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कुपोषण मिटाने को 60 दिनों की मोहलत
अमर उजाला ब्यूरो, काैश्ाांबी
Updated Fri, 26 Jun 2015 01:18 AM IST
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मंझनपुर (ब्यूरो)। कुपोषण की समस्या दोआबा को स्वस्थ बनाने के सपने को चिढ़ा रही है। अफसरों और कर्मचारियों को मिलकर कुपोषण के खिलाफ लड़ाई लड़नी होगी। इसके लिए समाज के लोगों को जागरूक करने की जरूरत है। किसी भी हाल में 60 दिन के भीतर जिले से कुपोषण का खात्मा करना होगा। यह बातें सीडीओ धीरेन्द्र सिंह सचान ने बृहस्पतिवार को कलेक्ट्रेट के सम्राट उदयन सभागार में आयोजित पोषण स्वास्थ्य समिति की बैठक में कहीं। बतादें के जिले में कुपोषित बच्चों और महिलाओं की संख्या दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। स्वास्थ्य विभाग के ही आंकड़ों को देखें तो जिले में करीब 35 सौ बच्चे अतिकुपोषित हैं। हालांकि अधिकारियों की मानें तो अभियान शुरू करने के बाद से कुपोषण की समस्या में कमी आने लगी है।
मगर हालात अभी संतोषजनक नहीं है। इसे लेकर परेशान अफसरों ने कुपोषण के खात्मे के लिए मुहिम छेड़ दी है। इसी क्रम में जहां बुधवार से ब्लाकवार कार्यशाला आयोजित की जा रही है वहीं बृहस्पतिवार को सीडीओ धीरेन्द्र सिंह सचान ने कलेक्ट्रेट के सम्राट उदयन सभागार में पोषण स्वास्थ्य समिति की बैठक ली। उन्होंने डीपीओ को निर्देश दिया कि हर महीने के बुधवार और शनिवार को गांवों में मनाए जाने वाले ग्राम स्वास्थ्य पोषण दिवस कार्यक्रम में आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों, एएनएम, आशाओं की उपस्थिति सुनिश्चित की जाए। सीएमओ से कहाकि वह आंगनबाड़ी केन्द्रों पर यूरिन टेस्ट, वजन नापने आदि की किट पहुंचाने की व्यवस्था करें। अल्टीमेटम दिया कि किसी भी केन्द्र में असुविधा की शिकायत मिली तो कार्रवाई की जाएगी। सीडीओ ने डीएसओ को कुपोषित परिवारों के लिए खाद्यान्न, जल निगम के एक्सईएन को स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था कराने का निर्देश दिया। इसके अलावा डीपीआरओ को कुपोषितों के घरों में शौचालय का निर्माण कराने का भी निर्देश दिया है। मुख्य विकास अधिकारी ने पोषण समिति में शामिल अधिकारियों को गांवों की गंदगी और गर्भवती महिलाओं, बच्चों के खानपान पर ध्यान देने की भी हिदायत दी। उन्होंने अफसरों से सवाल-जवाब भी किया।
इस दौरान डीपीओ ने बताया कि पहले अति कुपोषितों की संख्या जिले में 3578 थी। पिछले कुछ दिनों के भीतर इसमें काफी कमी आई है। उन्होंने दावा किया कि अब जनपद में 1343 अतिकुपोषित महिलाएं और बच्चे ही बचे हैं। हालांकि इस उपलब्धि से सीडीओ बहुत ज्यादा संतुष्ट नहीं हुए। उन्होंने अफसरों को स्पष्ट चेतावनी दी कि दो महीने में कुपोषितों की संख्या शून्य होनी चाहिए। इसके बाद जिस भी गांव में कुपोषित महिलाएं और बच्चे मिलेंगे उस गांव को गोद लेने वाले अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की दी जाएगी। इस मौके पर सीएमओ डॉ. राजकुमार, डीएसओ अखिल कुमार सिंह, डीपीओ राकेश मिश्रा, सीएमएस समेत पोषण समिति में शामिल सभी अधिकारी मौजूद रहे।
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मगर हालात अभी संतोषजनक नहीं है। इसे लेकर परेशान अफसरों ने कुपोषण के खात्मे के लिए मुहिम छेड़ दी है। इसी क्रम में जहां बुधवार से ब्लाकवार कार्यशाला आयोजित की जा रही है वहीं बृहस्पतिवार को सीडीओ धीरेन्द्र सिंह सचान ने कलेक्ट्रेट के सम्राट उदयन सभागार में पोषण स्वास्थ्य समिति की बैठक ली। उन्होंने डीपीओ को निर्देश दिया कि हर महीने के बुधवार और शनिवार को गांवों में मनाए जाने वाले ग्राम स्वास्थ्य पोषण दिवस कार्यक्रम में आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों, एएनएम, आशाओं की उपस्थिति सुनिश्चित की जाए। सीएमओ से कहाकि वह आंगनबाड़ी केन्द्रों पर यूरिन टेस्ट, वजन नापने आदि की किट पहुंचाने की व्यवस्था करें। अल्टीमेटम दिया कि किसी भी केन्द्र में असुविधा की शिकायत मिली तो कार्रवाई की जाएगी। सीडीओ ने डीएसओ को कुपोषित परिवारों के लिए खाद्यान्न, जल निगम के एक्सईएन को स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था कराने का निर्देश दिया। इसके अलावा डीपीआरओ को कुपोषितों के घरों में शौचालय का निर्माण कराने का भी निर्देश दिया है। मुख्य विकास अधिकारी ने पोषण समिति में शामिल अधिकारियों को गांवों की गंदगी और गर्भवती महिलाओं, बच्चों के खानपान पर ध्यान देने की भी हिदायत दी। उन्होंने अफसरों से सवाल-जवाब भी किया।
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इस दौरान डीपीओ ने बताया कि पहले अति कुपोषितों की संख्या जिले में 3578 थी। पिछले कुछ दिनों के भीतर इसमें काफी कमी आई है। उन्होंने दावा किया कि अब जनपद में 1343 अतिकुपोषित महिलाएं और बच्चे ही बचे हैं। हालांकि इस उपलब्धि से सीडीओ बहुत ज्यादा संतुष्ट नहीं हुए। उन्होंने अफसरों को स्पष्ट चेतावनी दी कि दो महीने में कुपोषितों की संख्या शून्य होनी चाहिए। इसके बाद जिस भी गांव में कुपोषित महिलाएं और बच्चे मिलेंगे उस गांव को गोद लेने वाले अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की दी जाएगी। इस मौके पर सीएमओ डॉ. राजकुमार, डीएसओ अखिल कुमार सिंह, डीपीओ राकेश मिश्रा, सीएमएस समेत पोषण समिति में शामिल सभी अधिकारी मौजूद रहे।
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