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Kaushambi News: आवास निर्माण में भ्रष्टाचार, पर्दा डाल रहे अधिकारी
Tue, 22 Jul 2025 12:58 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
Updated Tue, 22 Jul 2025 12:58 AM IST
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मंझनपुर। आवास निर्माण योजना में तीन पात्रों को जिम्मेदारों ने अलग-अलग वर्ष में लाभ दिया। शिकायत के बाद एक अधिकारी पर आरोप तय कर दिया गया। जबकि, इससे जुड़े अन्य कर्मचारियोंं के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई। तीन मामलों में ऑफलाइन भुगतान किया गया। जिम्मेदारों ने इसे भी संज्ञान में नहीं लिया।
सरसवां ब्लॉक के भगवतपुर गांव के छह लोगों को अलग-अलग समय पर आवास योजना का लाभ मिला है। जिम्मेदारों ने इन सभी को एक से अधिक बार लाभ दे दिया। कांग्रेस नेता आशीष कुमार पप्पू मिश्रा ने इसकी शिकायत सीडीओ विनोद राम त्रिपाठी से की तो प्रकरण की जांच शुरू की गई। जांच अधिकारी बीडीओ सरसवां प्रदीप कुमार मौर्य ने अपनी रिपोर्ट 18 जुलाई को पीडी मनोज वर्मा को दी।
उन्होंने अपनी जांच में तीन आवासों की ऑनलाइन रिपोर्ट मिलने का हवाला देते हुए एडीओ आईएसबी व तत्कालीन ग्राम पंचायत सचिव मनोज कुमार सिंह को दोषी पाया। साथ ही कहा कि इनसे तीन लाभार्थियों को आवास के लिए गलत तरीके से दी गई 3.60 लाख रुपये की वसूली की गई। इसके साथ ही उन्होंने सचिव को प्रतिकूल प्रविष्ट की भी संस्तुति की है।
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इनको आवास देने में बने दोषी
जांच अधिकारी बीडीओ सरसवां ने गांव के रईस व सब्बीर अहमद को 2014-15 में इंदिरा आवास और 2022-23 में प्रधानमंत्री आवास देने और रेनू देवी को 2015 में इंदिरा आवास व 2022-23 में प्रधानमंत्री आवास देने के लिए सचिव को दोषी पाया। वहीं रामसनेही, भोला व सुनीता को मिले आवास में विवरण नहीं मिलने पर जांच से बाहर कर दिया। जबकि, शिकायतकर्ता दस्तावेज देने का दावा कर रहा है।
अन्य जिम्मेदारों को बचाने का आरोप
शिकायतकर्ता आशीष कुमार ने बताया कि जांच अधिकारी ने जिन तीन लोगों को ऑनलाइन आवास की धनराशि भेजी गई उसकी ही जांच करते हुए तत्कालीन सचिव को दोषी करार दिया। जबकि, इस प्रकरण में आवास देने में तीन से पांच साल का अंतर रहा। इस बीच सचिव बदले भी लेकिन जांच अधिकारी ने न तो पटल सहायक को दोषी माना (जिन के पास आवास के रिकाॅर्ड रहते हैं) और न ही दोबारा एमबी करने वाले तकनीकी अधिकारी पर कोई दोष लगाया।
ऐसे में अप्रत्यक्ष रूप से प्रकरण को कमजोर करने का प्रयास है। इनका कहना है जिन तीन लोगों को ऑफलाइन आवास की धनराशि दी गई। उनका विवरण भी जांच अधिकारी को दिया गया लेकिन उसे संज्ञान में नहीं लिया गया। अधिकारी इस प्रकरण पर पर्दा डालने का प्रयास कर रहे हैं।
जांच अधिकारी ने किन साक्ष्यों का प्रयोग किया है इसकी जानकारी नहीं है। यदि उनके पास दोबारा शिकायत आती है तो प्रकरण की फिर से जांच कराई जाएगी। जो भी दोषी होंगे उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। - विनोद राम त्रिपाठी, सीडीओ
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सरसवां ब्लॉक के भगवतपुर गांव के छह लोगों को अलग-अलग समय पर आवास योजना का लाभ मिला है। जिम्मेदारों ने इन सभी को एक से अधिक बार लाभ दे दिया। कांग्रेस नेता आशीष कुमार पप्पू मिश्रा ने इसकी शिकायत सीडीओ विनोद राम त्रिपाठी से की तो प्रकरण की जांच शुरू की गई। जांच अधिकारी बीडीओ सरसवां प्रदीप कुमार मौर्य ने अपनी रिपोर्ट 18 जुलाई को पीडी मनोज वर्मा को दी।
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उन्होंने अपनी जांच में तीन आवासों की ऑनलाइन रिपोर्ट मिलने का हवाला देते हुए एडीओ आईएसबी व तत्कालीन ग्राम पंचायत सचिव मनोज कुमार सिंह को दोषी पाया। साथ ही कहा कि इनसे तीन लाभार्थियों को आवास के लिए गलत तरीके से दी गई 3.60 लाख रुपये की वसूली की गई। इसके साथ ही उन्होंने सचिव को प्रतिकूल प्रविष्ट की भी संस्तुति की है।
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इनको आवास देने में बने दोषी
जांच अधिकारी बीडीओ सरसवां ने गांव के रईस व सब्बीर अहमद को 2014-15 में इंदिरा आवास और 2022-23 में प्रधानमंत्री आवास देने और रेनू देवी को 2015 में इंदिरा आवास व 2022-23 में प्रधानमंत्री आवास देने के लिए सचिव को दोषी पाया। वहीं रामसनेही, भोला व सुनीता को मिले आवास में विवरण नहीं मिलने पर जांच से बाहर कर दिया। जबकि, शिकायतकर्ता दस्तावेज देने का दावा कर रहा है।
अन्य जिम्मेदारों को बचाने का आरोप
शिकायतकर्ता आशीष कुमार ने बताया कि जांच अधिकारी ने जिन तीन लोगों को ऑनलाइन आवास की धनराशि भेजी गई उसकी ही जांच करते हुए तत्कालीन सचिव को दोषी करार दिया। जबकि, इस प्रकरण में आवास देने में तीन से पांच साल का अंतर रहा। इस बीच सचिव बदले भी लेकिन जांच अधिकारी ने न तो पटल सहायक को दोषी माना (जिन के पास आवास के रिकाॅर्ड रहते हैं) और न ही दोबारा एमबी करने वाले तकनीकी अधिकारी पर कोई दोष लगाया।
ऐसे में अप्रत्यक्ष रूप से प्रकरण को कमजोर करने का प्रयास है। इनका कहना है जिन तीन लोगों को ऑफलाइन आवास की धनराशि दी गई। उनका विवरण भी जांच अधिकारी को दिया गया लेकिन उसे संज्ञान में नहीं लिया गया। अधिकारी इस प्रकरण पर पर्दा डालने का प्रयास कर रहे हैं।
जांच अधिकारी ने किन साक्ष्यों का प्रयोग किया है इसकी जानकारी नहीं है। यदि उनके पास दोबारा शिकायत आती है तो प्रकरण की फिर से जांच कराई जाएगी। जो भी दोषी होंगे उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। - विनोद राम त्रिपाठी, सीडीओ