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Kaushambi News: मां ब्रह्मचारिणी के दरबार में भक्तों ने लगाई हाजिरी
Tue, 13 Oct 2026 12:29 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
Updated Tue, 13 Oct 2026 12:29 AM IST
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नवरात्र के दूसरे दिन मां शीतला के दरबार में दर्शन-पूजन के लिए लगी श्रद्धालुओं की लंबी कतार। संव
नवरात्र के दूसरे दिन सोमवार को 51 शक्तिपीठों में शामिल मां शीतला के दरबार में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने हाजिरी लगाई। भक्तों ने कड़ा के विभिन्न घाटों पर स्नान किया और मंदिर पहुंचकर विधिविधान से पूजा-अर्चना की। मां दुर्गा के ब्रह्मचारिणी स्वरूप की आराधना कर श्रद्धालुओं ने जीवन की बाधाएं दूर करने और परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की कामना की।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से साधक को तप, त्याग, धैर्य और आत्मबल की प्राप्ति होती है। मां के आशीर्वाद से कार्यों में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं। भक्तों ने मां को फूल, अक्षत और प्रसाद अर्पित कर सुखी जीवन की कामना की। मान्यता है कि भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए माता पार्वती ने कठोर तपस्या की थी। मां ब्रह्मचारिणी को उमा, अपर्णा और तपश्चारिणी नामों से भी जाना जाता है।
नवरात्र मेले में श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए प्रशासन की ओर से सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए। मंदिर परिसर और मेला क्षेत्र में पुलिस बल तैनात रहा। कड़ाधाम थानाध्यक्ष महेश सिंह पुलिस टीम के साथ समय-समय पर मंदिर और मेला क्षेत्र का निरीक्षण करते रहे, ताकि श्रद्धालुओं को दर्शन-पूजन में परेशानी न हो।
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धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से साधक को तप, त्याग, धैर्य और आत्मबल की प्राप्ति होती है। मां के आशीर्वाद से कार्यों में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं। भक्तों ने मां को फूल, अक्षत और प्रसाद अर्पित कर सुखी जीवन की कामना की। मान्यता है कि भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए माता पार्वती ने कठोर तपस्या की थी। मां ब्रह्मचारिणी को उमा, अपर्णा और तपश्चारिणी नामों से भी जाना जाता है।
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नवरात्र मेले में श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए प्रशासन की ओर से सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए। मंदिर परिसर और मेला क्षेत्र में पुलिस बल तैनात रहा। कड़ाधाम थानाध्यक्ष महेश सिंह पुलिस टीम के साथ समय-समय पर मंदिर और मेला क्षेत्र का निरीक्षण करते रहे, ताकि श्रद्धालुओं को दर्शन-पूजन में परेशानी न हो।
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