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नगर पंचायतों को मिलने वाली वित्तीय मदद पर लगी रोक
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नगर पंचायतों को मिलने वाली वित्तीय मदद पर लगी रोक
नगरीय क्षेत्र में होने वाले विकास कार्य पर ग्रहण लगा
संवाद न्यूज एजेंसी
मंझनपुर/सिराथू। पंडित दीन दयाल उपाध्याय योजना के तहत नगर पंचायतों को मिलने वाली वित्तीय मदद पर प्रदेश सरकार ने रोक लगा दी है। नतीजतन नगरीय क्षेत्र में इस मद से होने वाले विकास कार्य पर ग्रहण लग गया है। शासन ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में जो स्वीकृत परियोजनाएं हैं, उनका भुगतान खुद के स्रोत से होने वाले आय से किया जाए।
प्रमुख सचिव नगर विकास दीपक सिंह ने इस आशय का पत्र सभी नगर पंचायतों को भेजा है। पत्र में कहा गया है कि पंडित दीन दयाल उपाध्याय योजना से नगरीय क्षेत्र में नाली, सड़क, इंटरलाकिंग, लाइट, भवन निर्माण आदि का काम कराया जाता था। शासन इसके लिए ब्याज मुक्त धन मांग के सापेक्ष उपलब्ध कराता था, लेकिन वित्तीय वर्ष 2020-2021 में इस योजना में बजट का कोई प्रावधान नहीं किया गया है। ऐसी दशा में नगर पंचायतों में स्वीकृति परियोजनाओं की दूसरी किस्त जारी नहीं की जाएगी। शेष भुगतान का इंतजाम नगर पंचायतों को अपने स्रोत केंद्रीय वित्त आयोग और राज्य वित्त आयोग के साथ अन्य स्रोत से करना होगा। यह भुगतान डीएम द्वारा गठित ठीम के भौतिक सत्यापन के बाद किया जाएगा। आर्थिक संकट के चलते वित्तीय मदद नहीं मिलने से जिले की नगर पंचायतों में खलबली मच गई है। नगरों में स्वीकृत परियोजनाएं धन के अभाव में अधर में लटकती दिख रही हैं। नगर पंचायतों के सामने संकट यह है कि वह अधूरी परियोजनाओं के लिए धन का इंतजाम कहां से करें। नगरों में टैक्स वसूली की स्थिति भी किसी से छिपी नहीं हैं। सिराथू के ईओ मनीष वर्मा का कहना है कि शासन स्तर से बजट नहीं जारी होने से विकास कार्य के साथ कर्मचारियों के वेतन पर भी गंभीर संकट पैदा हो गया है।
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नगरीय क्षेत्र में होने वाले विकास कार्य पर ग्रहण लगा
संवाद न्यूज एजेंसी
मंझनपुर/सिराथू। पंडित दीन दयाल उपाध्याय योजना के तहत नगर पंचायतों को मिलने वाली वित्तीय मदद पर प्रदेश सरकार ने रोक लगा दी है। नतीजतन नगरीय क्षेत्र में इस मद से होने वाले विकास कार्य पर ग्रहण लग गया है। शासन ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में जो स्वीकृत परियोजनाएं हैं, उनका भुगतान खुद के स्रोत से होने वाले आय से किया जाए।
प्रमुख सचिव नगर विकास दीपक सिंह ने इस आशय का पत्र सभी नगर पंचायतों को भेजा है। पत्र में कहा गया है कि पंडित दीन दयाल उपाध्याय योजना से नगरीय क्षेत्र में नाली, सड़क, इंटरलाकिंग, लाइट, भवन निर्माण आदि का काम कराया जाता था। शासन इसके लिए ब्याज मुक्त धन मांग के सापेक्ष उपलब्ध कराता था, लेकिन वित्तीय वर्ष 2020-2021 में इस योजना में बजट का कोई प्रावधान नहीं किया गया है। ऐसी दशा में नगर पंचायतों में स्वीकृति परियोजनाओं की दूसरी किस्त जारी नहीं की जाएगी। शेष भुगतान का इंतजाम नगर पंचायतों को अपने स्रोत केंद्रीय वित्त आयोग और राज्य वित्त आयोग के साथ अन्य स्रोत से करना होगा। यह भुगतान डीएम द्वारा गठित ठीम के भौतिक सत्यापन के बाद किया जाएगा। आर्थिक संकट के चलते वित्तीय मदद नहीं मिलने से जिले की नगर पंचायतों में खलबली मच गई है। नगरों में स्वीकृत परियोजनाएं धन के अभाव में अधर में लटकती दिख रही हैं। नगर पंचायतों के सामने संकट यह है कि वह अधूरी परियोजनाओं के लिए धन का इंतजाम कहां से करें। नगरों में टैक्स वसूली की स्थिति भी किसी से छिपी नहीं हैं। सिराथू के ईओ मनीष वर्मा का कहना है कि शासन स्तर से बजट नहीं जारी होने से विकास कार्य के साथ कर्मचारियों के वेतन पर भी गंभीर संकट पैदा हो गया है।
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