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जिला कारागार में फिर एक और बंदी की मौत
Updated Fri, 09 Jun 2017 07:43 PM IST
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मंझनपुर।
जिला कारागार में निरुद्ध बंदी नकुल (25) की बृहस्पतिवार रात इलाज के दौरान मौत हो गई। बंदी कई दिनों से बीमार था। इलाहाबाद के एसआरएन अस्पताल ले जाते समय उसकी सांसें थम गईं। मौत की जानकारी होने पर जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने जेल का निरीक्षण किया। साथ ही बंदियों के इलाज के लिए जेल अस्पताल में शिविर लगाने के निर्देश दिए। बंदी का शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।
मंझनपुर कोतवाली के बसोहनी गांव निवासी नकुल (25) पुत्र नत्थू लाल पत्नी सकुन देवी की मौत के मामले में जिला जेल में निरुद्ध था। नकुल के साथ मां गीता देवी व अन्य परिजनों को भी पुलिस ने जेल भेजा था लेकिन नकुल को छोड़कर बाकी लोग जमानत पर रिहा हैं। दो दिन पहले बंदी नकुल की जिला जेल में हालत बिगड़ गई थी। उसे जेल अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इसके बाद जिला अस्पताल रेफर किया गया।
हालत में सुधार नहीं होने पर बृहस्पतिवार रात चिकित्सकों ने नकुल को एसआरएन अस्पताल इलाहाबाद के लिए रेफर कर दिया। अस्पताल ले जाते समय मूरतगंज के समीप बंदी नकुल की मौत हो गई। बंदी के मौत की खबर सुनते ही जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया। पुलिस ने परिजनों को बंदी की मौत की जानकारी देते हुए शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। बंदी की मौत से परिजनों में कोहराम मचा है।
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जेलर राजीव सिंह ने बताया के बंदी नकुल तीन महीने से बीमार चल रहा था। उसका उपचार जिला अस्पताल के साथ एसआरएन अस्पताल में भी कराया गया था। दोपहर बाद जिलाधिकारी ने जेल का निरीक्षण किया। बंदियों से पूछताछ करने के बाद उन्होंने सीएमओ को निर्देश दिया कि वह जेल अस्पताल में शिविर लगाकर बीमार बंदियों का इलाज करवाएं।
जिला कारागार के एक और बंदी की मौत
16 अप्रैल 2016 को पत्नी की हत्या के आरोप में भेजा गया था जेल
बृहस्पतिवार रात इलाहाबाद ले जाते समय रास्ते में थमीं सांसें, परिजनों में कोहराम
जेल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप
मृतक बंदी नकुल की मां गीता देवी ने जेल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया है। कहा कि उसके बेटे का इलाज ठीक तरीके से नहीं कराया गया। जेल अस्पताल में इलाज के नाम पर केवल औपचारिकता पूरी की जा रही थी। यही कारण है कि उसके बेटे नकुल की मौत हो गई।
जेल अस्पताल में इलाज के नाम पर खानापूर्ति
करोड़ों की लागत से बने जिला कारागार में बंदियों और कैदियों के इलाज के लिए अस्पताल भी है। जहां बंदियों और कैदियों के इलाज के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जाती है। बंदियों के उपचार में बरती जा रही लापरवाही से एक के बाद एक बंदी मौत के गाल में समा रहे हैं।
दो महीने में चार बंदियों की हुई मौत
जिला कारागार में दो महीने के भीतर चार बंदियों की मौत हो चुकी है। 08 अप्रैल को बंदी मोहम्मद अहमद निवासी सोनारन का टोला करारी की मौत हुई। 20 मार्च को देशराज पुत्र महादेव निवासी भक्तन का पुरवा की मौत। 30 मई को करन सिंह पुत्र लल्लू निवासी सैदनपुर की मौत और 09 जून को बसोहनी के नकुल की मौत हो गई।
सवालों में घिरते जा रहे जेल अस्पताल के चिकित्सक
जिला कारागार के अस्पताल में तैनात चिकित्सक डॉ. हिन्द प्रकाश मणि की तैनाती जेल बनने के तुरंत बाद कर दी गई थी। वह तब से ही जेल अस्पताल में है। बंदियों और कैदियों की लगातार हो रही मौत से चिकित्सक सवालों के घेरे में आ गए हैं। बंदियों और कैदियों के उपचार में लापरवाही क्यों बरती जा रही है। इसे लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है।
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जिला कारागार में निरुद्ध बंदी नकुल (25) की बृहस्पतिवार रात इलाज के दौरान मौत हो गई। बंदी कई दिनों से बीमार था। इलाहाबाद के एसआरएन अस्पताल ले जाते समय उसकी सांसें थम गईं। मौत की जानकारी होने पर जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने जेल का निरीक्षण किया। साथ ही बंदियों के इलाज के लिए जेल अस्पताल में शिविर लगाने के निर्देश दिए। बंदी का शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।
मंझनपुर कोतवाली के बसोहनी गांव निवासी नकुल (25) पुत्र नत्थू लाल पत्नी सकुन देवी की मौत के मामले में जिला जेल में निरुद्ध था। नकुल के साथ मां गीता देवी व अन्य परिजनों को भी पुलिस ने जेल भेजा था लेकिन नकुल को छोड़कर बाकी लोग जमानत पर रिहा हैं। दो दिन पहले बंदी नकुल की जिला जेल में हालत बिगड़ गई थी। उसे जेल अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इसके बाद जिला अस्पताल रेफर किया गया।
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हालत में सुधार नहीं होने पर बृहस्पतिवार रात चिकित्सकों ने नकुल को एसआरएन अस्पताल इलाहाबाद के लिए रेफर कर दिया। अस्पताल ले जाते समय मूरतगंज के समीप बंदी नकुल की मौत हो गई। बंदी के मौत की खबर सुनते ही जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया। पुलिस ने परिजनों को बंदी की मौत की जानकारी देते हुए शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। बंदी की मौत से परिजनों में कोहराम मचा है।
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जेलर राजीव सिंह ने बताया के बंदी नकुल तीन महीने से बीमार चल रहा था। उसका उपचार जिला अस्पताल के साथ एसआरएन अस्पताल में भी कराया गया था। दोपहर बाद जिलाधिकारी ने जेल का निरीक्षण किया। बंदियों से पूछताछ करने के बाद उन्होंने सीएमओ को निर्देश दिया कि वह जेल अस्पताल में शिविर लगाकर बीमार बंदियों का इलाज करवाएं।
जिला कारागार के एक और बंदी की मौत
16 अप्रैल 2016 को पत्नी की हत्या के आरोप में भेजा गया था जेल
बृहस्पतिवार रात इलाहाबाद ले जाते समय रास्ते में थमीं सांसें, परिजनों में कोहराम
जेल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप
मृतक बंदी नकुल की मां गीता देवी ने जेल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया है। कहा कि उसके बेटे का इलाज ठीक तरीके से नहीं कराया गया। जेल अस्पताल में इलाज के नाम पर केवल औपचारिकता पूरी की जा रही थी। यही कारण है कि उसके बेटे नकुल की मौत हो गई।
जेल अस्पताल में इलाज के नाम पर खानापूर्ति
करोड़ों की लागत से बने जिला कारागार में बंदियों और कैदियों के इलाज के लिए अस्पताल भी है। जहां बंदियों और कैदियों के इलाज के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जाती है। बंदियों के उपचार में बरती जा रही लापरवाही से एक के बाद एक बंदी मौत के गाल में समा रहे हैं।
दो महीने में चार बंदियों की हुई मौत
जिला कारागार में दो महीने के भीतर चार बंदियों की मौत हो चुकी है। 08 अप्रैल को बंदी मोहम्मद अहमद निवासी सोनारन का टोला करारी की मौत हुई। 20 मार्च को देशराज पुत्र महादेव निवासी भक्तन का पुरवा की मौत। 30 मई को करन सिंह पुत्र लल्लू निवासी सैदनपुर की मौत और 09 जून को बसोहनी के नकुल की मौत हो गई।
सवालों में घिरते जा रहे जेल अस्पताल के चिकित्सक
जिला कारागार के अस्पताल में तैनात चिकित्सक डॉ. हिन्द प्रकाश मणि की तैनाती जेल बनने के तुरंत बाद कर दी गई थी। वह तब से ही जेल अस्पताल में है। बंदियों और कैदियों की लगातार हो रही मौत से चिकित्सक सवालों के घेरे में आ गए हैं। बंदियों और कैदियों के उपचार में लापरवाही क्यों बरती जा रही है। इसे लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है।