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Kaushambi : यमुना नदी के बाढ़ से सैकड़ों एकड़ फसल जलमग्न, पुल से ढाई मीटर ऊपर बह रहा पानी

Sun, 15 Sep 2024 06:21 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, कौशाम्बी
अमर उजाला नेटवर्क, कौशाम्बी Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 15 Sep 2024 06:21 PM IST
सार

पहाड़ों पर हो रही बरसात से यमुना नदी उफान पर है। किलनहाई नदी पुल के ऊपर बाढ़ का पानी आने से मल्हीपुर, बेनपुर, कटैया, गड़ेरियन का पूरा, डिहवा के लोगों के आवागमन दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। मल्हीपुर गांव के उत्तर दिशा से आकर किलनहाई नदी यमुना नदी में मिलती है।

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Hundreds of acres of crops submerged due to flood of Yamuna river, water flowing two and a half meters above t
किलनहाई नदी रपटा पुल पर बाढ़ के पानी से होकर गुजरते वाहन। - फोटो : संवाद

विस्तार

चायल तहसील क्षेत्र में यमुना नदी का जलस्तर बढ़ने से रविवार को तराई में बोई गई सैकड़ोंं एकड़ फसल डूब गई। हालत यह है कि शाम तीन बजे तक चकपिंहा गांव स्थित किलनहाई नदी रपटा पुल से ढाई फीट ऊपर बाढ़ का पानी बहने लगा है। इससे के अवगमन में लोगों की दुश्वारियां बढ़ गई हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जलस्तर और बढ़ने पर मवेशियों के लिए संकट खड़ा  हो जाएगा। हालाकि प्रशासनिक अधिकारी और राजस्वकर्मी को यमुना नदी के बढ़ रहे जल स्तर पर निगरानी रखे हुए हैं।

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पहाड़ों पर हो रही बरसात से यमुना नदी उफान पर है। किलनहाई नदी पुल के ऊपर बाढ़ का पानी आने से मल्हीपुर, बेनपुर, कटैया, गड़ेरियन का पूरा, डिहवा के लोगों के आवागमन दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। मल्हीपुर गांव के उत्तर दिशा से आकर किलनहाई नदी यमुना नदी में मिलती है। सैकड़ों गांव के बारिश का पानी इसी नदी से होकर यमुना नदी में पहुंचता है। वहीं यमुना नदी में बाढ़ आने पर उसका पानी उलट कर किलनहाई नदी में आ जाता है। इससे किसानों की फसल का अधिक नुकसान हुआ है।
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मल्हीपुर और कटैया गांव के महेश, बच्चन, जयकरन, लल्लन, राकेश, देवपत, अगफान अहमद, नंदे, दिनेश, शिवबाबू, रामबाबू, प्रेम, उमेश, शिवभान के मुताबिक ताराई क्षेत्र में बोई गई तिल, अरहर, ज्वार, बाजरा की सैकड़ो एकड़ फसल पूरी तरह से डूब चुकी है। हालात यही रहे तो उनके मवेशियों के लिए चारे का संकट पैदा हो जाएगा। जिस तेजी यमुना बढ़ी है, लोगों को अंदाजा नहीं था कि रात भर में नदी  उफान पर आ जाएगी। फिलहाल बढ़ रहा जलस्तर सुस्त पड़ गया है। इससे ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है।

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बाढ़ में कटैया गांव के बाहर डूबी फसल। - फोटो : संवाद

जलस्तर बढ़ने पर आवगमन के लिए लगानी पड़ेगी डोंगी

यमुना नदी का जल स्तर बढ़ने पर मल्हीपुर, बेनपुर, कटैया, डिहवा, गड़ेरियन का पूरा के लोगों के आवगमन के लिए किलनहाई नदी पुल पर डोंगी लगानी पड़ेगी। इन गांव के लोगों का आने जाने का मात्र यही एक रास्ता है। बाढ़ आने पर सबसे अधिक स्कूली बच्चों को होती है। वह नाव से नदी पार कर स्कूल पहुंचते हैं।

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किलनहाई नदी रपटा पुल पर बाढ़ के पानी से होकर गुजरते वाहन। - फोटो : संवाद

पुल निर्माण से आधा दर्जन गांव के लोगों को मिलेगी राहत

चकपिंहा गांव स्थित किलनहाई नदी की तलहटी में 20 फिट नीचे पांच ह्यूम पाईप लगाकर रपटा पुल बनाया गया है। जबकि ग्रामीण अरसे से नदी पर पुल निर्माण की मांग कर रहें हैं। हर साल यमुना नदी में बाढ़ आने पर कटैया, मल्हीपुर, डिहवा, गड़ेरियन का पुरवा, बेनपुर के 5000 लोगों को मुशीबत झेलनी पड़ती है।

मल्हीपुर के पूर्व प्रधान हीरालाल, देशराज, कटैया निवासी फरीद अहमद, अफगान और शकील अहमद ने बताया की साल 2013 में पानी छोड़े जाने से नदी में आई बाढ़ के दौरान सैकड़ों ग्रामीणों ने किलनहाई नदी पर पुल बनाने की मांग की थी। लेकिन प्रशासन ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। जबकि बाढ़ के दौरान संपर्क मार्ग कटने से स्कूली छात्र और छात्राओं को नांव के सहारे स्कूल आना जाना होता है। लोगो की रोजमर्रा की जरुरतो की खरीदारी के लिए बाजार आने जाने में मुशीबत उठानी पड़ती है। पुल निर्माण से इस मुशीबत से हमेशा के लिए निजात मिल जाएगी।

दो साल पहले बाढ़ में डूबी फसलों का नहीं मिला मुआवजा 

वर्ष 2022 में भी यमुना नदी में उफान आया था। उस समय भी किलनहाई नदी ने तबाही मचाया था। बाढ़ के पानी में तराई क्षेत्र के मल्हीपुर, कटैया, पिपरहटा, डिहवा, मोहम्मदाबाद आदि गांवों के सैकड़ों किसानों की हजारों बीघा दलहनी व तिलहनी फसलें डूबकर नष्ट हो गई थीं। तहसील प्रशासन की ओर से राजस्व टीम ने किसानों की खराब हुई फसलों के नुकसान का आंकलन कर रिपोर्ट शासन को भेजा था। कुछ किसानों को तो खराब फसल की मुआवजा राशि उनके खातों में आ गई, लेकिन कई किसान ऐसे भी हैं जो तहसील का चक्कर लगाते लगाते मायूस हो चुके हैं।

मल्हीपुर गांव के मोतीलाल, फूलचंद्र, पुरषोत्तम, रामचंद्र, रामप्रताप, राम समुंदर, श्यामलाल, राम बहादुर, रविचंद्र पिपरहटा के फूलचंद्र, जगदीश उमरवल गांव के पंचमलाल, रामबाबू कटैया के जुल्फिकार हुसैन अकबराबाद गांव के मूलचंद्र, सुकुरी देवी आदि किसानों के मुताबिक लेखपाल को कई बार खतौनी समेत जरूरी कागजात देने के बाद भी आज तक उन्हें बाढ़ में खराब हुई फसलों का मुआवजा नहीं मिला। मुआवजा राशि मिलने की आस में तहसील प्रशासन का चक्कर काटते हुए वह थक चुके हैं।

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