{"_id":"5c50a61bbdec224e4507e4dc","slug":"accounts-of-gram-panchayats-will-now-be-monitored-online","type":"story","status":"publish","title_hn":"ग्राम पंचायतों के खातों की होगी अब ऑनलाइन निगरानी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ग्राम पंचायतों के खातों की होगी अब ऑनलाइन निगरानी
Wed, 30 Jan 2019 01:02 AM IST
shailendra Kumar
अमर उजाला ब्यूरो, कौशाम्बी
अमर उजाला ब्यूरो, कौशाम्बी
Published by: shailendra Kumar
Updated Wed, 30 Jan 2019 01:02 AM IST
विज्ञापन
rupee
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मंझनपुर। गांवों की तरक्की के लिए मिलने वाली रकम पर अब पहरा होगा। ऑनलाइन मानिटरिंग की व्यवस्था की जा रही है। पब्लिक फाइनेंसियल मैनेजमेंट सिस्टम (पीएफएमएस) के जरिए ग्राम सभा के खाते में धनराशि भेजी जाएगी। इसके लिए ग्राम प्रधान और सचिवों के डिजिटल सिगनेचर तैयार कराए जा रहे हैं।
गांवों के विकास के लिए केंद्र व प्रदेश सरकार की तरफ से सालाना लाखों की रकम अवमुक्त की जाती है। तमाम गांवों में विकास का यह पैसा बंदरबाट कर लिया जाता है। बताया जाता है कि ग्राम प्रधान और सचिव की साठगांठ से लाखों का गोलमाल होने से ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। इसके अलावा ग्राम पंचायतों के खाते में धनराशि हस्तांतरण की व्यवस्था इतनी जटिल है कि बजट पाने के लिए ग्राम प्रधानों को लगातार ब्लॉक व डीपीआरओ कार्यालय का चक्कर लगाना पड़ता है। खाते में धन जल्दी पहुंचे इसके लिए प्रधानों को एडवांस में कमीशन देना पड़ता है। अब सरकार इस व्यवस्था में बदलाव करने जा रही है। इस बार ग्राम पंचायतों से अगले वर्ष की वार्षिक कार्य योजना पाते ही बजट मांग लिया गया है।
ग्राम पंचायतों का बजट ऑनलाइन सिस्टम से भेजने की तैयारी चल रही है। इसके लिए पीएफ एमएस का इस्तेमाल किया जाएगा। इस व्यवस्था के लागू होने पर ग्राम प्रधान और सचिव के डिजिटल हस्ताक्षर से ही धन का आहरण हो सकेगा। इसके जरिए खाते में धन कब और किस तारीख को ट्रांसफर हुआ, किस बैंक के जरिए रकम निकाली गई। यह सब अपडेट होता रहेगा। डीपीआरओ का कहना है किअगले वित्तीय वर्ष से पीएमएफएस के जरिए ही ग्राम सभाओं के खाते में विकास का पैसा भेजा जाएगा। इसके लिए ग्राम प्रधानों/सचिवों के हस्ताक्षर डिजिटल कराए जा रहे हैं। इस व्यवस्था के लागू होने पर विकास कार्यों में और अधिक पारदर्शिता आएगी
विज्ञापन
विज्ञापन
गांवों के विकास के लिए केंद्र व प्रदेश सरकार की तरफ से सालाना लाखों की रकम अवमुक्त की जाती है। तमाम गांवों में विकास का यह पैसा बंदरबाट कर लिया जाता है। बताया जाता है कि ग्राम प्रधान और सचिव की साठगांठ से लाखों का गोलमाल होने से ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। इसके अलावा ग्राम पंचायतों के खाते में धनराशि हस्तांतरण की व्यवस्था इतनी जटिल है कि बजट पाने के लिए ग्राम प्रधानों को लगातार ब्लॉक व डीपीआरओ कार्यालय का चक्कर लगाना पड़ता है। खाते में धन जल्दी पहुंचे इसके लिए प्रधानों को एडवांस में कमीशन देना पड़ता है। अब सरकार इस व्यवस्था में बदलाव करने जा रही है। इस बार ग्राम पंचायतों से अगले वर्ष की वार्षिक कार्य योजना पाते ही बजट मांग लिया गया है।
विज्ञापन
ग्राम पंचायतों का बजट ऑनलाइन सिस्टम से भेजने की तैयारी चल रही है। इसके लिए पीएफ एमएस का इस्तेमाल किया जाएगा। इस व्यवस्था के लागू होने पर ग्राम प्रधान और सचिव के डिजिटल हस्ताक्षर से ही धन का आहरण हो सकेगा। इसके जरिए खाते में धन कब और किस तारीख को ट्रांसफर हुआ, किस बैंक के जरिए रकम निकाली गई। यह सब अपडेट होता रहेगा। डीपीआरओ का कहना है किअगले वित्तीय वर्ष से पीएमएफएस के जरिए ही ग्राम सभाओं के खाते में विकास का पैसा भेजा जाएगा। इसके लिए ग्राम प्रधानों/सचिवों के हस्ताक्षर डिजिटल कराए जा रहे हैं। इस व्यवस्था के लागू होने पर विकास कार्यों में और अधिक पारदर्शिता आएगी
विज्ञापन