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पानी की किल्लत दूर करने में जुटे समाजसेवी
ब्यूरो/अमर उजाला कौशाम्बी
Updated Fri, 03 Apr 2015 11:30 PM IST
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मंझनपुर/कड़ा। अफसर-जनप्रतिनिधियों की संवेदनहीनता से कौशाम्बी के गांवों में मची पानी की किल्लत दूर करने में समाजसेवी आगे आए हैं। कड़ा के निदूरा (त्रिलोकपुर) गांव में बरसों से खराब पड़े हैंडपंपों की मरम्मत से शुक्रवार को इस अभियान का श्रीगणेश हुआ। इसकी पहल करने वाले समाजसेवी हरिश्चंद्र ने बताया कि वे और लोगों को अभियान में जोड़कर अन्य गांवों में भी हैंडपंपों की इसी तरह से मरम्मत कराकर पानी की किल्लत दूर कराने का प्रयास करेंगे।
बता दें कि कौशाम्बी की 17 लाख आबादी को पेयजल मुहैया कराने को 25 हजार से ज्यादा हैंडपंप लगाए गए हैं।
इनमें पांच हजार से अधिक हैंडपंप करीब दो साल से खराब पड़े हैं। गांव-गांव खराब पड़े हैंडपंपों की सूची प्रधान, बीडीओ के माध्यम से जलनिगम के दफ्तरों में पड़ी है। पर, जलनिगम के अफसर दो साल से रिबोर और मरम्मत के लिए बजट नहीं मिलने की बात कहकर पल्ला झाड़ लेते हैं। वहीं सांसद विनोद सोनकर से भी लोगों ने पानी की समस्या से अवगत कराया था। आरोप है कि इसके बाद भी अफसर-जनप्रतिनिधि संवेदनहीन बने हैं। इधर, गर्मी शुरू होते ही जिले के ज्यादातर गांवों में पानी की समस्या गहराने लगी है।
इसकी खबर तीन अप्रैल के अंक में अमर उजाला ने प्रकाशित भी की है। खबर छपने पर समाजसेवियों ने पानी की समस्या को दूर करने की पहल की। इसीक्रम में शुक्रवार को समाजसेवी हरिश्चंद्र ने कड़ा ब्लाक के निदूरा (त्रिलोकपुर) गांव में बरसों से खराब पड़े हैंडपंपों की मरम्मत जनसहयोग से शुरू करा दिया है। शुक्रवार को उन्होंने त्रिलोकपुर गांव में करीब दो साल से पड़े हैंडपंप की मरम्मत गौतम भट्ट, नन्हींलाल, तुलसीदास, राजबाबू, लहरी, कंचन सोनकर, प्रेमचंद्र, भैयालाल, वंशराज, बुधराम यादव आदि के साथ मिलकर शुरू की।
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उन्होंने बताया कि त्रिलोकपुर गांव में ही छह हैंडपंप कई साल से खराब पड़े हैं। इससे लोगों को पानी के लिए भटकना पड़ता है। कहा कि इस गांव के सभी खराब हैंडपंपों की मरम्मत वह जनसहयोग से कराएंगे। इसके अलावा और लोगों को अपने इस अभियान से जोड़ते हुए अन्य गांवों के भी खराब हैंडपंपों को ठीक कराकर ग्रामीणों को पानी की समस्या से निजात दिलाने की कोशिश होगी। समाजसेवी की इस पहल से ग्रामीण गदगद हैं।
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बता दें कि कौशाम्बी की 17 लाख आबादी को पेयजल मुहैया कराने को 25 हजार से ज्यादा हैंडपंप लगाए गए हैं।
इनमें पांच हजार से अधिक हैंडपंप करीब दो साल से खराब पड़े हैं। गांव-गांव खराब पड़े हैंडपंपों की सूची प्रधान, बीडीओ के माध्यम से जलनिगम के दफ्तरों में पड़ी है। पर, जलनिगम के अफसर दो साल से रिबोर और मरम्मत के लिए बजट नहीं मिलने की बात कहकर पल्ला झाड़ लेते हैं। वहीं सांसद विनोद सोनकर से भी लोगों ने पानी की समस्या से अवगत कराया था। आरोप है कि इसके बाद भी अफसर-जनप्रतिनिधि संवेदनहीन बने हैं। इधर, गर्मी शुरू होते ही जिले के ज्यादातर गांवों में पानी की समस्या गहराने लगी है।
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इसकी खबर तीन अप्रैल के अंक में अमर उजाला ने प्रकाशित भी की है। खबर छपने पर समाजसेवियों ने पानी की समस्या को दूर करने की पहल की। इसीक्रम में शुक्रवार को समाजसेवी हरिश्चंद्र ने कड़ा ब्लाक के निदूरा (त्रिलोकपुर) गांव में बरसों से खराब पड़े हैंडपंपों की मरम्मत जनसहयोग से शुरू करा दिया है। शुक्रवार को उन्होंने त्रिलोकपुर गांव में करीब दो साल से पड़े हैंडपंप की मरम्मत गौतम भट्ट, नन्हींलाल, तुलसीदास, राजबाबू, लहरी, कंचन सोनकर, प्रेमचंद्र, भैयालाल, वंशराज, बुधराम यादव आदि के साथ मिलकर शुरू की।
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उन्होंने बताया कि त्रिलोकपुर गांव में ही छह हैंडपंप कई साल से खराब पड़े हैं। इससे लोगों को पानी के लिए भटकना पड़ता है। कहा कि इस गांव के सभी खराब हैंडपंपों की मरम्मत वह जनसहयोग से कराएंगे। इसके अलावा और लोगों को अपने इस अभियान से जोड़ते हुए अन्य गांवों के भी खराब हैंडपंपों को ठीक कराकर ग्रामीणों को पानी की समस्या से निजात दिलाने की कोशिश होगी। समाजसेवी की इस पहल से ग्रामीण गदगद हैं।