कौशांबी : सिक्के की तस्दीक करने पहुंचे पुरातत्व अधिकारी, मुगलकालीन सिक्के होने का अनुमान
भरेठाबाग निवासी इंद्रपाल सिंह यादव का एक प्लाट अटसराय में हैं। प्लाट गहरा होने के कारण उन्होंने एक जेसीबी ऑपरेटर को मिट्टी भराई का ठेका दिया है। भराई के दौरान उसमें कुछ सिक्के मिले थे। सिक्कों पर फारसी में इबारत लिखी है।
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सिराथू तहसील के भरेठाबाग में 30 जून को एक प्लाट में मिट्टी डलवाने के दौरान मिले सिक्के की पहचान करने बुधवार को क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी पहुंचे। प्रथम दृष्टया सिक्का मुगलकालीन बताया जा रहा है। हालांकि अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
भरेठाबाग निवासी इंद्रपाल सिंह यादव का एक प्लाट अटसराय में हैं। प्लाट गहरा होने के कारण उन्होंने एक जेसीबी ऑपरेटर को मिट्टी भराई का ठेका दिया है। भराई के दौरान उसमें कुछ सिक्के मिले थे। सिक्कों पर फारसी में इबारत लिखी है। खजाना होने की बात पर सिक्का लूटने वालों की होड़ लग गई। जानकारी पर पहुंची प्रशासन की टीम के हाथ सिर्फ एक सिक्का लगा।
एसडीएम मनीष कुमार यादव की सूचना पर बुधवार को क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी प्रयागराज मंडल डॉ. रामनरेश पाल मौके की जांच करने टीम के साथ पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों के बयान लिए। सिक्का अभी प्रशासन के पास है। डॉ. रामनरेश ने बताया कि सिक्के की फोटो देखी गई है। उससे लग रहा है कि सिक्का मुगलकाल का होगा। फिलहाल सिक्का मिलने के बाद उसे जांच के लिए मुद्रा साक्ष्य विभाग व लिपि पढ़ने के विशेषज्ञ के पास भेजा जाएगा। इसके बाद ही इसकी आधिकारिक पुष्टि की जा सकती है।
लोग गूगल सर्च के माध्यम से भी सिक्के के बारे में पता कर रहे हैं। हालांकि दिल्ली विश्वविद्यालय से कौशाम्बी पर शोध कर चुके डॉ. सुरेश नागर चौधरी बताते हैं कि कड़ा इलाके में मुगलकालीन विरासत बिखरी हैं। उसके अवशेष अक्सर खोदाई या बरसात के दिनों में मिट्टी की कटान होने पर मिलते रहते हैं।
खनन स्थल के बारे में साधी चुप्पी
क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी डॉ. रामनरेश पाल ने बताया कि उन्होंने प्लाट के मालिक और मिट्टी भरने वाले ठेकेदार से काफी पूछा कि खनन कहां से किया गया था, लेकिन दोनों ने चुप्पी साध रखी है। इसकी वजह से वास्तविक खनन स्थल का स्थलीय निरीक्षण नहीं किया जा सका। जेसीबी ऑपरेटर ने बताया कि खनन कई स्थानों से किया गया है। संवाद
सराफा की दुकानों में सिक्के बेचने पहुंच रहे लोग
भराई के दौरान मिले कई सिक्कों को ग्रामीण उठा ले गए। सूत्रों की मानें तो इलाके के कई सराफा की दुकानों में लोग सिक्का बेचने या चेक कराने के लिए पहुंच रहे हैं। पुरातात्विक धरोहर होने के कारण कोई न तो सिक्का चेक कर रहा है, न ही खरीद रहा है।