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Kaushambi News: फालसे की बढ़ी डिमांड, मुंबई-नागपुर तक पहुंच रही मिठास
Tue, 19 May 2026 12:42 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
Updated Tue, 19 May 2026 12:42 AM IST
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मजदूरों के साथ फालसे की तुड़ाई करते चायल निवासी राजेंद्र सोनकर। संवाद
दोआबा का फालसा अब सिर्फ स्थानीय बाजारों तक सीमित नहीं रहा। कौशाम्बी के बागों से निकलने वाला खट्टा-मीठा फालसा अब मुम्बई और नागपुर जैसे महानगरों तक पहुंचकर अपनी अलग पहचान बना रहा है। गर्मी बढ़ने के साथ इसकी मांग में तेजी आई है।
सैनी क्षेत्र के निहालपुर गांव निवासी संतोष सोनकर ने बतया कि जिले के चायल, नेवादा, मूरतगंज, सिराथू, कोखराज, कड़ा और अजुहा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर फालसे की खेती और बागवानी की जा रही है।
हर साल किराये पर बाग लेकर फालसे का कारोबार करता हूं। तैयार फालसे को प्रयागराज के मुंडेरा मंडी भेजा जाता है, जहां से आढ़तियों के माध्यम से इसकी सप्लाई मुंबई और नागपुर तक की जाती है। -राजेंद्र सोनकर, चायल निवासी कारोबारी
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फालसे के कारोबार से हर सीजन में तीन से चार लाख रुपये तक की आमदनी हो जाती है। इस बार गर्मी अधिक होने और मांग बढ़ने से कारोबारियों को बेहतर दाम मिल रहे हैं।-महेंद्र कुमार, कूड़ापुर निवासी किसान
सेहत के लिए भी फायदेमंद
बैगनी रंग का छोटा सा फालसा स्वाद के साथ सेहत का भी खजाना माना जाता है। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. हरिओम कुमार सिंह बताते हैं कि फासले में कैल्शियम, मैग्नीशियम, पोटैशियम, आयरन, प्रोटीन और विटामिन-सी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। यह हड्डियों को मजबूत करने, पाचन तंत्र बेहतर रखने और शरीर को ऊर्जा देने में मददगार होता है। गर्मी में इसका सेवन शरीर को ठंडक पहुंचाने और लू से बचाव में सहायक बताया जाता है।
80 से 150 रुपये किलो बिक रहा फालसा
इन दिनों स्थानीय बाजारों में फालसा 80 से 150 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है। कस्बों और गांवों में ठेलों पर यह 20 से 50 रुपये पाव तक आसानी से उपलब्ध है। मांग बढ़ने के साथ कई बाजारों में इसके दाम लगातार बढ़ रहे हैं।
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सैनी क्षेत्र के निहालपुर गांव निवासी संतोष सोनकर ने बतया कि जिले के चायल, नेवादा, मूरतगंज, सिराथू, कोखराज, कड़ा और अजुहा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर फालसे की खेती और बागवानी की जा रही है।
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हर साल किराये पर बाग लेकर फालसे का कारोबार करता हूं। तैयार फालसे को प्रयागराज के मुंडेरा मंडी भेजा जाता है, जहां से आढ़तियों के माध्यम से इसकी सप्लाई मुंबई और नागपुर तक की जाती है। -राजेंद्र सोनकर, चायल निवासी कारोबारी
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फालसे के कारोबार से हर सीजन में तीन से चार लाख रुपये तक की आमदनी हो जाती है। इस बार गर्मी अधिक होने और मांग बढ़ने से कारोबारियों को बेहतर दाम मिल रहे हैं।-महेंद्र कुमार, कूड़ापुर निवासी किसान
सेहत के लिए भी फायदेमंद
बैगनी रंग का छोटा सा फालसा स्वाद के साथ सेहत का भी खजाना माना जाता है। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. हरिओम कुमार सिंह बताते हैं कि फासले में कैल्शियम, मैग्नीशियम, पोटैशियम, आयरन, प्रोटीन और विटामिन-सी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। यह हड्डियों को मजबूत करने, पाचन तंत्र बेहतर रखने और शरीर को ऊर्जा देने में मददगार होता है। गर्मी में इसका सेवन शरीर को ठंडक पहुंचाने और लू से बचाव में सहायक बताया जाता है।
80 से 150 रुपये किलो बिक रहा फालसा
इन दिनों स्थानीय बाजारों में फालसा 80 से 150 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है। कस्बों और गांवों में ठेलों पर यह 20 से 50 रुपये पाव तक आसानी से उपलब्ध है। मांग बढ़ने के साथ कई बाजारों में इसके दाम लगातार बढ़ रहे हैं।