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प्रशिक्षण के दौरान वेतन नहीं देने का आदेश रद
Kaushambi
Updated Fri, 27 Sep 2013 05:36 AM IST
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इलाहाबाद (ब्यूरो)। हाईकोर्ट ने प्रदेश के पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षण के दौरान वेतन नहीं देने संबंधी शासनादेश को रद कर दिया है। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि यह शासनादेश मनमानापूर्ण है, पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षण के दौरान भी वेतन व भत्ते पाने का पूरा अधिकार है। यह राज्य सरकार की ही नीति है और सरकार अपनी नीति से पीछे नहीं हट सकती है। कोर्ट ने प्रशिक्षण ले रहे पुलिसकर्मियों को पूरा वेतन देने का आदेश दिया है। सुदीप कुमार समेत दर्जनों अभ्यर्थियोें की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल ने दिया है।
पुलिस विभाग में पूर्व के नियम के अनुसार चयन के बाद प्रशिक्षण और फिर नियुक्ति का नियम था। प्रशिक्षण के दौरान वेतन के बजाए स्टाइपेंड दिया जाता था। आठ जून 1998 को शासनादेश जारी कर सरकार ने यह नियम बदल दिया और चयन के बाद सीधे नियुक्ति तथा फिर प्रशिक्षण का नियम कर दिया। 17 सितंबर 2002 को एक और शासनादेश जारी करते हुए पूर्व के आदेश में संशोधन कर दिया गया। अब प्रशिक्षण के दौरान पुन: मानदेय की व्यवस्था कर दी गई। कोर्ट ने कहा कि जब नियुक्ति हो गई है तो कर्मचारी को वेतन और भत्ते प्राप्त करने का अधिकार है। उनके इस अधिकार में कटौती नहीं की जा सकती है क्योंकि सरकार ने नियुक्ति के बाद ट्रेनिंग पर भेजने का फैसला लिया है। पुलिसफोर्स में नियुक्ति के बाद एक कैडर बन जाता है जिसमें भेदभाव नहीं किया जा सकता है।
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पुलिस विभाग में पूर्व के नियम के अनुसार चयन के बाद प्रशिक्षण और फिर नियुक्ति का नियम था। प्रशिक्षण के दौरान वेतन के बजाए स्टाइपेंड दिया जाता था। आठ जून 1998 को शासनादेश जारी कर सरकार ने यह नियम बदल दिया और चयन के बाद सीधे नियुक्ति तथा फिर प्रशिक्षण का नियम कर दिया। 17 सितंबर 2002 को एक और शासनादेश जारी करते हुए पूर्व के आदेश में संशोधन कर दिया गया। अब प्रशिक्षण के दौरान पुन: मानदेय की व्यवस्था कर दी गई। कोर्ट ने कहा कि जब नियुक्ति हो गई है तो कर्मचारी को वेतन और भत्ते प्राप्त करने का अधिकार है। उनके इस अधिकार में कटौती नहीं की जा सकती है क्योंकि सरकार ने नियुक्ति के बाद ट्रेनिंग पर भेजने का फैसला लिया है। पुलिसफोर्स में नियुक्ति के बाद एक कैडर बन जाता है जिसमें भेदभाव नहीं किया जा सकता है।
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