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Kaushambi Flood : तीन फिट घटा यमुना का जल स्तर, किसानों ने ली राहत की सांस
Mon, 16 Sep 2024 03:27 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, कौशाम्बी
अमर उजाला नेटवर्क, कौशाम्बी
Published by: विनोद सिंह
Updated Mon, 16 Sep 2024 03:27 PM IST
सार
यमुना नदी के बाढ़ से तराई में बसे मल्हीपुर, मोहम्मदाबाद, कटैया, बेनपुर, डिहवा, गड़रियन का पुरवा, डिहवा, नंदा का पुरवा, पिपरहटा, उमरवल, सेवढ़ा गांव के कछार में बोई गई अरहर, तिल, बाजारा, कद्दू और मिर्च की फसल को काफी नुकसान पहुंचाया। पानी में डूबने से कई किसानों की फसलें सड़ कर बर्बाद हो गई है।
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किलनहाई नदी रपटा पुल पर बाढ़ के पानी से होकर गुजरते वाहन।
- फोटो : संवाद
विस्तार
चायल तहसील क्षेत्र के तराई इलाके के गांवो में सोमवार भोर से यमुना का जलस्तर घटने लगा है, उफनाई यमुना ने कछार समेत किलनहाई नदी के तराई की फसलों काफी नुकसान पहुंचा दिया है। सोमवार सुबह पानी कम होने से डूबी फसलें दिखाई पड़ने लगी हैं।
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यमुना नदी के बाढ़ से तराई में बसे मल्हीपुर, मोहम्मदाबाद, कटैया, बेनपुर, डिहवा, गड़रियन का पुरवा, डिहवा, नंदा का पुरवा, पिपरहटा, उमरवल, सेवढ़ा गांव के कछार में बोई गई अरहर, तिल, बाजारा, कद्दू और मिर्च की फसल को काफी नुकसान पहुंचाया। पानी में डूबने से कई किसानों की फसलें सड़ कर बर्बाद हो गई है।
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चकपिनहा गांव स्थित किलनहाई नदी का रपटा पुल से पानी नीचे पहुंचने से सड़क से आवागमन शुरु हो गया है। जलस्तर कम होने से ग्रामीणों में राहत जरूर है। लेकिन उनके फसल बर्बाद होने की पीड़ा चेहरे पर साफ झलक रही है। किसान बासदेव, रतिभान, शिवदानी, हरिनारायण, भूपेंद्र, मकबूल, इस्लाम आदि लोगों ने बताया की कद्दू खेती तैयार हो गई थी। बाजार में भाव भी अच्छा था। एक सप्ताह बाद उसकी तोड़ाई हो जाती। लेकिन कुदरत को मंजूर नहीं था। बाढ़ के पानी में डूबने से पूरी फसल बर्बाद हो गई।
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कटैया के किसान अफगान अहमद के मुताबिक पांच बीघे में मिर्च की फसल लगा रखी है। खाद, दवा, निराई, गुड़ाई आदि पर करीब सवा लाख रुपये लागत आई है। पानी में डूबकर पत्तियां और पौधों के तने में सड़न फैल गई हैं। बचे हुए पौधों में भी पानी लग गया है। इससे पौधों का बचना मुश्किल है। तहसील प्रशासन से अब तक कोई नुकसान का आकलन लेने भी नहीं आया है।