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अपने ही बुने जाल में फंसे जेल अस्पताल चिकित्सक
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
Updated Thu, 07 Jul 2016 11:59 PM IST
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जिला जेल में बंद कैदी के फरारी कांड में चिकित्सक की भूमिका भी संदिग्ध है। वह अपने ही बुने जाल में फंसता दिखाई दे रहा है। मामले में कैदी को इलाज के लिए जिला जेल से जिला अस्पताल भेजे जाने के पूरे मामले में साजिश की बू आ रही है। कैदी की फरारी के मामले में जेल अस्पताल के चिकित्सक की मिलीभगत से इंकार नहीं किया जा सकता है। ऐसे में गहराई से छानबीन हुई तो जेल चिकित्सक की मामले में भूमिका क्या थी दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।
जिला जेल में बंद कैदी दीपक पांडेय फरारी कांड मामले में डिप्टी जेलर की भूमिका तो जगजाहिर हो गई है। डिप्टी जेलर की संलिप्तता को को देखते हुए एसपी वीके मिश्र ने मुकदमा दर्ज कराते हुए उनकी गिरफ्तारी के लिए दो टीमें गठित कर दी है लेकिन कैदी जिला अस्पताल के चिकित्सक की संस्तुति पर जिला अस्पताल ले जाया गया था उस ओर किसी की नजर ही नहीं गई। मामले में जब जेल चिकित्सक डॉ. हिंद प्रकाश मणि से फरार हुए बंदी की बीमारी के बावत पूछा गया तो पूरा मामला संदिग्ध नजर आने लगा। चिकित्सक ने बताया कि फरार हुए कैदी को चार माह से सिर दर्द रहता था। इसके चलते उसे जिला अस्पताल रेफर किया गया था।
इतना ही नहीं चिकित्सक का कहना है कि कैदी के जिला अस्पताल में उपचार के लिए उसने सीएमओ डॉ. यूबी सिंह से अनुमति भी ले रखी थी। चिकित्सक के इस बयान से कैदी के जिला अस्पताल रेफर का मामला उलझ गया है। जबकि मामले में सीएमओ का कहना है कि यदि अनुमति दी गई तो जेल के डाक्टर उस आदेश को लाकर दिखाएं। ऐेसे में दीपक फरारी कांड में जेल चिकित्सक और सीएमओ के अलग-अलग बयान ने मामले को उलझा दिया है। ऐसे में यदि जेल से जिला अस्पताल के बहाने बाहर भेजे गए कैदी के मामले में जिला जेल चिकित्सक की भूमिका की गहराई से जांच हो जाए तो इनका फंसना भी तय माना जा रहा है।
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कैदी को नहीं थी कोई गंभीर बीमारी
जिला जेल में बंद कैदी दीपक पांडेय को कोई गंभीर बीमारी नहीं थी। जेल में बंद रहने की वजह से उसके बदन और सिर में दर्द रहता था। ऐसा कहना है जेल चिकित्सक का। ऐसे में उसे जिला अस्पताल आखिर किस बीमारी का इलाज कराने के लिए भेजा गया है। यहां तक तो ठीक है। मामले में एक पेंच ये भी है कि जेल अस्पताल के चिकित्सक ने आठ जून को कैदी दीपक को जिला अस्पताल भेजने के लिए सीएमओ को पत्र भेजा था। चिकित्सक की मानें तो सीएमओ ने नौ जून को पत्र को संस्तुति भी दे दी है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि जब नौ जून को सीएमओ ने संस्तुति दे दी थी तो कैदी को 20 दिन बाद जिला अस्पताल के लिए क्यों रेफर किया गया। 20 दिन तक उसे जेल में क्यों रोके रखा गया। ऐसे में साफ है कि कहीं न कहीं जेल चिकित्सक भी कैदी फरारी मामले में संलिप्त हैं।
सीएमओ ने कहा नहीं दी गई संस्तुति
इलाज के बहाने घर ले जाए गए कैदी दीपक पांडेय के मामले में जिला जेल चिकित्सक की बात को सीएमओ डॉ. यूबी यादव पूरी तरह से खारिज कर रहे हैं। उनका कहना है कि उनसे फरार हुए कैदी का इलाज कराने के लिए कोई भी अनुमति नहीं मांगी गई थी। यदि जेल चिकित्सक को कैदी का इलाज कराने के लिए मेरे द्वारा कोई अनुमति दी गई है तो वह इस बावत जारी पत्र दिखाएं। सीएमओ और जेल चिकित्सक के बयान में कौन झूठ बोल रहा है यह तो जांच का विषय है पर इतना जरूर है कि दाल में कहीं कुछ तो काला है।
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जिला जेल में बंद कैदी दीपक पांडेय फरारी कांड मामले में डिप्टी जेलर की भूमिका तो जगजाहिर हो गई है। डिप्टी जेलर की संलिप्तता को को देखते हुए एसपी वीके मिश्र ने मुकदमा दर्ज कराते हुए उनकी गिरफ्तारी के लिए दो टीमें गठित कर दी है लेकिन कैदी जिला अस्पताल के चिकित्सक की संस्तुति पर जिला अस्पताल ले जाया गया था उस ओर किसी की नजर ही नहीं गई। मामले में जब जेल चिकित्सक डॉ. हिंद प्रकाश मणि से फरार हुए बंदी की बीमारी के बावत पूछा गया तो पूरा मामला संदिग्ध नजर आने लगा। चिकित्सक ने बताया कि फरार हुए कैदी को चार माह से सिर दर्द रहता था। इसके चलते उसे जिला अस्पताल रेफर किया गया था।
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इतना ही नहीं चिकित्सक का कहना है कि कैदी के जिला अस्पताल में उपचार के लिए उसने सीएमओ डॉ. यूबी सिंह से अनुमति भी ले रखी थी। चिकित्सक के इस बयान से कैदी के जिला अस्पताल रेफर का मामला उलझ गया है। जबकि मामले में सीएमओ का कहना है कि यदि अनुमति दी गई तो जेल के डाक्टर उस आदेश को लाकर दिखाएं। ऐेसे में दीपक फरारी कांड में जेल चिकित्सक और सीएमओ के अलग-अलग बयान ने मामले को उलझा दिया है। ऐसे में यदि जेल से जिला अस्पताल के बहाने बाहर भेजे गए कैदी के मामले में जिला जेल चिकित्सक की भूमिका की गहराई से जांच हो जाए तो इनका फंसना भी तय माना जा रहा है।
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कैदी को नहीं थी कोई गंभीर बीमारी
जिला जेल में बंद कैदी दीपक पांडेय को कोई गंभीर बीमारी नहीं थी। जेल में बंद रहने की वजह से उसके बदन और सिर में दर्द रहता था। ऐसा कहना है जेल चिकित्सक का। ऐसे में उसे जिला अस्पताल आखिर किस बीमारी का इलाज कराने के लिए भेजा गया है। यहां तक तो ठीक है। मामले में एक पेंच ये भी है कि जेल अस्पताल के चिकित्सक ने आठ जून को कैदी दीपक को जिला अस्पताल भेजने के लिए सीएमओ को पत्र भेजा था। चिकित्सक की मानें तो सीएमओ ने नौ जून को पत्र को संस्तुति भी दे दी है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि जब नौ जून को सीएमओ ने संस्तुति दे दी थी तो कैदी को 20 दिन बाद जिला अस्पताल के लिए क्यों रेफर किया गया। 20 दिन तक उसे जेल में क्यों रोके रखा गया। ऐसे में साफ है कि कहीं न कहीं जेल चिकित्सक भी कैदी फरारी मामले में संलिप्त हैं।
सीएमओ ने कहा नहीं दी गई संस्तुति
इलाज के बहाने घर ले जाए गए कैदी दीपक पांडेय के मामले में जिला जेल चिकित्सक की बात को सीएमओ डॉ. यूबी यादव पूरी तरह से खारिज कर रहे हैं। उनका कहना है कि उनसे फरार हुए कैदी का इलाज कराने के लिए कोई भी अनुमति नहीं मांगी गई थी। यदि जेल चिकित्सक को कैदी का इलाज कराने के लिए मेरे द्वारा कोई अनुमति दी गई है तो वह इस बावत जारी पत्र दिखाएं। सीएमओ और जेल चिकित्सक के बयान में कौन झूठ बोल रहा है यह तो जांच का विषय है पर इतना जरूर है कि दाल में कहीं कुछ तो काला है।