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गोशाला में भूख और ठंड से तड़प कर दम तोड़ रहे मवेशी, दो सप्ताह में चार दर्जन से अधिक मवेशियों की मौत

Mon, 24 Jan 2022 12:27 AM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 24 Jan 2022 12:27 AM IST
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Cattle dying of hunger and cold in cowshed, more than four dozen cattle died in two weeks
Cattle dying of hunger and cold in cowshed, more than four dozen cattle died in two weeks - फोटो : KAUSHAMBI
तहसील इलाके में स्थापित गोवंश संरक्षण केंद्रों का हाल बेहाल है। गोशाला में बंद आवारा मवेशी भूख और ठंड के कारण दम तोड़ रहे हैं। सबसे खराब स्थिति नेवादा विकास खंड के बरौलहा और मूरतगंज विकास खंड के बरई सुलेम गांव के गोसंरक्षण केंद्रों की है। यहां पिछले दो सप्ताह के अंदर अलग-अलग कुल चार दर्जन से अधिक गोवंशों ने दम तोड़ दिया। इन गोशालाओं में आधे से अधिक गोवंश अब भी बीमार है। इतना ही नहीं मवेशियों के दम तोड़ने के बाद भी शवों को उठाने के लिए भी कोई व्यवस्था नहीं कि गई है। इसकी वजह से मृत गोवंशों के शव कुत्ते नोचकर खा रहे हैं।
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गोवंशो के संरक्षण के लिए जिले भर में स्थापित की गईं 72 गोशालाओं में इस समय 10 हजार से अधिक आवारा मवेशियों को संरक्षित किया गया है। इन गोवंशों की देखरेख के लिए विभाग की तरफ से प्रति महीने लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। गोशालाओं में साफ सफाई के लिए आवश्यकता के हिसाब से केयर टेकरों को भी तैनात भी किया गया है। क्षेत्र के लोगों के मुताबिक प्रत्येक मवेशी के लिए खर्च किए जाने वाली रकम के हिसाब से गोशालाओं मे व्यवस्था नहीं की जा रही है।
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स्थिति यह है कि भूसा और हरे चारे की व्यवस्था नहीं होने के कारण मवेशियों का पेट भी नहीं भर पा रहा। इसके अलावा मवेशियों को सर्दी में ठंड से बचने के लिए भी कोई इंतजाम नहीं किए गए हैं। इस कारण मवेशी दम तोड़ रहे हैं। सबसे खराब स्थिति चायल के नूरपुर हाजीपुर और बरौलहा सहित बरई सुलेम सगरा और चायल कस्बा की कान्हा गोशाला का है। इन गोशालाओं में पिछले दो सप्ताह में अब तक चार दर्जन से अधिक मवेशियों की मौत हो चुकी है।
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सूखा भूसा खा रहे मवेशी, राशन और चोकर के नाम पर खर्च हो रहा पैसा
क्षेत्र में स्थापित गोसंरक्षण केंद्रों में रखे गए मवेशियों के खाने के लिए हरे चारे के साथ भूसा और राशन में खली व चोकर की व्यवस्था की जानी है। लेकिन इन गोशालाओं में स्थिति यह है कि गोवंशों को खाने के लिए सिर्फ सूखा भूसा ही दिया जा रहा है। जबकि इनके खाने में चोकर और खली के नाम पर कागजों में मोटी रकम खर्च की जा रही है।
जंगली जानवर नोचते है गोवंशों का शव
इलाके में स्थापित दो दर्जन से अधिक गोशालाओं में अब तक तीन दर्जन से अधिक मवेशियों की मौत ही चुकी है। मवेशियों की मौत के बाद जिम्मेदार उनके शवों को लेकर भी संवेदनहीन बने हुए हैं। यही कारण है कि गोशाला के आसपास रहने वाले जंगली जानवर और कुत्ते शवों को नोचकर खाते रहते हैं। शिकायत और वीडियो वायरल होने के बाद भी जिम्मेदार इस ओर ध्यान नहीं देते हैं।

गोशाला में मवेशियों के मौत की जानकारी नहीं है। चिकित्सकों की टीम भेजकर मामले की जांच कराएंगी। बीमार मवेशियों का इलाज कराया जाएगा। साथ ही लापरवाही बरतने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई भी की जाएगी।
डॉ. सीमा सिंह, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी
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