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Kaushambi News: एक साल बाद भी नहीं हुई प्रधानों पर ठोस कार्रवाई
Thu, 06 Nov 2025 01:13 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
Updated Thu, 06 Nov 2025 01:13 AM IST
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जिले के कई ग्राम प्रधान बीते एक साल में वित्तीय अनियमितता और गबन के दोषी पाए गए हैं। इनके खिलाफ अब तक कोई ठोस कार्रवाई तक नहीं की गई गई है। जबकि इन ग्राम पंचायतों में तैनात रहे सचिवों को निलंबित कर जांच शुरू कर दी गई है।
पंचायती राज विभाग में प्रावधान है कि प्रधानों पर किसी प्रकार का आरोप लगता है तो इसकी जांच होगी। जांच सिद्ध होने के बाद प्रधान को पद से हटाने की कार्रवाई की जाएगी। बताया जा रहा है कि जिले में पंचायती राज विभाग प्रधानों के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर रहा है। जबकि आरोपों की जांच में दोषी साबित होने पर सचिवों पर कार्रवाई कर दी।
अधिनियम के प्रावधानों के मुताबिक, प्रधानों को पद से हटाकर तीन सदस्यीय समिति का गठन करना चाहिए। कुछ मामले में डीपीआरओ कार्यालय से ब्लॉकों के एडीओ पंचायत से रिपोर्ट मांगी गई लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। इसके बाद मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। फिर ब्लॉकों से सूची मिलने में महीनों का समय लगा। इस पर दोषी प्रधानों को बचाव के लिए न्यायालय जाने का अवसर मिल गया।
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केस-1 सरसंवा ब्लाॅक की उमरावां ग्राम पंचायत की प्रधान वंदना देवी व सचिव राजीव पाल और अमित सिंह को वित्तीय अनियमितता और गबन का दोषी पाया गया था। पूर्व डीएम मधुसूदन हुल्गी ने नौ अप्रैल 25 को आरोपियों के विरुद्ध कार्रवाई का आदेश दिया था। दोनों दोषी सचिव निलंबित कर दिए गए लेकिन नियम कानून को दरकिनार कर चौथी बार सरसवां में प्रभारी एडीओ पंचायत को सचिव की जिम्मेदारी दी गई। डीएम के आदेश के अनुपालन में ग्राम पंचायत सदस्यों की सूची समय से नहीं भेजी गई। इस लापरवाही का फायदा उठाकर प्रधान न्यायालय चली गईं।
केस-दो
- सरसंवा ब्लाॅक क्षेत्र की रायपुर ग्राम पंचायत के प्रधान अनूप कुमार ने राष्ट्रीय योजना सक्षम आंगनबाड़ी एवं पोषण मिशन 2.0 में मिली रकम हड़प लिया। प्राथमिक विद्यालय रायपुर परिसर में वित्तीय वर्ष 2023-24 में स्वीकृत आंगनबाडी केंद्र भवन का निर्माण अब तक नहीं कराया। पूर्व डीएम मधुसूदन हुल्गी ने 21 मई 2025 को प्रधान अनूप कुमार के विरुद्ध कारण बताओ नोटिस जारी कर स्वीकृत स्थल रायपुर में सात दिन के भीतर निर्माण कार्य आरंभ कराने का निर्देश दिया था। कार्य नहीं शुरू कराने पर डीपीआरओ अनिल कुमार सिंह को कार्रवाई का आदेश दिया। आरोप है कि डीपीआरओ ने फाइल दबा दी और छह महीने तक कोई कार्रवाई नहीं की। जबकि 25 अक्तूबर को दोषी सचिव मनोज कुमार सोनी को निलंबित कर दिया है। प्रधान का बचाव करते हुए एक बार फिर से 28 अक्तूबर को कारण बताओ नोटिस जारी करके कार्रवाई की रस्म पूरी कर ली गई है।
-- किसी प्रधान को नियम विरुद्ध नहीं बचाया जा रहा है। सचिव पर कार्रवाई करना आसान है। प्रधान जनता से चुनकर आता है। उसपर इतनी जल्दी कार्रवाई नहीं की जा सकती। उसके लिए तमाम मानक हैं। - अनिल कुमार सिंह, डीपीआरओ
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पंचायती राज विभाग में प्रावधान है कि प्रधानों पर किसी प्रकार का आरोप लगता है तो इसकी जांच होगी। जांच सिद्ध होने के बाद प्रधान को पद से हटाने की कार्रवाई की जाएगी। बताया जा रहा है कि जिले में पंचायती राज विभाग प्रधानों के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर रहा है। जबकि आरोपों की जांच में दोषी साबित होने पर सचिवों पर कार्रवाई कर दी।
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अधिनियम के प्रावधानों के मुताबिक, प्रधानों को पद से हटाकर तीन सदस्यीय समिति का गठन करना चाहिए। कुछ मामले में डीपीआरओ कार्यालय से ब्लॉकों के एडीओ पंचायत से रिपोर्ट मांगी गई लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। इसके बाद मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। फिर ब्लॉकों से सूची मिलने में महीनों का समय लगा। इस पर दोषी प्रधानों को बचाव के लिए न्यायालय जाने का अवसर मिल गया।
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केस-1 सरसंवा ब्लाॅक की उमरावां ग्राम पंचायत की प्रधान वंदना देवी व सचिव राजीव पाल और अमित सिंह को वित्तीय अनियमितता और गबन का दोषी पाया गया था। पूर्व डीएम मधुसूदन हुल्गी ने नौ अप्रैल 25 को आरोपियों के विरुद्ध कार्रवाई का आदेश दिया था। दोनों दोषी सचिव निलंबित कर दिए गए लेकिन नियम कानून को दरकिनार कर चौथी बार सरसवां में प्रभारी एडीओ पंचायत को सचिव की जिम्मेदारी दी गई। डीएम के आदेश के अनुपालन में ग्राम पंचायत सदस्यों की सूची समय से नहीं भेजी गई। इस लापरवाही का फायदा उठाकर प्रधान न्यायालय चली गईं।
केस-दो
- सरसंवा ब्लाॅक क्षेत्र की रायपुर ग्राम पंचायत के प्रधान अनूप कुमार ने राष्ट्रीय योजना सक्षम आंगनबाड़ी एवं पोषण मिशन 2.0 में मिली रकम हड़प लिया। प्राथमिक विद्यालय रायपुर परिसर में वित्तीय वर्ष 2023-24 में स्वीकृत आंगनबाडी केंद्र भवन का निर्माण अब तक नहीं कराया। पूर्व डीएम मधुसूदन हुल्गी ने 21 मई 2025 को प्रधान अनूप कुमार के विरुद्ध कारण बताओ नोटिस जारी कर स्वीकृत स्थल रायपुर में सात दिन के भीतर निर्माण कार्य आरंभ कराने का निर्देश दिया था। कार्य नहीं शुरू कराने पर डीपीआरओ अनिल कुमार सिंह को कार्रवाई का आदेश दिया। आरोप है कि डीपीआरओ ने फाइल दबा दी और छह महीने तक कोई कार्रवाई नहीं की। जबकि 25 अक्तूबर को दोषी सचिव मनोज कुमार सोनी को निलंबित कर दिया है। प्रधान का बचाव करते हुए एक बार फिर से 28 अक्तूबर को कारण बताओ नोटिस जारी करके कार्रवाई की रस्म पूरी कर ली गई है।