फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kaushambi News ›   rachana suside

आत्महत्या नहीं! सिस्टम ने की छात्रा की हत्या

Sun, 26 Mar 2017 12:32 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी Updated Sun, 26 Mar 2017 12:32 AM IST
विज्ञापन
rachana suside
क्राइम
छेड़खानी के बाद कार्रवाई न होने पर आत्महत्या करने वाली बीए की छात्रा रचना सिंह अबला नहीं थी, बल्कि वह लड़ना जानती थी। आरोपियों के खिलाफ कालेज के शिक्षकों को जानकारी देते हुए छात्रा ने परिजनों को पूरी घटना बताई थी। सूचना पिपरी पुलिस को भी दी गई थी। छात्रा को क्या पता था कि उसे इंसाफ तो मिलेगा नहीं, बल्कि हालात ऐसे पैदा किए जाएंगे कि अपने हाथों ही उसे अपनी हत्या भी करनी पड़ेगी। छात्रा के परिजनों को इस कदर प्रताड़ित किया गया कि वह टूट गई और फांसी के फंदे पर झूलने को मजबूर हो गई। घटना के बाद घर पर जुटे लोग यही कहते रहे कि छात्रा अपनी मौत के लिए जिम्मेदार नहीं है, बल्कि इसके लिए पिपरी थाने की पुलिस व मकदूमपुर चौकी पुलिस दोषी है। उसकी हत्या सिस्टम ने की है, उन पुलिस कर्मियों ने की है, जिन्होंने सच जानने के बाद कार्रवाई करने के बजाय उल्टे उसके परिजनों के खिलाफ एफआईआर लिखी थी।
विज्ञापन


   गांजा गांव की रचना सिंह रामभजन सिंह डिग्री कालेज सेवढ़ा में बीए द्वितीय वर्ष की परीक्षा दे रही थी। परीक्षा शुरू होते ही उसकी मुसीबत बढ़ गई थी। शेरपुर निवासी आशीष सिंह यादव पुत्र रामचंद्र व जितेंद्र सिंह यादव पुत्र रामनारायण सिंह उसकी आबरू के पीछे पड़े थे। वह लगातार उससे छेड़खानी कर रहे थे। गुरुवार को हद हो गई। सरेराह उससे छेड़खानी की तो उसने पलटकर जवाब भी दिया। इतना ही नहीं कालेज के शिक्षकों को सूचना देते हुए अपनी मां व चचेरे भाई आलोक सिंह व चाचा शिवपूजन सिंह को आपबीती बताई। पिपरी थाने परिजन गए। पुलिस से मांग की कि युवकों को बुलाकर कार्रवाई करें, नहीं तो किसी दिन बड़ी घटना हो सकती है। पुलिस ने मोबाइल नंबर लेकर परिजनों को वापस भेज दिया। शुक्रवार को छात्रा को इंसाफ देने के बजाय पुलिस ने अपना असली चेहरा दिखाया। आरोपी जितेंद्र सिंह की तहरीर पर छात्रा के चाचा शिवपूजन सिंह व चचेरे भाई आलोक सिंह के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया। वह भी छेड़खानी का। जितेंद्र ने छेड़खानी का आरोप लगाते हुए मारपीट की रिपोर्ट लिखाई थी। देर रात यह मामला लिखा गया।
विज्ञापन


अमूमन हर घटना की जांच करने वाली पुलिस ने आरोपी की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज करने में तनिक भी देर नहीं लगाई। शनिवार को इसकी जानकारी छात्रा को हुई तो वह रो पड़ी। पुलिस को कोसते हुए अंदर घुसी और फांसी पर लटक गई। परिजनों ने उसे आनन-फानन उतारकर बचाने की कोशिश की, लेकिन वह उसे बचा न सके। जिसके लिए परिजन इंसाफ मांग रहे थे, उसी की लाश उनके हाथों में थी। घटना से गांजा गांव के लोगों में जबर्दस्त गुस्सा है। वह इसके लिए पुलिस को ही जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि कार्रवाई होती तो रचना जिंदा होती।
विज्ञापन
विज्ञापन


कहां गई एंटी रोमियो टीम
सीएम बनते ही योगी आदित्यनाथ ने फरमान जारी किया था सभी जिलों में एंटी रोमियो टीम का गठन किया जाए। छेड़खानी की शिकायत मिलते ही तत्काल कार्रवाई करें। इसमें किसी तरह की ढिलाई न बरती जाए। सीएम का यह आदेश कौशाम्बी पुलिस के लिए बेमानी था। जिले में अब तक न तो एंटी रोमियो टीम का गठन हुआ। इसकी तैयारी चल ही रही थी कि शनिवार को समाज को झकझोर देने वाली घटना हुई। जिससे पूरा पुलिस महकमा हिल गया। छेड़खानी के बाद कार्रवाई न होने से क्षुब्ध रचना सिंह ने आत्महत्या कर ली तो पुलिस महकमा सक्रिय हुआ। फौरी पूछताछ के बाद ही इंस्पेक्टर व दरोगा को सस्पेंड कर दिया गया। विभागीय जांच शुरू करा दी गई। इतना ही नहीं आनन-फानन छात्रा के चाचा शिवपूजन सिंह की तहरीर पर मामला दर्ज कर आरोपियों को भी पुलिस ने धर दबोचा। यही काम यदि पुलिस ने पहले किया होता, युवकों को उठाकर थाने तक ही लाई होती तो शायद यह दिन न देखना पड़ता।
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed