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किसान का बेटा बना कृषि वैज्ञानिक
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चायल तहसील के अरई सुमेरपुर गांव की मिट्टी में पले-बढ़े किसान के बेटे का पंजाब कृषि विश्वविद्यालय लुधियाना में वैज्ञानिक (बीज उत्पादन) पद पर चयन हुआ है। प्रतिभाशाली युवा वैज्ञानिक डॉ. मनीष कुशवाहा की उपलब्धि पर गांव ही नहीं बल्कि पूरे जनपद में हर्ष है।
अरई सुमेरपुर निवासी राम नारायण मौर्य खेती किसानी कर परिवार का गुजारा करते हैं। उनके चार बेटों में बड़े अवधेश और तीसरे नंबर के मुकेश ठेकेदारी करते हैं। जबकि दूसरे नंबर का बेटा बृजेश कुमार फतेहपुर के जीजीआईसी में शिक्षक हैं।
सबसे छोटे बेटे डॉ. मनीष कुशवाहा का हाल ही में पंजाब कृषि विश्वविद्यालय लुधियाना में कृषि वैज्ञानिक (बीज उत्पादन) के रूप में चयन हुआ है। डॉ. मनीष की शुरुआती पढ़ाई जिले के ही लखपति देवी इंटर कॉलेज बिरौली से हुई। प्रारंभिक शिक्षा ग्रहण करने के बाद मनीष ने हाईस्कूल और इंटरमीडिएट कुल भास्कर आश्रम मेडिकल कॉलेज प्रयागराज से किया।
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स्नातक की उपाधि चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय कानपुर से ली। इसके बाद परास्नातक और पीएचडी की डिग्री राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान करनाल हरियाणा से प्राप्त की। करनाल के इसी विश्वविद्यालय से 2016-2020 के बीच शोध व शैक्षणिक कार्य किया और यूजीसी से छात्रवृत्ति प्राप्त कर पीएचडी उपाधि प्राप्त की। इसके बाद डॉ. मनीष ने शहरी कंपोस्ट पर शोध किया।
डॉ. मनीष कुशवाहा के चयन से जहां परिवार और गांव के लोेगों में खुशी का माहौल है, वहीं रिश्तेदार एवं साथी डॉ. मनीष को बधाई देते नहीं थक रहे हैं।
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अरई सुमेरपुर निवासी राम नारायण मौर्य खेती किसानी कर परिवार का गुजारा करते हैं। उनके चार बेटों में बड़े अवधेश और तीसरे नंबर के मुकेश ठेकेदारी करते हैं। जबकि दूसरे नंबर का बेटा बृजेश कुमार फतेहपुर के जीजीआईसी में शिक्षक हैं।
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सबसे छोटे बेटे डॉ. मनीष कुशवाहा का हाल ही में पंजाब कृषि विश्वविद्यालय लुधियाना में कृषि वैज्ञानिक (बीज उत्पादन) के रूप में चयन हुआ है। डॉ. मनीष की शुरुआती पढ़ाई जिले के ही लखपति देवी इंटर कॉलेज बिरौली से हुई। प्रारंभिक शिक्षा ग्रहण करने के बाद मनीष ने हाईस्कूल और इंटरमीडिएट कुल भास्कर आश्रम मेडिकल कॉलेज प्रयागराज से किया।
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स्नातक की उपाधि चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय कानपुर से ली। इसके बाद परास्नातक और पीएचडी की डिग्री राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान करनाल हरियाणा से प्राप्त की। करनाल के इसी विश्वविद्यालय से 2016-2020 के बीच शोध व शैक्षणिक कार्य किया और यूजीसी से छात्रवृत्ति प्राप्त कर पीएचडी उपाधि प्राप्त की। इसके बाद डॉ. मनीष ने शहरी कंपोस्ट पर शोध किया।
डॉ. मनीष कुशवाहा के चयन से जहां परिवार और गांव के लोेगों में खुशी का माहौल है, वहीं रिश्तेदार एवं साथी डॉ. मनीष को बधाई देते नहीं थक रहे हैं।