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रास्ता नहीं तो अब वोट नहीं
अमर उजाला ब्यूरो, कौशाम्बी
Updated Wed, 21 Oct 2015 12:03 AM IST
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बरसों से रास्ते के लिए तरस रहे बेरौंचा ग्रामसभा की दलित बस्ती बस्तीतारा के गांववाले अब अपनी इस समस्या के समाधान के लिए आर-पार की लड़ाई पर उतर आए हैं। ग्रामीणों ने ‘रास्ता नहीं तो वोट नहीं’ का नारा बुलंद करते हुए पंचायत चुनाव के बहिष्कार का ऐलान किया है।
करीब 80 घरों की इस बस्ती में जाने के लिए मुख्यमार्ग से कोई रास्ता नहीं है। बस्ती के लोग पगडंडी से आने-जाने को मजबूर हैं। गांव के रहने वाले राजेश कुमार, बृजेश, सुखलाल, दशरथलाल, रामप्रसाद, शैलेश कुमार, ज्ञानचंद्र, जनता प्रसाद, धीरज कुमार आदि ने बताया कि रास्ता नहीं होने से उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। सबसे ज्यादा दिक्कत तो बारिश के दिनों में होती है। जब पगडंडी में घुटने तक पानी भर जाता है। इस दौरान खेत, बाजार कहीं भी जाना मुश्किल होता है। वहीं मरीजों को भी लाने ले जाने में दिक्कत होती है। ग्रामीणों की मानें तो ग्राम प्रधान से लेकर विधायक, सांसद और अफसरों तक को समस्या से अवगत कराया गया।
इसके बाद भी समस्या का समाधान नहीं हो सका। जनप्रतिनिधियों और अफसरों की अनदेखी से आजिज ग्रामीणों ने 29 अक्तूबर को पंचायत चुनाव के लिए होने वाले मतदान के बहिष्कार का निर्णय लिया है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने अपने फैसले की जानकारी प्रधान के साथ ही अफसरों को दे दी है। जब तक उनकी समस्या का समाधान नहीं किया जाता, वे किसी भी कीमत पर मतदान नहीं करेंगे। इस संदर्भ में एसडीएम नरेंद्र बहादुर सिंह का कहना है कि उन्हें गांववालों के निर्णय की जानकारी नहीं है। गांव जाकर लोगों की समस्या को देखा जाएगा। चुनाव के बाद दिक्कत दूर कराने की कोशिश की जाएगी।
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करीब 80 घरों की इस बस्ती में जाने के लिए मुख्यमार्ग से कोई रास्ता नहीं है। बस्ती के लोग पगडंडी से आने-जाने को मजबूर हैं। गांव के रहने वाले राजेश कुमार, बृजेश, सुखलाल, दशरथलाल, रामप्रसाद, शैलेश कुमार, ज्ञानचंद्र, जनता प्रसाद, धीरज कुमार आदि ने बताया कि रास्ता नहीं होने से उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। सबसे ज्यादा दिक्कत तो बारिश के दिनों में होती है। जब पगडंडी में घुटने तक पानी भर जाता है। इस दौरान खेत, बाजार कहीं भी जाना मुश्किल होता है। वहीं मरीजों को भी लाने ले जाने में दिक्कत होती है। ग्रामीणों की मानें तो ग्राम प्रधान से लेकर विधायक, सांसद और अफसरों तक को समस्या से अवगत कराया गया।
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इसके बाद भी समस्या का समाधान नहीं हो सका। जनप्रतिनिधियों और अफसरों की अनदेखी से आजिज ग्रामीणों ने 29 अक्तूबर को पंचायत चुनाव के लिए होने वाले मतदान के बहिष्कार का निर्णय लिया है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने अपने फैसले की जानकारी प्रधान के साथ ही अफसरों को दे दी है। जब तक उनकी समस्या का समाधान नहीं किया जाता, वे किसी भी कीमत पर मतदान नहीं करेंगे। इस संदर्भ में एसडीएम नरेंद्र बहादुर सिंह का कहना है कि उन्हें गांववालों के निर्णय की जानकारी नहीं है। गांव जाकर लोगों की समस्या को देखा जाएगा। चुनाव के बाद दिक्कत दूर कराने की कोशिश की जाएगी।
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