे।

भूमिहीन होने के कारण इन भाइयों को तीन-तीन बिस्वा जमीन का पट्टा भी मिला था। पर, पट्टा मिली जमीन पर अब तक किसी भी भाई को कब्जा नहीं मिल सका है। इससे सभी भाई काश्तकारों के खेत बंटाई पर लेकर परिवार के लिए निवाले का इंतजाम करते थे। भाइयों में दूसरे नंबर के त्रिलोक सिंह को पत्नी-बच्चे नहीं थे। वर्ष 2001 में उनके बड़े भाई तीरथ सिंह की मौत हो गई। तब से विधवा भाभी और उनकी दो बेटियों की देखरेख करते हुए वे उन्हीं के साथ रहते थे। साथ ही भाभी और भतीजियों की रोटी के इंतजाम के लिए बंटाई पर खेत लेकर किसानी करते थे।


चायल तहसील के मखऊपुर गांव के किसान त्रिलोक सिंह की मौत पर गांव पहुंचे डीएम राजमणि यादव ने कोटेदार को पीड़ित परिवार की माली स्थिति को देखते हुए तत्काल गेहूं, चावल उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।

खेती चौपट होने के सदमे में जान गंवाने वाले त्रिलोक सिंह की फसल की हकीकत जानने के लिए डीएम ने अपने सामने क्रॉप कटिंग करवाई। 30 गुणे 30 फिट के दायरे में काटी गई फसल में कुल पांच किलोग्राम ही गेहूं निकला है। ये दाने भी बेहद पतले और कमजोर हैं, जबकि कम से कम 25 किलोग्राम पैदावार निकलनी चाहिए थी। एसडीएम रजनीश मिश्र ने बताया कि यह पैदावार सिर्फ 30 फीसदी है।

यानि त्रिलोक सिंह की फसल मौसम की मार से 70 फीसदी बर्बाद हुई है। वहीं जिला कृषि अधिकारी सुरेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि जिले में बेमौसम की बारिश, ओलावृष्टि से गेहूं, सरसों, चना, अरहर आदि की करीब 70 से 75 फीसदी फसल के नुकसान की संभावना है। बता दें कि जिले में इस साल 66905 हेक्टेयर क्षेत्रफल में गेहूं की बुआई की गई थी। अनुमान था कि करीब 1.87 लाख मीट्रिक टन से अधिक उपज होगी। पर, बेमौसम बारिश ने जिले में गेहूं की करीब 70 फीसदी फसल बर्बाद कर दी है। खुद कृषि विभाग के अफसरों की मानें तो इस साल 50-60 हजार मीट्रिक टन भी गेहूं की पैदावार होनी मुश्किल नजर आ रही है। 

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