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चालीस मीटर तक हुई ड्रिलिंग, मिले नदी होने के संकेत
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Drilling done up to forty meters, signs of being a river found
- फोटो : KAUSHAMBI
विलुप्त सरस्वती नदी की खोज के लिए चायल के इछना गांव में डटी वैज्ञानिकों की टीम को चौथे दिन ड्रिलिंग में नदी होने के संकेत मिले हैं। बुधवार को 40 मीटर तक ड्रिलिंग कर बालू के नमूने लिए गए हैं। नदी के संकेत मिलने पर वैज्ञानिकों की टीम उत्साहित है।
चायल के इछना गांव में विलुप्त सरस्वती नदी की खोज में लगी वैज्ञानिकों की टीम को बुधवार को कुछ सफलता मिली। बुधवार को ड्रिलिंग के दौरान वैज्ञानिकों को नदी होने के संकेत मिले हैं।
इछना गांव में ड्रिलिंग के दौरान पैंतीस और चालीस मीटर के लिए गए नमूनों की प्रारंभिक जांच में यह सफलता मिली है। वैज्ञानिक डॉ. इमरान खान ने बताया कि बुधवार को तीस मीटर के बाद ड्रिलिंग कराई गई। जैसे ही ड्रिलिंग मशीन 35 मीटर तक पहुंची तभी अंदर से निकलने वाली बालू और रेत के कण कुछ अलग दिखाई दिए।
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उन्होंने बताया कि यह कण विलुप्त हुई पुरानी नदी के होने के संकेत दे रहे हैं। इसको लेकर वैज्ञानिकों की टीम उत्साहित है। डॉ. इमरान ने बताया कि नदी की उम्र और स्थिति का पता करने के लिए बालू और रेत के नमूनों को एन जीआरआई प्रयोगशाला हैदराबाद भेजा जाएगा। यहां पर ओएसएल डेटिंग के जरिये नदी की धारा और उम्र का पता लगाया जाएगा। यहां पर विलुप्त नदी कौन सी है? इसके लिए स्थानीय नदियों के बालू और रेत के कणों का मिलान भी कराया जाएगा।
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चायल के इछना गांव में विलुप्त सरस्वती नदी की खोज में लगी वैज्ञानिकों की टीम को बुधवार को कुछ सफलता मिली। बुधवार को ड्रिलिंग के दौरान वैज्ञानिकों को नदी होने के संकेत मिले हैं।
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इछना गांव में ड्रिलिंग के दौरान पैंतीस और चालीस मीटर के लिए गए नमूनों की प्रारंभिक जांच में यह सफलता मिली है। वैज्ञानिक डॉ. इमरान खान ने बताया कि बुधवार को तीस मीटर के बाद ड्रिलिंग कराई गई। जैसे ही ड्रिलिंग मशीन 35 मीटर तक पहुंची तभी अंदर से निकलने वाली बालू और रेत के कण कुछ अलग दिखाई दिए।
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उन्होंने बताया कि यह कण विलुप्त हुई पुरानी नदी के होने के संकेत दे रहे हैं। इसको लेकर वैज्ञानिकों की टीम उत्साहित है। डॉ. इमरान ने बताया कि नदी की उम्र और स्थिति का पता करने के लिए बालू और रेत के नमूनों को एन जीआरआई प्रयोगशाला हैदराबाद भेजा जाएगा। यहां पर ओएसएल डेटिंग के जरिये नदी की धारा और उम्र का पता लगाया जाएगा। यहां पर विलुप्त नदी कौन सी है? इसके लिए स्थानीय नदियों के बालू और रेत के कणों का मिलान भी कराया जाएगा।