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अंध विश्वास: जीवित होने की आस में 12
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Blind Faith: 12 in the hope of survival
- फोटो : KAUSHAMBI
स्थानीय कस्बे में सर्पदंश से पिता-पुत्र की मौत होने के बाद उनके शवों की 12 घंटे तक अंत्येष्टि नहीं की गई। घरवाले झाड़-फूंक कराते रहे और शव बर्फ में रखवाकर इलाके के ओझा व तांत्रिक से संपर्क साधते रहे। परिजनों का दावा था कि ओझा दोनों को जिंदा कर देंगे। देर शाम तक सारे प्रयास असफल होने पर पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
पश्चिमशरीरा थाने के स्थानीय कस्बा निवासी मुकेश (45) पुत्र स्व. धनराज लोक निर्माण विभाग में कर्मचारी था। सोमवार रात मुकेश और उसका एकलौता बेटा दीपू (12) घर के बाहर अलग-अलग चारपाई पर सो रहे थे। भोर में पिता-पुत्र ने सर्प के डसने का शोर मचाया। इसके बाद परिजन और पड़ोसियों को घटना की जानकारी हुई।
घरवाले दोनों को अस्पताल ले जाने की बजाय स्थानीय लोगों से झाड़-फूंक कराने लगे। इस बीच पिता-पुत्र की मौत हो गई। घटना की जानकारी पर पहुंचे कोतवाली के उपनिरीक्षक देवव्रत पांडेय दोनों को मृत बताकर शव पोस्टमार्टम के लिए भेजना चाहा। इस पर परिवार के लोग हंगामा करने लगे।
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उन लोगों का कहना था कि उन्होंने तांत्रिकों से संपर्क किया है और वे दोनों को जिंदा कर देंगे। इसे लेकर पुलिस पंचनामा भरकर वापस लौट गई। तांत्रिकों के इंतजार में घरवाले पिता-पुत्र के शवों को बर्फ में रखवाकर झाड़-फूंक कराते रहे। मंगलवार शाम छह बजे तक जब तांत्रिक नहीं आए और सारे प्रयास असफल हो गए तो परिजनों ने पुलिस को प्रार्थना पत्र देकर शव का पोस्टमार्टम कराने को कहा। देर शाम पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
बिखर गया मुकेश का कुनबा, घर में मचा कोहराम
स्थानीय कस्बा निवासी मुकेश घर का एकलौता कमाने वाला था। लोक निर्माण विभाग में कार्यरत पिता धनराज की मौत के बाद उसे मृतक आश्रित कोटे से नौकरी मिली थी। मुकेश की दो बेटियां व एकलौता बेटा दीपू था। दीप पश्चिमशरीरा के एक निजी स्कूल में आठवीं का छात्र था। मंगलवार सुबह पिता-पुत्र की मौत के बाद पीड़ित परिवार में कोहराम मचा है। शाम तक अंधविश्वास के चक्कर में बिना खाय-पिये परिवार के लोग उनके जिंदा होने की उम्मीद बांधे रहे लेकिन शाम को जब तांत्रिकों ने भी जवाब दे दिया तो परिजनों में कोहराम मच गया।
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पश्चिमशरीरा थाने के स्थानीय कस्बा निवासी मुकेश (45) पुत्र स्व. धनराज लोक निर्माण विभाग में कर्मचारी था। सोमवार रात मुकेश और उसका एकलौता बेटा दीपू (12) घर के बाहर अलग-अलग चारपाई पर सो रहे थे। भोर में पिता-पुत्र ने सर्प के डसने का शोर मचाया। इसके बाद परिजन और पड़ोसियों को घटना की जानकारी हुई।
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घरवाले दोनों को अस्पताल ले जाने की बजाय स्थानीय लोगों से झाड़-फूंक कराने लगे। इस बीच पिता-पुत्र की मौत हो गई। घटना की जानकारी पर पहुंचे कोतवाली के उपनिरीक्षक देवव्रत पांडेय दोनों को मृत बताकर शव पोस्टमार्टम के लिए भेजना चाहा। इस पर परिवार के लोग हंगामा करने लगे।
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उन लोगों का कहना था कि उन्होंने तांत्रिकों से संपर्क किया है और वे दोनों को जिंदा कर देंगे। इसे लेकर पुलिस पंचनामा भरकर वापस लौट गई। तांत्रिकों के इंतजार में घरवाले पिता-पुत्र के शवों को बर्फ में रखवाकर झाड़-फूंक कराते रहे। मंगलवार शाम छह बजे तक जब तांत्रिक नहीं आए और सारे प्रयास असफल हो गए तो परिजनों ने पुलिस को प्रार्थना पत्र देकर शव का पोस्टमार्टम कराने को कहा। देर शाम पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
बिखर गया मुकेश का कुनबा, घर में मचा कोहराम
स्थानीय कस्बा निवासी मुकेश घर का एकलौता कमाने वाला था। लोक निर्माण विभाग में कार्यरत पिता धनराज की मौत के बाद उसे मृतक आश्रित कोटे से नौकरी मिली थी। मुकेश की दो बेटियां व एकलौता बेटा दीपू था। दीप पश्चिमशरीरा के एक निजी स्कूल में आठवीं का छात्र था। मंगलवार सुबह पिता-पुत्र की मौत के बाद पीड़ित परिवार में कोहराम मचा है। शाम तक अंधविश्वास के चक्कर में बिना खाय-पिये परिवार के लोग उनके जिंदा होने की उम्मीद बांधे रहे लेकिन शाम को जब तांत्रिकों ने भी जवाब दे दिया तो परिजनों में कोहराम मच गया।

Blind Faith: 12 in the hope of survival- फोटो : KAUSHAMBI

Blind Faith: 12 in the hope of survival- फोटो : KAUSHAMBI