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Kaushambi News: गाय-भैंस में बढ़ते बांझपन से बढ़ गई पशुपालकों की आय पर संकट
Sat, 31 Jan 2026 01:05 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
Updated Sat, 31 Jan 2026 01:05 AM IST
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क्षेत्र में गाय और भैंस में गर्भधारण न होने की समस्या लगातार बढ़ती जा रही है, जिससे पशुपालक गंभीर परेशानी का सामना कर रहे हैं। पशु चिकित्सकों का कहना है कि यह समस्या अब केवल पोषण की कमी या गर्भाधान प्रक्रिया तक सीमित नहीं रही है। खेतों में उपयोग हो रहे कीटनाशक और रासायनिक खाद का असर चारे के माध्यम से पशुओं के शरीर में पहुंच रहा है, जिससे उनकी प्रजनन क्षमता प्रभावित हो रही है।
पशुपालन विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में बड़ी संख्या में पशु एनोएस्ट्रस (प्रजनन निष्क्रियता) और रिपीट ब्रीडर (अनुचित समय पर गर्भाधान) की श्रेणी में आ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि हरे चारे में कीटनाशक, खरपतवारनाशी और रासायनिक उर्वरकों के अवशेष, साथ ही दूषित पानी, पशुओं के हार्मोन सिस्टम को नुकसान पहुंचा रहे हैं। इससे हीट समय पर नहीं आती या गर्भ ठहर नहीं पाता।
पशु चिकित्सा अधिकारी कमलेश सिंह ने बताया कि रासायनिक अवशेष पशुओं के शरीर में धीरे-धीरे जहर का काम कर रहे हैं। उन्होंने पशुपालकों को सलाह दी कि वे रासायनिक छिड़काव के तुरंत बाद चारा न काटें, पशुओं को साफ पानी पिलाएं और रोजाना खनिज मिश्रण व नमक अवश्य दें। उन्होंने यह भी कहा कि प्रसव के बाद 30 से 45 दिन तक पशु की विशेष देखभाल और समय पर चिकित्सकीय जांच बेहद जरूरी है।
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पशुपालन विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में बड़ी संख्या में पशु एनोएस्ट्रस (प्रजनन निष्क्रियता) और रिपीट ब्रीडर (अनुचित समय पर गर्भाधान) की श्रेणी में आ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि हरे चारे में कीटनाशक, खरपतवारनाशी और रासायनिक उर्वरकों के अवशेष, साथ ही दूषित पानी, पशुओं के हार्मोन सिस्टम को नुकसान पहुंचा रहे हैं। इससे हीट समय पर नहीं आती या गर्भ ठहर नहीं पाता।
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पशु चिकित्सा अधिकारी कमलेश सिंह ने बताया कि रासायनिक अवशेष पशुओं के शरीर में धीरे-धीरे जहर का काम कर रहे हैं। उन्होंने पशुपालकों को सलाह दी कि वे रासायनिक छिड़काव के तुरंत बाद चारा न काटें, पशुओं को साफ पानी पिलाएं और रोजाना खनिज मिश्रण व नमक अवश्य दें। उन्होंने यह भी कहा कि प्रसव के बाद 30 से 45 दिन तक पशु की विशेष देखभाल और समय पर चिकित्सकीय जांच बेहद जरूरी है।
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