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शीतलहर से बढ़ी गलन, कांप रहे लोग
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
Updated Mon, 02 Jan 2017 12:48 AM IST
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जिले में ठंड पूरे जोर पर है। तीन दिन से भगवान भाष्कर के दर्शन न होने और शीतलहर चलने से लोगों के हाड़ तक कांप रहे हैं। बढ़ी ठंड से जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया और लोग घरों में दुबकने को मजबूर रहे। इसके चलते बाजारों और सड़कों पर दिनभर सन्नाटा छाया रहा। गर्म कपड़ेे पहनने के बाद भी राहत न मिलने पर लोग अलाव या रजाई का सहारा लेते देखे गए।
नव वर्ष की पहली सुबह में दोआबा कड़ाके की ठंड की आगोश में आ गया। जिले भर में चल रही शीतलहरी ने लोगों के हाड़ तक कंपा दिए। गर्म कपड़ों से पूरे बदन को ढककर लोगों ने नया साल मनाने के लिए सड़कों पर निकलना चाहा, लेकिन ठंड ने उन्हें घरों में दुबकने के लिए मजबूर कर दिया। लोगों को गर्म कपड़ों में भी राहत नहीं मिली तो वह घरों में अलाव तापते रहे या रजाई में लिपटे नजर आए। मौसम विभाग के आंकड़ों पर जाएं तो पारा दिनभर दस और 11 डिग्री पर रहा। धूप न निकलने और सर्द हवाओं के चलने से ठंड पूरे जोर पर है। कड़ाके की ठंड से रविवार को जनजीवन पूरी तरह प्रभावित दिखा तो कस्बों और गांवों की सड़कों पर सन्नाटा छाया रहा। इसका असर मवेशियों पर भी तेजी से पड़ रहा है। पशुपालकों की माने तो ठंड से मवेशी दूध कम कर दे रहे हैं।
फसलों पर भी ठंड का दिखने लगा असर
कड़ाके की ठंड ने जनमानस को तो घरों में कैद ही कर दिया, फसलों की रौनक भी छीन रहा है। खेतों में बोई गई आलू की पछेती खेती धूप न निकलने से ठंड के साथ पड़ रही कोहरे की बूंदे पौधों को झुलसा रहीं हैं। आलू के अलावा सरसों और अरहर की फसलें भी फूल पर हैं। कड़ाके की ठंड और कोहरा से झुलस कर सरसों व अरहर के फूल बगैर परागण के ही गिर रहे हैं। इससे फली लगने में कमी आना तय है। नष्ट हो रही फसलों को देख किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीरें दिखने लगी हैं।
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चौराहों पर नहीं जल रहे अलाव
ठंड बढ़ने से सबसे बुरा हाल हाल विक्रम, अप्पे और बस से सफर करने वाले लोगों का है। चौराहों पर पहुंचते ही वह अलाव की तलाश में भटकने लगते हैं। अलाव न मिलने पर वह चाय पीने के बहाने भट्ठियों में हाथ सेंकने को मजबूर हो रहे हैं। मुख्यालय मंझनपुर हो या सैनी रोडवेज बस स्टाफ कहीं भी अलाव नहीं नजर आ रहा है।
नगर पंचायतों व प्रमुख चौराहों पर अलाव के लिए तीनों तहसीलों में डेढ़ लाख की लकड़ी खरीदी गई थी। तहसील प्रशासन को इसे चिह्नित स्थान पर जलवाने का निर्देश दिया गया था। जहां जरूरत है, वहां ठंड को देखते हुए अलाव जलवाए जाएंगे।
आरके श्रीवास्तव, एडीएम
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नव वर्ष की पहली सुबह में दोआबा कड़ाके की ठंड की आगोश में आ गया। जिले भर में चल रही शीतलहरी ने लोगों के हाड़ तक कंपा दिए। गर्म कपड़ों से पूरे बदन को ढककर लोगों ने नया साल मनाने के लिए सड़कों पर निकलना चाहा, लेकिन ठंड ने उन्हें घरों में दुबकने के लिए मजबूर कर दिया। लोगों को गर्म कपड़ों में भी राहत नहीं मिली तो वह घरों में अलाव तापते रहे या रजाई में लिपटे नजर आए। मौसम विभाग के आंकड़ों पर जाएं तो पारा दिनभर दस और 11 डिग्री पर रहा। धूप न निकलने और सर्द हवाओं के चलने से ठंड पूरे जोर पर है। कड़ाके की ठंड से रविवार को जनजीवन पूरी तरह प्रभावित दिखा तो कस्बों और गांवों की सड़कों पर सन्नाटा छाया रहा। इसका असर मवेशियों पर भी तेजी से पड़ रहा है। पशुपालकों की माने तो ठंड से मवेशी दूध कम कर दे रहे हैं।
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फसलों पर भी ठंड का दिखने लगा असर
कड़ाके की ठंड ने जनमानस को तो घरों में कैद ही कर दिया, फसलों की रौनक भी छीन रहा है। खेतों में बोई गई आलू की पछेती खेती धूप न निकलने से ठंड के साथ पड़ रही कोहरे की बूंदे पौधों को झुलसा रहीं हैं। आलू के अलावा सरसों और अरहर की फसलें भी फूल पर हैं। कड़ाके की ठंड और कोहरा से झुलस कर सरसों व अरहर के फूल बगैर परागण के ही गिर रहे हैं। इससे फली लगने में कमी आना तय है। नष्ट हो रही फसलों को देख किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीरें दिखने लगी हैं।
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चौराहों पर नहीं जल रहे अलाव
ठंड बढ़ने से सबसे बुरा हाल हाल विक्रम, अप्पे और बस से सफर करने वाले लोगों का है। चौराहों पर पहुंचते ही वह अलाव की तलाश में भटकने लगते हैं। अलाव न मिलने पर वह चाय पीने के बहाने भट्ठियों में हाथ सेंकने को मजबूर हो रहे हैं। मुख्यालय मंझनपुर हो या सैनी रोडवेज बस स्टाफ कहीं भी अलाव नहीं नजर आ रहा है।
नगर पंचायतों व प्रमुख चौराहों पर अलाव के लिए तीनों तहसीलों में डेढ़ लाख की लकड़ी खरीदी गई थी। तहसील प्रशासन को इसे चिह्नित स्थान पर जलवाने का निर्देश दिया गया था। जहां जरूरत है, वहां ठंड को देखते हुए अलाव जलवाए जाएंगे।
आरके श्रीवास्तव, एडीएम