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वकीलों ने की हड़ताल, 48 घंटे में हत्यारों को पकड़ने का अल्टीमेटम
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
Updated Sat, 23 Jul 2016 12:21 AM IST
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बीते 21 जुलाई को वकील उमेश मिश्रा की हत्या से शुक्रवार को अधिवक्ताओं में भारी आक्रोश रहा। अधिवक्ताओं ने हड़ताल का एलान कर दिया। जिला कचहरी में कामकाज ठप कराकर अधिवक्ताओं ने पुलिस को आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। चेतावनी दी है कि 48 घंटे में गिरफ्तारी नहीं होने पर अधिवक्ता सड़क पर उतरकर विरोध जताएंगे।
चरवा थाना क्षेत्र के केसी का पुरवा के रहने वाले वकील उमेश कुमार मिश्रा (30) की गुरुवार की शाम करीब पांच बजे हत्या कर दी गई। हत्यारों ने घर लौट रहे वकील पर कादीपुर गांव के पास हमला किया। वकील को उपचार के लिए इलाहाबाद एसआरएन अस्पताल ले जाया गया, मगर उसकी मौत हो गई। इसके बाद बवाल की आशंका पर पुलिस ने शव वहीं रोक दिया। इधर, घटना की जानकारी होने पर अधिवक्ताओं में आक्रोश पैदा हो गया।
सुबह दस बजे न्यायालय खुलने के समय सैकड़ों की संख्या में अधिवक्ता जिला कचहरी में इकट्ठा हो गए। माडल डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मनुदेव त्रिपाठी और महामंत्री अजय पांडेय के नेतृत्व में जमा अधिवक्ताओं ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। घटना से वकीलों में भारी आक्रोश रहा, मगर वरिष्ठ अधिवक्ताओं की सूझबूझ से बवाल नहीं हो सका। प्रदर्शन के बाद अधिवक्ताओं ने बैठक की। घटना को लेकर नाराजगी जताते हुए पुलिस को घटना के खुलासे के लिए 48 घंटे का समय दिया। इस दौरान अधिवक्ता देवशरण त्रिपाठी, राकेश जायसवाल, ज्ञानेंद्र नारायण शुक्ला, नोखे लाल पांडेय, हरिशंकर पांडेय, इनामुल हक, कौशलेश द्विवेदी, सत्यजीत सिंह, अमित मिश्रा, अनित शुक्ला आदि उपस्थित रहे।
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पांच लोगों के खिलाफ दर्ज हुआ मुकदमा
वकील उमेश मिश्रा हत्याकांड में पांच लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। जिसमें दो सगे भाई समेत तीन नामजद हैं जबकि दो अज्ञात हैं। शुक्रवार देरशाम वकील का शव पहुंचा तो महिलाएं दहाड़ मारकर रोने लगीं। गांव में एहतियातन पुलिस फोर्स तैनात है
गुरुवार शाम उमेश मिश्रा की हत्या की खबर सुनते ही मां कमला देवी सुधबुध खो बैठीं। मां और भाई गांव के ही तीन लोगों पर हत्या का आरोप लगा रहे थे। घटना से माहौल काफी गरम था। ऐसे में पुलिस ने शव को इलाहाबाद में एसआरएन अस्पताल में ही रोक लिया। जबकि यहां पर पुलिस उमेश की मां को शव आने का दिलासा देती रही। पुलिस को आशंका थी कि रात में शव लाने पर बवाल हो सकता है। सुबह तक जब शव नहीं पहुंचा तो मां कमला देवी की हालत बहुत खराब हो गई।
दिनभर गांव की महिलाएं उन्हें दिलासा देती रहीं। शाम को वकील का शव घर पहुंचा तो महिलाएं रोने लगीं। मां रोते-रोते बेहोश हो गई। वहीं, परिजन की तहरीर पर पुलिस ने गांव के ही त्रिभुवन मिश्रा, उसके सगे भाई शिवभवन मिश्रा और सत्यदेव मिश्रा के अलावा दो अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। परिजनों ने पुरानी रंजिश में हत्या का आरोप लगाया है।
तहरीर के आधार पर रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। आरोपियों की तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है। जल्द ही आरोपी पकड़ लिए जाएंगे।
मो.हाशिम, इंस्पेक्टर मंझनपुर कोतवाली
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चरवा थाना क्षेत्र के केसी का पुरवा के रहने वाले वकील उमेश कुमार मिश्रा (30) की गुरुवार की शाम करीब पांच बजे हत्या कर दी गई। हत्यारों ने घर लौट रहे वकील पर कादीपुर गांव के पास हमला किया। वकील को उपचार के लिए इलाहाबाद एसआरएन अस्पताल ले जाया गया, मगर उसकी मौत हो गई। इसके बाद बवाल की आशंका पर पुलिस ने शव वहीं रोक दिया। इधर, घटना की जानकारी होने पर अधिवक्ताओं में आक्रोश पैदा हो गया।
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सुबह दस बजे न्यायालय खुलने के समय सैकड़ों की संख्या में अधिवक्ता जिला कचहरी में इकट्ठा हो गए। माडल डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मनुदेव त्रिपाठी और महामंत्री अजय पांडेय के नेतृत्व में जमा अधिवक्ताओं ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। घटना से वकीलों में भारी आक्रोश रहा, मगर वरिष्ठ अधिवक्ताओं की सूझबूझ से बवाल नहीं हो सका। प्रदर्शन के बाद अधिवक्ताओं ने बैठक की। घटना को लेकर नाराजगी जताते हुए पुलिस को घटना के खुलासे के लिए 48 घंटे का समय दिया। इस दौरान अधिवक्ता देवशरण त्रिपाठी, राकेश जायसवाल, ज्ञानेंद्र नारायण शुक्ला, नोखे लाल पांडेय, हरिशंकर पांडेय, इनामुल हक, कौशलेश द्विवेदी, सत्यजीत सिंह, अमित मिश्रा, अनित शुक्ला आदि उपस्थित रहे।
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पांच लोगों के खिलाफ दर्ज हुआ मुकदमा
वकील उमेश मिश्रा हत्याकांड में पांच लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। जिसमें दो सगे भाई समेत तीन नामजद हैं जबकि दो अज्ञात हैं। शुक्रवार देरशाम वकील का शव पहुंचा तो महिलाएं दहाड़ मारकर रोने लगीं। गांव में एहतियातन पुलिस फोर्स तैनात है
गुरुवार शाम उमेश मिश्रा की हत्या की खबर सुनते ही मां कमला देवी सुधबुध खो बैठीं। मां और भाई गांव के ही तीन लोगों पर हत्या का आरोप लगा रहे थे। घटना से माहौल काफी गरम था। ऐसे में पुलिस ने शव को इलाहाबाद में एसआरएन अस्पताल में ही रोक लिया। जबकि यहां पर पुलिस उमेश की मां को शव आने का दिलासा देती रही। पुलिस को आशंका थी कि रात में शव लाने पर बवाल हो सकता है। सुबह तक जब शव नहीं पहुंचा तो मां कमला देवी की हालत बहुत खराब हो गई।
दिनभर गांव की महिलाएं उन्हें दिलासा देती रहीं। शाम को वकील का शव घर पहुंचा तो महिलाएं रोने लगीं। मां रोते-रोते बेहोश हो गई। वहीं, परिजन की तहरीर पर पुलिस ने गांव के ही त्रिभुवन मिश्रा, उसके सगे भाई शिवभवन मिश्रा और सत्यदेव मिश्रा के अलावा दो अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। परिजनों ने पुरानी रंजिश में हत्या का आरोप लगाया है।
तहरीर के आधार पर रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। आरोपियों की तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है। जल्द ही आरोपी पकड़ लिए जाएंगे।
मो.हाशिम, इंस्पेक्टर मंझनपुर कोतवाली