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Kaushambi : श्रीलंका से आए बौद्ध अनुयाइयों ने किया चीवर दान, निकाली गई यात्रा
Mon, 20 Oct 2025 01:56 PM IST
विनोद सिंह
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांंबी
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांंबी
Published by: विनोद सिंह
Updated Mon, 20 Oct 2025 01:56 PM IST
सार
तथागत बुद्ध की तपस्थली कौशाम्बी में बौद्ध अनुयायियों ने सोमवार को कठिन चीवर पूजा यात्रा निकाली। मंदिर में पूजा अर्चना के बाद बौद्ध भिक्षुओं को चीवर दान किया गया।
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कौशाम्बी में श्रीलंका से आए बौद्ध भिक्षुओं ने चीवर पूजा यात्रा निकाली।
- फोटो : संवाद।
विस्तार
तथागत बुद्ध की तपस्थली कौशाम्बी में बौद्ध अनुयायियों ने सोमवार को कठिन चीवर पूजा यात्रा निकाली। मंदिर में पूजा अर्चना के बाद बौद्ध भिक्षुओं को चीवर दान किया गया। तथागत की तपोस्थली कौशाम्बी में हर साल की तरह इस साल भी वर्षावास पूरा होने पर श्री लंका से सैकड़ों की संख्या में बौद्ध धर्म के अनुयाई यहां चीवर पूजा करने आते हैं।
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सुबह पांच बजे कंबोडिया मंदिर से श्रीलंका बुद्ध विहार तक चीवर पूजा यात्रा निकाली गई। इस यात्रा में धर्मवालंबियों ने सिर पर चीवर रख हाथों में मशाल जलाये हुए श्रीलंका बुद्ध विहार तक पद यात्रा निकाली। यात्रा सुबह छह बजे श्रीलंका बुद्ध विहार पहुंच कर विधि-विधान से चीवर पूजा की गई। चीवर पूजा मंदिर के प्रबंधक व भंते टी. सिरी विशुद्धि महाथेरो ने कराई। इसके बाद बुद्ध उपासकों ने बौद्ध भिक्षुओं को चीवर दान किया। भोजन दान करने के बाद कार्यक्रम का समापन किया गया।
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वर्षावास के दौरान बौद्ध भिक्षु नहीं करते यात्रा
भंते भिक्खू ने बताया कि बौद्ध धर्म की ये मान्यता है कि हर साल भिक्षु चार महीने वर्षा वास करते हैं। इन चार महीनों में बौद्ध भिक्षु एक ही जगह एकांतवास करते हैं। वर्षावास के दौरान उनकी यात्राएं नहीं होती। वर्षावास पूरा होने पर चीवर पूजा के बाद ही बौद्ध भिक्षु कहीं पर भी आ जा सकते हैं।
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