फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kaushambi News ›   jail in kaushambi

जेल भेजे गए बंदी रक्षक, डिप्टी जेलर की जांच शुरू

Sun, 03 Jul 2016 12:23 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी Updated Sun, 03 Jul 2016 12:23 AM IST
विज्ञापन
jail in kaushambi
crime
 इलाज के बहाने जिला जेल से कैदी को घर ले जाने के मामले में दोनो बंदी रक्षकों को जेल भेज दिया गया है। मामले में सुर्खियों में छाए डिप्टी जेलर की भूमिका की जांच डीआईजी जेल ने शुरू कर दी है। इसकी जानकारी डिप्टी जेलर को लगी तो हड़कंप मच गया है।
विज्ञापन


हत्या के मामले में जिला जेल में बंद कैदी दीपक पांडेय को इलाज के बहाने जेल से बाहर निकाला गया। सूत्रों की माने तो जिला अस्पताल में उसका इलाज कराने के बहाने डिप्टी जेलर, दो बंदी रक्षक और एक सजायाफ्ता चंद पैसों की लालच में निजी वाहन में उसे लेकर हिसामबाद गांव पहुंच गए। गांव पहुंचने पर उसने डिप्टी जेलर और बंदी रक्षकों की घर के नीचे वाले कमरे में आवभगत शुरू कराई और खुद ऊपर के कमरे में पत्नी के पास चला गया।
विज्ञापन


पत्नी से मिलने के बाद वह घर के पिछवाड़े कूदकर फरार हो गया। बताते हैं कि घर से निकलने के बाद वह गांव में ही कहीं छिप गया। घंटे भर का समय बीतने के बाद जब डिप्टी जेलर ने कैदी की पत्नी से उसे भेजने को कहा तो जो उत्तर मिला उससे सब पसीना-पसीना हो गए। वहां से लौटने के बाद डिप्टी जेलर धीरेंद्र सिंह ने हाईप्रोफाइल ड्रामा रचा। हालांकि ड्रामे में उन्हें कुछ खास कामयाबी नहीं मिली। जिला अस्पताल के ओपीडी रजिस्टर में न तो कैदी का नाम दर्ज है और न ही किसी चिकित्सक ने उसका इलाज ही किया।
विज्ञापन
विज्ञापन


मामले में एसपी बीके मिश्र ने बंदी रक्षक सुनील और अवधेश के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराकर जेल भेजवा दिया लेकिन डिप्टी जेलर पर तीन दिन बाद भी शिकंजा नहीं कसा जा सका। मामले में डिप्टी जेलर की भूमिका संदिग्ध पाए जाने पर डीआईजी जेल संतोष कुमार श्रीवास्तव ने जांच शुरू कर दी है। उधर देर शाम कैदी फिर घर पहुंचा और रात भर रहा। भोर में नाव के सहारे वह यमुनापार हो गया। कुछ भी हो कैदी को उसके घर ले जाने के मामले में भले ही बंदी रक्षकों को जेल हो गई है पर कहीं न कहीं डिप्टी जेलर की भूमिका महत्वपूर्ण है।

 कैदी दीपक पांडेय घर की छत से कूदकर भागा है इसका प्रमाण कहीं ढूढ़ने की जरूरत नहीं है। यदि एक-दो दिन में वह पकड़ में आ जाता है तो उसके पैर में कूदते समय आई चोट राज खोलने के लिए पर्याप्त है। सूत्रों का कहना है कि पुलिस का बढ़ता दबाव देख वह शुक्रवार को महेवाघाट तक सरेंडर करने के लिए आया भी था लेकिन किसी के बहकावे में आकर फिर लौट गया। कुछ भी हो कैदी के पैर में आई चोट उसके छत से कूदकर भागने के प्रमाण के लिए पर्याप्त है।

 हिसामबाद गांव से फरार हुए कैदी के रहस्य का पर्दाफाश प्राइवेट बोलेरो चालक आसानी से कर देगा। जरूरत इस बात की है कि उसे थाने लाकर कड़ाई से पूछताछ की जाए। सूत्रों की माने तो घटना के बाद चालक कैदी के भागने के पूरे घटनाक्रम को चटखारे लेकर लोगों से बता रहा था। लेकिन जब उसे इस बात का पता चला कि कार्रवाई की जद में वह भी आ सकता है तो वह सकते में आ गया। मामले की असलियत से पर्दा उठाने के लिए महकमे के जिम्मेदारों को चालक तक पहुंचना होगा। बोलेरो चालक सदर कोतवाली से महज तीन किलोमीटर की दूरी पर स्थित एक गांव का बताया जा रहा है। उसने अपनी आंखों से पूरे खेल को न केवल देखा बल्कि गांव स्थित चौराहे पर कई लोगों को बताकर चटखारे भी लिए।  


घटना वाले दिन मैं छुट्टी पर था। कैदी के भागने की जानकारी फोन पर मिली। कैदी का जिला अस्पताल में न पहुंचना पूरे मामले को संदिग्ध बता रहा है। दोनो बंदी रक्षक जेल में बंद हैं। डिप्टी जेलर की भूमिका की जांच डीआईजी जेल द्वारा की जा रही है। जांच पूरी होने पर रहस्य से पर्दा उठ सकेगा।
एच आर दोहरे, जेल अधीक्षक कौशाम्बी
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed