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हैंडपंपों का रीबोर करा सकेंगे प्रधान
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
Updated Tue, 23 May 2017 01:25 AM IST
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सूख्ाे हैंडपंप
- फोटो : अमर उजाला
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हैंडपंपों का रीबोर कराने के लिए अब शासन से बजट आने का इंतजार नहीं करना होगा। ग्राम सभा में पेयजल संकट को देखते हुए ग्राम प्रधान सामान्य व गहरे भू-गर्भ जल स्तर वाले क्षेत्र में राज्य व चौदहवें वित्त की धनराशि से बोरिंग करा सकते हैं। बोरिंग के लिए शासन ने 20 हजार से 39 हजार रुपए तक का इस्टीमेट भी निर्धारित कर दिया है।
जिले की 498 ग्राम सभाओं में ठप हैंडपंपों की संख्या पांच हजार पहुंच चुकी है। इन हैंडपंपों का रीबोर कराने के लिए शासन से जलनिगम व यूपी एग्रो द्वारा लगातार बजट की मांग की जा रही है। चार साल का लंबा समय बीतने के बाद भी हैंडपंपों के रीबोर का पैसा दोनों विभागों को नहीं मिल सका। अर्से से रीबोर न होने से हैंडपंपों के बंद होने की संख्या बढ़ने के साथ पेयजल समस्या भी विकराल रूप लेने लगी। इसे देखते हुए शासन ने राज्य वित्त व 14वें वित्त की रकम से बंद पड़े हैंडपंपों के रिबोर का आदेश जारी कर दिया है।
शासन का फरमान मिलने के बाद डीएम अखंड प्रताप सिंह ने सभी ग्राम प्रधानों व पंचायत सेक्रेट्रियों को अलग-अलग इस्टीमेट पर रीबोर कराने की छूट दे दी है। सामान्य भू-गर्भ जलस्तर वाले क्षेत्र में ग्राम सभाएं प्रति हैंडपंप 20 हजार 26 रुपए तो गहरे भू-गर्भ जल स्तर वाले क्षेत्रों में 39 हजार 965 रुपए खर्च कर सकेंगी।
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इस आशय का निर्देश जिला पंचायत राज अधिकारी कमल किशोर ने सभी बीडीओ, एडीओ पंचायत, ग्राम प्रधानों व सचिवों को जारी कर दिया है। उन्होंने बताया कि ग्राम सभाएं अपने स्तर से दो लाख, एडीओ पंचायत स्तर से ढाई व इससे ऊपर के इस्टीमेट को जिला स्तर पर पास कराकर हैंडपंपों का रीबोर कर सकती हैं।
ग्रामीणों से बहाना नहीं कर सकेंगे प्रधान
डार्क जोन वाले ब्लॉकों की ग्राम सभाओं में पेयजल समस्या को देखते हुए अब प्रधान बजट का बहाना ग्रामीणों से नहीं बना सकेंगे। नए शासनादेश के बाद उन्हें हैंडपंपों के रीबोर की पूरी छूट दे दी गई है। ऐसे में अब ग्राम प्रधानों को उन स्थानों पर हैंडपंपों का रीबोर कराना ही होगा जहां पेयजल की विकराल समस्या है। इसमें किसी प्रकार की आनाकानी नहीं चल सकेगी।
नए शासनादेश के बाद ग्राम पंचायतों को हैंडपंपों के रीबोर की छूट दे दी गई है। ग्राम पंचायतें स्वत: दो लाख, एडीओ पंचायत स्तर से ढाई लाख व इससे ऊपर के इस्टीमेट को जिला स्तरीय अधिकारियों से पास कराकर हैंडपंपों का रिबोर करा सकते हैं।
कमल किशोर, डीपीआरओ
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जिले की 498 ग्राम सभाओं में ठप हैंडपंपों की संख्या पांच हजार पहुंच चुकी है। इन हैंडपंपों का रीबोर कराने के लिए शासन से जलनिगम व यूपी एग्रो द्वारा लगातार बजट की मांग की जा रही है। चार साल का लंबा समय बीतने के बाद भी हैंडपंपों के रीबोर का पैसा दोनों विभागों को नहीं मिल सका। अर्से से रीबोर न होने से हैंडपंपों के बंद होने की संख्या बढ़ने के साथ पेयजल समस्या भी विकराल रूप लेने लगी। इसे देखते हुए शासन ने राज्य वित्त व 14वें वित्त की रकम से बंद पड़े हैंडपंपों के रिबोर का आदेश जारी कर दिया है।
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शासन का फरमान मिलने के बाद डीएम अखंड प्रताप सिंह ने सभी ग्राम प्रधानों व पंचायत सेक्रेट्रियों को अलग-अलग इस्टीमेट पर रीबोर कराने की छूट दे दी है। सामान्य भू-गर्भ जलस्तर वाले क्षेत्र में ग्राम सभाएं प्रति हैंडपंप 20 हजार 26 रुपए तो गहरे भू-गर्भ जल स्तर वाले क्षेत्रों में 39 हजार 965 रुपए खर्च कर सकेंगी।
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इस आशय का निर्देश जिला पंचायत राज अधिकारी कमल किशोर ने सभी बीडीओ, एडीओ पंचायत, ग्राम प्रधानों व सचिवों को जारी कर दिया है। उन्होंने बताया कि ग्राम सभाएं अपने स्तर से दो लाख, एडीओ पंचायत स्तर से ढाई व इससे ऊपर के इस्टीमेट को जिला स्तर पर पास कराकर हैंडपंपों का रीबोर कर सकती हैं।
ग्रामीणों से बहाना नहीं कर सकेंगे प्रधान
डार्क जोन वाले ब्लॉकों की ग्राम सभाओं में पेयजल समस्या को देखते हुए अब प्रधान बजट का बहाना ग्रामीणों से नहीं बना सकेंगे। नए शासनादेश के बाद उन्हें हैंडपंपों के रीबोर की पूरी छूट दे दी गई है। ऐसे में अब ग्राम प्रधानों को उन स्थानों पर हैंडपंपों का रीबोर कराना ही होगा जहां पेयजल की विकराल समस्या है। इसमें किसी प्रकार की आनाकानी नहीं चल सकेगी।
नए शासनादेश के बाद ग्राम पंचायतों को हैंडपंपों के रीबोर की छूट दे दी गई है। ग्राम पंचायतें स्वत: दो लाख, एडीओ पंचायत स्तर से ढाई लाख व इससे ऊपर के इस्टीमेट को जिला स्तरीय अधिकारियों से पास कराकर हैंडपंपों का रिबोर करा सकते हैं।
कमल किशोर, डीपीआरओ