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तुर्की में हुए आतंकी हमले में मौत का शिकार हुए थे आबिस रिजवी
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
Updated Tue, 03 Jan 2017 11:43 PM IST
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पांच दिन से धूप नहीं निकलने से रबी की खेती पर संकट मंडराने लगा है। धूप न खिलने से फसलों में पाले और कोहरे से होने वाले रोगों का असर होने लगा है। इसकी रोकथाम के लिए किसानों को उपाय नहीं सूझ रहे हैं। कोहरा और ठंड से नष्ट हो रही फसलों को देख दोआबा के किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंचने लगी हैं।
बेमौसम बारिश, सूखे का दंश भुगतने के बाद अब कोहरा और कड़ाके की ठंड फसलों को भारी नुकसान पहुंचा रही है। दो साल से लगातार प्रकृति की मार झेल रहे किसानों का बुरा हाल है। जिले में इस साल रबी की खेती अच्छी दिख रही थी। समय पर ठंड शुरू होने से खेतों में आलू, सरसों, अरहर व चने की अच्छी फसलें आई हैं। इससे किसान पिछले नुकसान के भरपाई की उम्मीदें संजोए बैठा था, लेकिन पांच दिन से सूर्य भगवान के दर्शन न होने और कड़ाके की ठंड के साथ कोहरा छाने से गेहूं को छोड़ आलू, सरसों, अरहर और चना की फसलों को भारी नुकसान हो रहा है।
आलू में झुलसा रोग का प्रकोप होने लगा है तो सरसों में डहिया रोग लगने लगा है। इसी तरह सरसों और अरहर की फसलों में लगे फूलों पर पाले का प्रकोप साफ दिखने लगा है। कोहरे और पाले से रोगों का शिकार हो रही फसलों को देख किसानों को रास्ता नहीं सूझ रहा है। मौसम की मार से नष्ट हो रही फसलों को देख किसानों के चेहरे मुरझाने लगे हैं। सबसे बुरा हाल तो आलू के किसानों का है। नोटबंदी के चलते मंडी में छाई मंदी से वैसे भी हलाकान थे। ऐसे में अब कोहरे के चलते लग रहा झुलसा रोग रही सही कसर पूरी करता दिख रहा है। मौसम की मार से बर्बाद हो रही फसलों को देख किसानों का हाल बेहाल है।
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पाले से बचाव के लिए खेतों में नमी जरूरी
कोहरे और कड़ाके की ठंड के प्रकोप से फसलों को बचाने के लिए खेतों में नमी का होना बेहद जरूरी है। खेतों की सिंचाई कर नमी रखने से मौसम के कुप्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है। उप कृषि निदेशक ने जिले के किसानों को सलाह दी है कि वह आलू, अरहर और सरसों के खेतों की हर हाल में सिंचाई कर दें। इससे फसलों में मौसम के प्रभाव से होने वाले नुकसान को काफी हद तक रोकने में सफलता मिलेगी।
पांच दिन से लगातार धूप न खिलने और कड़ाके की ठंड के साथ कोहरा पड़ने से फसलों में रोगों की संभावना बढ़ी है। ऐसे में खेतों में नमी बनाकर और जरूरी दवाओं का छिड़काव करते हुए नुकसान से बचाया जा सकता है।
सत्येंद्र सिंह चौहान, डीडी एग्रीकल्चर
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बेमौसम बारिश, सूखे का दंश भुगतने के बाद अब कोहरा और कड़ाके की ठंड फसलों को भारी नुकसान पहुंचा रही है। दो साल से लगातार प्रकृति की मार झेल रहे किसानों का बुरा हाल है। जिले में इस साल रबी की खेती अच्छी दिख रही थी। समय पर ठंड शुरू होने से खेतों में आलू, सरसों, अरहर व चने की अच्छी फसलें आई हैं। इससे किसान पिछले नुकसान के भरपाई की उम्मीदें संजोए बैठा था, लेकिन पांच दिन से सूर्य भगवान के दर्शन न होने और कड़ाके की ठंड के साथ कोहरा छाने से गेहूं को छोड़ आलू, सरसों, अरहर और चना की फसलों को भारी नुकसान हो रहा है।
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आलू में झुलसा रोग का प्रकोप होने लगा है तो सरसों में डहिया रोग लगने लगा है। इसी तरह सरसों और अरहर की फसलों में लगे फूलों पर पाले का प्रकोप साफ दिखने लगा है। कोहरे और पाले से रोगों का शिकार हो रही फसलों को देख किसानों को रास्ता नहीं सूझ रहा है। मौसम की मार से नष्ट हो रही फसलों को देख किसानों के चेहरे मुरझाने लगे हैं। सबसे बुरा हाल तो आलू के किसानों का है। नोटबंदी के चलते मंडी में छाई मंदी से वैसे भी हलाकान थे। ऐसे में अब कोहरे के चलते लग रहा झुलसा रोग रही सही कसर पूरी करता दिख रहा है। मौसम की मार से बर्बाद हो रही फसलों को देख किसानों का हाल बेहाल है।
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पाले से बचाव के लिए खेतों में नमी जरूरी
कोहरे और कड़ाके की ठंड के प्रकोप से फसलों को बचाने के लिए खेतों में नमी का होना बेहद जरूरी है। खेतों की सिंचाई कर नमी रखने से मौसम के कुप्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है। उप कृषि निदेशक ने जिले के किसानों को सलाह दी है कि वह आलू, अरहर और सरसों के खेतों की हर हाल में सिंचाई कर दें। इससे फसलों में मौसम के प्रभाव से होने वाले नुकसान को काफी हद तक रोकने में सफलता मिलेगी।
पांच दिन से लगातार धूप न खिलने और कड़ाके की ठंड के साथ कोहरा पड़ने से फसलों में रोगों की संभावना बढ़ी है। ऐसे में खेतों में नमी बनाकर और जरूरी दवाओं का छिड़काव करते हुए नुकसान से बचाया जा सकता है।
सत्येंद्र सिंह चौहान, डीडी एग्रीकल्चर