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एआरटीओ दफ्तर से पांच हजार में बिकता है डीएल
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
Updated Fri, 24 Mar 2017 12:38 AM IST
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कौशाम्बी
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एआरटीओ दफ्तर से कोई भी व्यक्ति ड्राइविंग लाइसेंस हासिल कर सकता है। इसके लिए पांच हजार रुपये कीमत चुकानी पड़ेगी। पांच हजार हाथ में आते ही दफ्तर के कर्मी व जिम्मेदार अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश नहीं करते हैं कि आवेदक का नाम व पता सही है अथवा फर्जी। भरवारी में रह रहे एक संदिग्ध ने रकम देकर लाइसेंस हासिल कर लिया है।
उप संभागीय परिवहन कार्यालय (एआरटीओ) से इसी माह 16 फरवरी को भरवारी के नेहरू नगर मोहल्ला मकान नंबर 12 निवासी अखिलेश पुत्र साहेबलाल को ड्राइविंग लाइसेंस जारी किया गया है। यह लाइसेंस लर्निंग का है। 15 अगस्त को इस लाइसेंस की वैधता खत्म हो जाएगी।
अखिलेश को जारी किए गए डीएल को लेकर एआरटीओ कार्यालय में सक्रिय एजेंटों के बीच तमाम तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। एजेंटों के बीच चर्चा थी कि अखिलेश बिहार का रहने वाला है तो कोई उसे जौनपुर का बता रहा था। अमर उजाला ने इसकी पड़ताल की तो भरवारी के नेहरू नगर में अखिलेश पुत्र साहेबलाल नाम का कोई शख्स नहीं मिला। अखिलेश नाम के दो युवक जरूर है, लेकिन इनके पिता का नाम दूसरा है। साथ ही डीएल में लगी फोटो भी उनसे नहीं मिलती है। एजेंटों का आरोप है कि पांच-पांच हजार रुपये लेकर कर्मचारी भीतरखाने लाइसेंस जारी कर रहे हैं।
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मामला संज्ञान में नहीं है। यदि ऐसा है तो इसकी विधिवत जांच कराई जाएगी। साथ ही फर्जी तरीके से लाइसेंस जारी कराने वाले के भी खिलाफ कार्रवाई कराएंगे।
शंकरजी सिंह, एआरटीओ
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उप संभागीय परिवहन कार्यालय (एआरटीओ) से इसी माह 16 फरवरी को भरवारी के नेहरू नगर मोहल्ला मकान नंबर 12 निवासी अखिलेश पुत्र साहेबलाल को ड्राइविंग लाइसेंस जारी किया गया है। यह लाइसेंस लर्निंग का है। 15 अगस्त को इस लाइसेंस की वैधता खत्म हो जाएगी।
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अखिलेश को जारी किए गए डीएल को लेकर एआरटीओ कार्यालय में सक्रिय एजेंटों के बीच तमाम तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। एजेंटों के बीच चर्चा थी कि अखिलेश बिहार का रहने वाला है तो कोई उसे जौनपुर का बता रहा था। अमर उजाला ने इसकी पड़ताल की तो भरवारी के नेहरू नगर में अखिलेश पुत्र साहेबलाल नाम का कोई शख्स नहीं मिला। अखिलेश नाम के दो युवक जरूर है, लेकिन इनके पिता का नाम दूसरा है। साथ ही डीएल में लगी फोटो भी उनसे नहीं मिलती है। एजेंटों का आरोप है कि पांच-पांच हजार रुपये लेकर कर्मचारी भीतरखाने लाइसेंस जारी कर रहे हैं।
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मामला संज्ञान में नहीं है। यदि ऐसा है तो इसकी विधिवत जांच कराई जाएगी। साथ ही फर्जी तरीके से लाइसेंस जारी कराने वाले के भी खिलाफ कार्रवाई कराएंगे।
शंकरजी सिंह, एआरटीओ